
जब भी दुनिया भर में आयोजित होने वाली सबसे बड़ी, कठिन और विशाल प्रतियोगी परीक्षाओं की बात होती है, तो आम तौर पर हमारे जेहन में भारत की नीट (NEET), जेईई (JEE) या यूपीएससी (UPSC) जैसी परीक्षाओं का ही नाम आता है। लेकिन वैश्विक स्तर पर शिक्षा और परीक्षाओं के आंकड़े जुटाने वाली एक ताजा और बेहद चौंकाने वाली ग्लोबल रैंकिंग सामने आई है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। इस नई रैंकिंग के मुताबिक, भारत की कोई भी परीक्षा दुनिया की शीर्ष सबसे बड़ी परीक्षाओं में दूसरे स्थान पर नहीं है, बल्कि दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील की ‘ENEM’ परीक्षा ने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी परीक्षा होने का यह बड़ा खिताब अपने नाम कर लिया है। वहीं दूसरी ओर, दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षाओं की इस फेहरिस्त में भारत की लोकप्रिय राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी नेट (NET) को चौदहवां (14वां) स्थान मिला है। शिक्षा जगत और ग्लोबल एकेडमिक्स के गलियारों में इस नई रैंकिंग के जारी होने के बाद से ही इस बात पर बहुत बड़ी चर्चा छिड़ गई है कि आखिर किस देश की परीक्षा में कितने लाख परीक्षार्थी हिस्सा लेते हैं और पैमानों के लिहाज से कौन सी परीक्षा किस पायदान पर खड़ी है। आइए बेहद विस्तार, गहराई और रिपोर्टर की संवादात्मक शैली में इस पूरी ग्लोबल रैंकिंग के हर एक पहलू का विश्लेषण करते हैं कि आखिर ब्राजील की इस परीक्षा में ऐसा क्या खास है और भारत की परीक्षाएं वैश्विक मंच पर कहां ठहरती हैं।
क्या है ब्राजील की ‘ENEM’ परीक्षा और कैसे इसने बनाई दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा के रूप में अपनी धाक
ब्राजील में आयोजित होने वाली ‘ENEM’ (Exame Nacional do Ensino Médio) परीक्षा पिछले कुछ वर्षों में छात्रों के बीच दुनिया की सबसे बड़ी शैक्षणिक परीक्षाओं में से एक के रूप में उभरी है। इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य ब्राजील के माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा यानी विश्वविद्यालयों में प्रवेश दिलाने के लिए उनकी योग्यताओं का मूल्यांकन करना है। प्रत्येक वर्ष इस परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले और इसमें शामिल होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या इतनी विशाल होती है कि यह दुनिया के कई देशों की कुल आबादी को भी पीछे छोड़ देती है। ब्राजील जैसे बड़े भौगोलिक और जनसांख्यिकीय देश में राष्ट्रीय स्तर पर एक ही समय पर इस प्रकार की विशाल परीक्षा का सफल आयोजन करना अपने आप में एक बहुत बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी चमत्कार माना जाता है। यही कारण है कि ग्लोबल रिसर्च और एजुकेशन रिपोर्ट्स में इसे चीन की गाओकाओ (Gaokao) के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी परीक्षा के रूप में आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई है, जहाँ लाखों की तादाद में युवा अपने सुनहरे भविष्य की उम्मीद के साथ परीक्षा केंद्रों पर पहुंचते हैं।
ग्लोबल रैंकिंग में भारत की स्थिति, नीट-जेईई और यूपीएससी के बीच नेट (NET) परीक्षा को मिला 14वां स्थान
जब बात भारत की विशाल प्रतियोगी परीक्षाओं की आती है, तो हमारे देश में हर साल मेडिकल प्रवेश के लिए नीट, इंजीनियरिंग के लिए जेईई और प्रशासनिक सेवाओं के लिए यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में कोहराम मच जाता है, जहाँ बैठने वाले उम्मीदवारों की संख्या भी कई बार बीस-पच्चीस लाख को पार कर जाती है। हालांकि, इस वैश्विक परीक्षा रैंकिंग में भारत की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी नेट (UGC NET) को चौदहवें (14वें) स्थान पर जगह दी गई है, जो प्रोफेसर बनने और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए आयोजित की जाती है। भारत के विशाल जनमानस और युवाओं के बीच परीक्षाओं के प्रति क्रेज को देखते हुए यह रैंकिंग कई मायनों में बेहद दिलचस्प हो जाती है, क्योंकि यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले युवाओं का हुजूम दुनिया के कई छोटे देशों की कुल आबादी से भी ज्यादा बड़ा होता है। जानकारों का यह मानना है कि भारत में परीक्षाओं का यह पैमाना केवल चयन प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों युवाओं की आजीविका और उनके सपनों की उड़ान का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है।
परीक्षा के पैमाने, परीक्षार्थियों की संख्या और प्रशासनिक जटिलता के आधार पर कैसे तय होती है यह वैश्विक सूची
दुनिया भर में होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की इस नई रैंकिंग को तैयार करने वाली संस्थाओं ने इसमें भाग लेने वाले कुल उम्मीदवारों की संख्या, परीक्षा के भौगोलिक प्रसार, विषयों की विविधता और आयोजन की प्रशासनिक जटिलता जैसे कड़े मानदंडों को आधार बनाया है। उदाहरण के लिए, चीन की ‘गाओकाओ’ परीक्षा को दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा माना जाता है, क्योंकि वहां एक साथ करोड़ों छात्र एक ही पैटर्न पर इस परीक्षा को देते हैं। इसके बाद अब ब्राजील की ‘ENEM’ परीक्षा ने अपने विशाल उम्मीदवार आधार के बल पर दूसरा स्थान हासिल कर लिया है, जो यह दर्शाता है कि दक्षिण अमेरिका में शिक्षा के प्रति युवाओं का रुझान किस हद तक बढ़ रहा है। भारत जैसे देशों में जहाँ परीक्षाओं का आयोजन कई चरणों, ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड तथा विभिन्न भाषाओँ में किया जाता है, वहां उम्मीदवारों की कुल संख्या तो बहुत ज्यादा होती है, लेकिन वैश्विक रैंकिंग के मानकों के हिसाब से विभिन्न श्रेणियों का विभाजन अलग तरीके से तय किया जाता है। इस रिपोर्ट के आने के बाद से ही यह बहस छिड़ गई है कि आने वाले समय में तकनीक के जरिए इन विशाल परीक्षाओं के प्रबंधन को और अधिक सुगम कैसे बनाया जाए।
आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन और डिजिटल युग में कैसे मिनटों में वायरल होती हैं वैश्विक शिक्षा और परीक्षा की ऐसी रैंकिंग्स
आज का यह आधुनिक डिजिटल दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया एल्गोरिदम और आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन का युग बन चुका है जहाँ शिक्षा, ग्लोबल रैंकिंग और दुनिया भर की परीक्षाओं से जुड़े रोचक आंकड़े पलक झपकते ही इंटरनेट पर छा जाते हैं। जब से ब्राजील की ‘ENEM’ के दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी परीक्षा होने और भारत की नेट परीक्षा के 14वें स्थान पर रहने की यह रिपोर्ट सामने आई है, डिजिटल सर्च इंजन और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इससे जुड़े आंकड़े तेजी से ट्रेंड करने लगे हैं। भारत और दुनिया भर के छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा प्रेमियों ने गूगल के माध्यम से इस ग्लोबल रैंकिंग के हर एक बिंदु, देशों के परीक्षा पैमानों और अपनी तैयारी के तरीकों को बहुत गहराई से खंगालना शुरू कर दिया है। तकनीक और सोशल मीडिया के इस पारदर्शी दौर में अब दुनिया के किसी भी कोने में जारी होने वाली शिक्षा से जुड़ी ऐसी रिपोर्ट्स छिपी नहीं रह सकती हैं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उनका तुरंत विश्लेषण सामने आ जाता है, जहाँ हर कोई यह देखता है कि वैश्विक शिक्षा के नक्शे पर कौन सा देश किस पायदान पर खड़ा है।







