November 4, 2026 2:16 am

नेतन्याहू की सत्ता को बड़ा झटका, गादी आइसेनकोट को प्रधानमंत्री बनाने के लिए बेनेट और लैपिड समेत कई दिग्गज हुए एकजुट

मध्य पूर्व की राजनीति और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के केंद्र इजरायल से इस वक्त एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज राजनीतिक खबर सामने आ रही है। लंबे समय से देश की सत्ता पर काबिज प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक वर्चस्व के खिलाफ इजरायली संसद में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। देश में नई सरकार के गठन और राजनीतिक स्थिरता बहाल करने के लिए अब प्रमुख राजनीतिक दल मध्यमार्गी गठबंधन के कद्दावर नेता और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट (Gadi Eisenkot) के पक्ष में एकजुट होने लगे हैं। इजरायली राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ चुकी है कि देश के मतदाताओं ने बदलाव के लिए मतदान किया है, और अब समय आ गया है कि राष्ट्रपति आइजक हरजोग सरकार बनाने के लिए आइसेनकोट को औपचारिक रूप से आमंत्रित करें। पूर्व प्रधानमंत्री नाफ्ताली बेनेट और विपक्षी नेता याइर लैपिड समेत कई बड़े नेताओं के खुलकर समर्थन में आने के बाद नेतन्याहू की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इजरायल की राजनीति में चल रहे इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के पीछे की पूरी कहानी क्या है।

नाफ्ताली बेनेट और एविग्डोर लिबरमैन ने की आइसेनकोट को पीएम बनाने की जोरदार मांग

इजरायल के राजनीतिक पटल पर नेतन्याहू विरोधी दलों ने अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी है। समाचार एजेंसी एएनआई और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बियाहाड पार्टी के नेता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री नाफ्ताली बेनेट (Naftali Bennett) ने खुलकर ऐलान किया है कि वे राष्ट्रपति से यह मांग करेंगे कि याशर पार्टी के प्रमुख गादी आइसेनकोट को तुरंत प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई जानी चाहिए। बेनेट का कहना है कि चुनावी जनादेश का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए और देश को सही रास्ते पर वापस लाने के लिए आइसेनकोट का नेतृत्व इस समय सबसे जरूरी है।

इसी कड़ी में, इजरायल बेतेनु पार्टी के प्रमुख एविग्डोर लिबरमैन ने भी बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में किसी भी मिली-जुली या दक्षिणपंथी सरकार के गठन की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। लिबरमैन का तर्क है कि इजरायल की जनता ने जो मतदान किया है, उसका मुख्य उद्देश्य नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करना था, क्योंकि संसद में नेतन्याहू विरोधी दलों के पास स्पष्ट बहुमत मौजूद है। लिबरमैन ने यह भी साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी गादी आइसेनकोट को प्रधानमंत्री और याइर लैपिड को देश की संसद ‘नीसेट’ का स्पीकर बनाए जाने के प्रस्ताव का पूरी तरह समर्थन करती है।

गादी आइसेनकोट के आवास के बाहर हंगामा, दक्षिणपंथी समर्थकों ने किया प्रदर्शन

एक तरफ जहां राजनीतिक गलियारों में आइसेनकोट के समर्थन में माहौल बन रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश में तनाव का माहौल भी गहराता जा रहा है। हाल ही में रविवार रात को गादी आइसेनकोट के निजी आवास के बाहर भारी संख्या में दक्षिणपंथी दलों के समर्थक पहुंच गए और वहां जोरदार नारेबाजी तथा तोड़फोड़ का प्रयास किया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि गाजा युद्ध के दौरान पूर्व सेना प्रमुख रहे आइसेनकोट की नीतियों के कारण ही उनके बेटों और सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इस घटना की इजरायल के कई नेताओं ने कड़ी निंदा की है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता याइर गोलान ने आइसेनकोट के घर के बाहर हुए इस हंगामे के लिए सीधे तौर पर नेतन्याहू समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया है। गोलान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि दक्षिणपंथी दल और नेतन्याहू समर्थक यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं कि देश की सत्ता पर उनकी विचारधारा से अलग कोई दूसरा योग्य व्यक्ति बैठे। उन्होंने राजनेताओं को राजनीति में मर्यादा और नैतिक सीमाओं का पालन करने की सख्त सलाह दी है।

राष्ट्रपति आइजक हरजोग के पाले में गेंद, क्या नेतन्याहू का युग होगा समाप्त

अंतरराष्ट्रीय मीडिया एजेंसी रायटर के अनुसार, इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर अब पूरी राजनीतिक गेंद राष्ट्रपति आइजक हरजोग (Isaac Herzog) के पाले में चली गई है। हालांकि राष्ट्रपति हरजोग ने अपने संतुलित और विनम्र स्वभाव के तहत सभी दलों को खुले मन और खुले दिल से संसद में आकर बातचीत करने का आह्वान किया है, जिससे तकनीकी रूप से बेंजामिन नेतन्याहू के लिए भी थोड़ी बहुत गुंजाइश बची हुई है।

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हवा का रुख मौजूदा प्रधानमंत्री नेतन्याहू के पक्ष में बिल्कुल नजर नहीं आ रहा है। नेतन्याहू के मौजूदा दक्षिणपंथी गठबंधन के दायरे से बाहर के किसी भी अन्य प्रमुख दल या नेता ने उनके समर्थन में अब तक एक भी बयान नहीं दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि राष्ट्रपति हरजोग मध्यमार्गी दलों की मांग का सम्मान करते हुए गादी आइसेनकोट को सरकार बनाने का न्योता देते हैं, तो इजरायल की राजनीति में दशकों पुराना एक बड़ा दौर समाप्त हो सकता है और देश को एक नया नेतृत्व मिल सकता है।

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