September 16, 2026 9:16 pm

भगवान विश्वकर्मा: शिल्प शास्त्र के जनक, देवताओं की नगरी से दिव्य अस्त्र-शस्त्रों तक के रचयिता

!!शिल्प शास्त्र के सर्वश्रेष्ठ आविष्कारक भगवान विश्वकर्मा!!
(डॉ.कमल किशोर डुकलान ‘सरल’)

भारतीय धर्मग्रंथों में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी का वंशज माना गया है जिन्हें शिल्प शास्त्र का सर्वश्रेष्ठ आविष्कारक माना जाता है।

विश्वकर्मा पूजा एक ऐसा पर्व है जिस पर्व पर शिल्पकार, कारीगर, श्रमिक भगवान विश्वकर्मा का पूजन करते हैं। कहा जाता है ब्रह्मा के पुत्र विश्वकर्मा ने सम्पूर्ण ब्रह्मांड का निर्माण किया था। इसलिए विश्वकर्मा को इस सृष्टि का एक कुशल वास्तुकार भी कहा जाता है। विश्वकर्मा दो शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है विश्व याने संसार या ब्रह्मांड कर्म से अर्थ है निर्माण कर्ता अर्था शिल्प शास्त्र के जनक विश्वकर्मा को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का निर्माण कर्ता कहा जाता है।

भगवान विश्वकर्मा को शिल्प शास्त्र का सर्वश्रेष्ठ आविष्कारक माना जाता है जिन्होंने विश्व के प्राचीनतम तकनीकी ग्रंथों की रचना की थी। धर्मग्रंथों में भगवान विश्वकर्मा को न केवल भवन वास्तु विद्या,रथ आदि वाहनों के निर्माण कर्ता ही नहीं माना जाता बल्कि उन्हें विभिन्न रत्नों के प्रभाव व उपयोग कर्ता माना जाता है। कहते हैं,कि उन्होनें ही देवताओं के विमानों की रचना की थी।

विश्वकर्मा अपने पिता भगवान ब्रह्मा के पदचिन्हों पर चलते हुए वास्तुकला के महान आचार्य बने। मनु,मय,त्वष्टा,शिल्पी और देवज्ञ इनके पुत्र हैं। इन पांचों पुत्रों को वास्तु शिल्प की अलग-अलग विधाओं में विशेषज्ञ माना जाता है।

विश्वकर्मा प्रकाश नामक ग्रंथ को वास्तु तंत्र का अपूर्व ग्रंथ माना जाता है। इसमें अनुपम वास्तु विद्या को गणितीय सूत्रों के आधार पर प्रमाणित किया गया है। ऐसा माना जाता है कि सभी पौराणिक संरचनाएं भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित हैं। भगवान विश्वाकर्मा के जन्म को देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन से माना जाता है। पौराणिक युग के अस्त्र और शस्त्र भगवान विश्वकर्मा द्वारा ही निर्मित हैं। वज्र का निर्माण भी उन्होंने ही किया था।

पौराणिक साक्ष्यों के मुताबिक स्वर्गलोक की इन्द्रपुरी, यमपुरी, वरुणपुरी, कुबेरपुरी,असुरराज रावण की स्वर्ण नगरी लंका,भगवान श्रीकृष्ण की समुद्र नगरी द्वारिका और पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर के निर्माण का श्रेय भी विश्वकर्मा को ही जाता है। पौराणिक कथाओं में इन उत्कृष्ट नगरियों के निर्माण के रोचक विवरण मिलते हैं।

उड़ीसा का विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर विश्वकर्मा के शिल्प कौशल का अप्रतिम उदाहरण माना जाता है। वेद व्यास जी द्वारा रचित विष्णु पुराण में उल्लेख है कि जगन्नाथ मंदिर की अनुपम शिल्प रचना से खुश होकर भगवान विष्णु ने उन्हेें शिल्पावतार के रूप में सम्मानित किया था।

माना जाता है कि विश्वकर्मा ने ही लंका का निर्माण किया था। इसके पीछे कहानी है कि शिव ने माता पार्वती के लिए एक महल का निर्माण करने के लिए भगवान विश्वकर्मा को कहा तो विश्वकर्मा ने सोने का महल बना दिया। इस महल के पूजन के दौरान भगवान शिव ने राजा रावण को आंमत्रित किया। रावण महल को देखकर मंत्रमुग्ध हो गया और जब भगवान शिव ने उससे दक्षिणा में कुछ देने को कहा तथा उसने महल ही मांग लिया। भगवान शिव ने उसे महल दे दिया और वापस पर्वतों पर चले गए।

कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने वज्र का निर्माण किया था। जो भगवान इंद्र का हथियार है। वज्र को ऋषि दधीचि और अज्ञेयस्त्र की हड्डियों से बनाया गया है। भगवान कृष्ण का सुदर्शन चक्र उनकी शक्तिशाली रचनाओं में से एक था।

विश्वकर्मा वैदिक देवता के रूप में सर्वमान्य हैं। इनको गृहस्थ आश्रम गृहस्थ आश्रम के लिए आवश्यक सुविधाओं का निर्माता और प्रवर्तक भी कहा गया है। अपने विशिष्ट ज्ञान-विज्ञान के कारण देव शिल्पी विश्वकर्मा मानव समुदाय ही नहीं वरन देवगणों द्वारा भी पूजित हैं। देवता,नर,असुर,यक्ष और गंधर्व सभी में उनके प्रति सम्मान का भाव है। इनकी गणना सर्वाधिक महत्वपूर्ण देवों में होती है।

इसी प्रकार विश्व कर्मा की एक कहानी और है कि महाभारत में पांडव जहां रहते थे उस स्थान को इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था। इसका निर्माण भी विश्ववकर्मा ने किया था। कौरव वंश के हस्तिनापुर और भगवान कृष्ण के द्वारका का निर्माण भी विश्वणकर्मा ने ही किया था। सतयुग का स्वर्ग लोक, त्रेता युग की लंका, द्वापर की द्वारिका और कलयुग के हस्तिनापुर आदि के रचयिता विश्वकर्मा जी की पूजा अत्यन्त शुभकारी है। सृष्टि के प्रथम सूत्रधार, शिल्पकार और विश्व के पहले तकनीकी ग्रन्थ के रचयिता भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं की रक्षा के लिये अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था।

भगवान विश्वकर्मा ने भव्य और सुरक्षित महलों के साथ देवताओं के उड़ने वाले रथों का निर्माण भी किया था। कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने वज्र का निर्माण किया था। जो भगवान इंद्र का हथियार है। वज्र को ऋषि दधीचि और अज्ञेयस्त्र की हड्डियों से बनाया गया है। भगवान कृष्ण का सुदर्शन चक्र उनकी शक्तिशाली रचनाओं में से एक था।

औद्योगिक श्रमिकों द्धारा इस दिन बेहतर भविष्य, सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों और अपने-अपने क्षेत्र में सफलता के लिए प्रार्थना की जाती हैं। यह त्योहार मुख्य रूप से दुकानों, कारखानों और उद्योगों द्वारा मनाया जाता है।

इस अवसर पर, कारखानों और औद्योगिक क्षेत्रों के श्रमिक अपने औजारों की पूजा करते हैं और भगवान विश्वकर्मा से उनकी आजीविका सुरक्षित रखने के लिए प्रार्थना करते हैं। वे मशीनों के सुचारू संचालन के लिए प्रार्थना करते हैं और विश्वकर्मा पूजा के दिन अपने उपकरणों का उपयोग करने से परहेज करते हैं।

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