
Ajit Doval Over Operation Sindoor: नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर बड़ा बयान दिया है। दरअसल, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बनी एक डॉक्यू सीरीज में अजीत डोभाल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साफ संदेश था कि पहलगाम आतंकी हमले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, चाहे “वे जमीन पर हों या नर्क में”। बता दें कि दो हिस्सों वाली यह डॉक्यू सीरीज डिस्कवरी चैनल पर दिखाई जाएगी और इसका प्रीमियर कल देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर होगा।
जमीन पर हों, आसमान में हों…
ऑपरेशन सिंदूर के बारे में अपनी पहली टेलीविजन पर दी गई टिप्पणी में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने याद करते हुए कहा कि “प्रधानमंत्री ने कहा, पहलगाम आतंकी हमले के जिम्मेदार लोगों ‘जमीन पर हों, आसमान में हों, पाताल में हों, कहीं भी हों, हम उनके पीछे जाएंगे’।”
डोभाल ने आगे कहा पीएम ने कहा था, “हम भारत और उसके लोगों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। युद्ध के मैदान में हमने हमेशा पाकिस्तान को हराया है, और इस बार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने एक नया आयाम जोड़ा है।” डोभाल ने आगे कहा PM मोदी ने साफ किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ़ एक नाम नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों लोगों की भावनाओं की झलक और न्याय का अटूट संकल्प है।
पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए थे
ऑपरेशन सिंदूर भारत ने 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। यह हमला पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने किया था, जिन्होंने नागरिकों का धर्म पूछने के बाद उन्हें निशाना बनाया। इस हमले को भारत में सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश के तौर पर देखा गया।
ऑपरेशन सिंदूर से आतंकी नेटवर्क तबाह
भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और PoJK में मौजूद आतंकी नेटवर्क और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया, ताकि आतंकवाद फैलाने वालों और इसकी साजिश रचने वालों को सजा दी जा सके और आतंकी कैंप व ट्रेनिंग सेंटर खत्म किए जा सकें।
पाकिस्तान की तरफ से तनाव बढ़ाने के बाद, भारत ने उसके एयरबेस पर जोरदार हमले किए, जिससे उसे सीजफायर (युद्ध विराम) के लिए मजबूर होना पड़ा। पहलगाम आतंकी हमले में शामिल तीनों आतंकियों को सेना, CRPF और J-K पुलिस ने ‘ऑपरेशन महादेव’ में मार गिराया।
ऑपरेशन सिंदूर के जरिए सिंधु जल संधि पर भी वॉर
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत एक निर्णायक कदम सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को खत्म करना था। सरकार ने कहा कि 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाएगा, जब तक कि पाकिस्तान भरोसेमंद और पक्के तौर पर सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं कर देता।
इसके पाकिस्तान के लिए दूरगामी नतीजे होंगे, क्योंकि वह अपनी 16 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि के 80% हिस्से और कुल पानी के इस्तेमाल के 93% हिस्से के लिए सिंधु नदी प्रणाली पर बहुत ज्यादा निर्भर है। यह प्रणाली 237 मिलियन लोगों की जरूरतें पूरी करती है और गेहूं, चावल व कपास जैसी फसलों के ज़रिए पाकिस्तान की GDP में एक-चौथाई योगदान देती है।
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