September 22, 2026 8:55 am

इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब पर बैन की तैयारी: पीएम जॉर्जिया मेलोनी का बड़ा ऐलान, विदेशी छात्रों की संख्या पर भी लगेगी कैप

यूरोपीय देश इटली में शिक्षा और प्रवासन नीतियों को लेकर एक बड़ा नीतिगत बदलाव देखने को मिल रहा है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्पष्ट घोषणा की है कि देश के स्कूलों में बुर्का और नकाब जैसे चेहरा पूरी तरह ढकने वाले परिधानों पर कानूनी रोक लगाई जाएगी। रोम में आयोजित अपनी पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ के युवा मोर्चे के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मेलोनी ने कहा कि स्कूल में किसी भी छात्र या छात्रा को चेहरा ढककर आने की अनुमति नहीं दी जा सकती। परंपरा या धर्म के नाम पर किसी भी युवती को खुद को छिपाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इस फैसले के साथ ही कक्षाओं में विदेशी मूल के विद्यार्थियों की संख्या सीमित करने का प्रस्ताव भी कैबिनेट में लाया जा रहा है, जिसने पूरे यूरोप के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि इटली के स्कूलों में आने वाले प्रत्येक छात्र का चेहरा खुला होना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि परंपरा की आड़ में किसी भी महिला या छात्रा को स्कूल परिसर में नकाब के भीतर रहने की छूट नहीं दी जा सकती।

प्रस्तावित नियमों के तहत मुख्य रूप से उन परिधानों को प्रतिबंधित किया जा रहा है जो पूरे चेहरे को ढंकते हैं, जिनमें बुर्का और नकाब शामिल हैं। नकाब आमतौर पर केवल आंखों को खुला छोड़ता है और बुर्का पूरे शरीर व चेहरे को जालीदार पर्दे से ढकता है। हालांकि, सामान्य हिजाब (जो केवल सिर और बालों को ढकता है और चेहरा पूरी तरह खुला रहता है) पर अलग से कोई रोक लगाने का जिक्र नहीं किया गया है। सरकार का मानना है कि कक्षा के भीतर शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच सीधा संवाद, पहचान की स्पष्टता और सुरक्षा के लिहाज से चेहरा खुला रहना अत्यंत आवश्यक है। इस मसौदे को शीघ्र ही कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा, जिसके बाद इसे संसद में मंजूरी के लिए पेश किया जाना है।

बुर्का बैन के साथ ही मेलोनी सरकार ने एक और कड़ा कदम उठाते हुए हर कक्षा में विदेशी छात्रों की अधिकतम सीमा तय करने का प्रस्ताव तैयार किया है। मेलोनी ने इस पर जोर देते हुए कहा कि इटली के स्कूलों में इतालवी बच्चों को अपनी ही कक्षा के भीतर अल्पसंख्यक जैसा महसूस नहीं होना चाहिए।

मेलोनी का तर्क है कि यदि किसी कक्षा में एक या दो बच्चे स्थानीय इतालवी भाषा नहीं समझते हैं, तो शिक्षक और सहपाठी उनकी मदद कर सकते हैं और वे आसानी से मुख्यधारा में शामिल हो जाते हैं। इसके विपरीत, यदि किसी कक्षा में स्थानीय भाषा न जानने वाले विदेशी छात्रों की संख्या बहुत बड़ी हो जाती है या वे बहुमत में आ जाते हैं, तो शिक्षा का स्तर प्रभावित होता है। मेलोनी के अनुसार, ऐसी स्थिति को सामाजिक समावेशन (Integration) नहीं बल्कि व्यवस्था की ‘लापरवाही’ कहा जाएगा। शोध संस्थान फोंडाजियोने आईएसएमयू (Fondazione ISMU) के आंकड़ों के मुताबिक, इटली के स्कूलों में कुल नामांकित छात्रों में से लगभग 11.6 प्रतिशत छात्र ऐसे हैं जिनके पास इटली की नागरिकता नहीं है। नए नियमों के तहत अब हर क्लास के लिए विदेशी छात्रों का एक निश्चित प्रतिशत या संख्या निर्धारित की जाएगी।

सरकार के इस नए विधेयक में केवल छात्रों तक ही नियम सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके परिवारों को भी इसके दायरे में लाया गया है। नए प्रस्ताव के अनुसार, जिन विदेशी छात्रों को इटली की शिक्षा प्रणाली और समाज में घुलने-मिलने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, उनके माता-पिता के लिए इतालवी भाषा सीखना अनिवार्य किया जा सकता है।

सरकार का मानना है कि जब तक माता-पिता स्थानीय भाषा और संस्कृति का बुनियादी ज्ञान हासिल नहीं करेंगे, तब तक घर पर बच्चों का शैक्षिक विकास संभव नहीं होगा। मेलोनी ने साफ शब्दों में कहा कि जो भी व्यक्ति इटली में अपना भविष्य बनाना चाहता है, उसे देश के नियमों का सम्मान करना होगा और स्थानीय भाषा को अपनाना होगा। भाषा की यह अनिवार्यता प्रवासियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और अलग-थलग बस्तियों (Ghettos) के निर्माण को रोकने के उद्देश्य से लाई जा रही है।

इटली का यह प्रस्तावित कानून यूरोप में पहले से चल रही उस नीतिगत शृंखला की कड़ी है जिसके तहत सार्वजनिक स्थलों पर चेहरा ढकने पर पाबंदियां लगाई गई हैं। फ्रांस ने वर्ष 2011 में सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने वाले किसी भी परिधान पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाया था। इसके अलावा बेल्जियम, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और स्विट्जरलैंड जैसे देशों ने भी सार्वजनिक स्थानों पर पूरे चेहरे को ढंकने वाले नकाब पर कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं। नीदरलैंड में स्कूलों, सरकारी इमारतों और सार्वजनिक परिवहन में चेहरा ढकने पर आंशिक रोक पहले से लागू है।

इटली में मेलोनी सरकार की इस घोषणा के बाद जहां दक्षिणपंथी और स्थानीय समर्थक इसे राष्ट्रीय पहचान, सुरक्षा और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं मानवाधिकार संगठन और विपक्षी दल इसे प्रवासियों के प्रति भेदभावपूर्ण और उनके व्यक्तिगत अधिकारों पर हमला करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में जब यह बिल इटली की कैबिनेट और संसद में पहुंचेगा, तो इस पर विस्तृत कानूनी और राजनीतिक बहस होना तय माना जा रहा है।

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