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- एमपी के सेवानिवृत्त जज की जमानत रद्द | त्विशा शर्मा डेथ केस; गिरिबाला सिंह गिरफ्तार
शशिकांत तिवारी | भोपाल| जबलपुर7 मिनट पहले

भोपाल एक्ट्रेस-मॉडल त्विशा शर्मा मौत मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आरोपी सास रिटायर जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है. अदालत के फैसले में कई टिप्पणियाँ शामिल थीं जिन्होंने जांच के संचालन पर चिंता जताई।
न्यायमूर्ति देव नारायण मिश्रा की एकल-न्यायाधीश पीठ ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता, गवाहों के बयान और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पर उचित विचार किए बिना जमानत दे दी थी। अदालत ने आगे कहा कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और ऐसी संभावना है कि आरोपी इसे प्रभावित कर सकते हैं।
चोटों की प्रकृति, गवाहों के बयान, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और जांच के चल रहे चरण को ध्यान में रखते हुए, उच्च न्यायालय ने माना कि 15 मई को दी गई अग्रिम जमानत बरकरार नहीं रखी जा सकती।
आदेश के बाद भोपाल की सेशन कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया गया. हाई कोर्ट ने बुधवार रात करीब 1 बजे अपना फैसला सुनाया. आदेश के नौ घंटे के भीतर सीबीआई की एक टीम गिरिबाला सिंह के कटारा हिल्स स्थित आवास पर पहुंची. बाद में हाई कोर्ट के फैसले के करीब 17 घंटे बाद उन्हें सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया।

हाई कोर्ट के फैसले के 17 घंटे बाद गिरिबाला सिंह को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया.
अब आइए समझते हैं कि हाई कोर्ट ने किस आधार पर जमानत रद्द की
1. ट्रायल कोर्ट ने महत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज कर दिया
हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने केस डायरी में मौजूद तथ्यों और गवाहों के बयानों पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया. ट्रायल कोर्ट ने मुख्य रूप से बचाव दस्तावेजों पर भरोसा किया और निष्कर्ष निकाला कि मृतक की शिकायत केवल उसके पति के खिलाफ थी, जबकि रिकॉर्ड पर तथ्य कुछ और ही संकेत देते हैं।
2. पोस्टमॉर्टम में मिली छह चोटें बनीं प्रमुख आधार
हाई कोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को बेहद अहम माना. कोर्ट ने कहा कि त्विशा की मौत फांसी लगाने से हुई, लेकिन शरीर पर छह अन्य एंटीमॉर्टम चोटें भी थीं. इनमें से चार चोट बाएं हाथ पर, एक उंगली पर और एक सिर पर मिली है। एम्स की क्वेरी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि ये चोटें शरीर को फंदे से उतारते समय या अस्पताल ले जाते समय नहीं लगी थीं। हाई कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने इस पहलू की गंभीरता को नजरअंदाज किया है.
3. व्हाट्सएप चैट ने बदल दी केस की दिशा
मृतक के पिता की ओर से पेश हुए वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट में व्हाट्सएप चैट पेश की. इन चैट्स में त्विशा ने कथित तौर पर अपने परिवार को बताया था कि उसके पति और ससुराल वाले उसे “ड्रग एडिक्ट” मानते थे। उसे रोने की भी इजाज़त नहीं थी.
पति को उसके गर्भ में पल रहे बच्चे पर शक था। कहा गया कि गर्भपात के बाद ही उसे घर में रखा जाएगा। इसलिए वह अपने मायके लौटना चाहती थी. हाई कोर्ट ने कहा कि वॉट्सऐप चैट को महज पति के खिलाफ आरोप मानना गलत है. रिकार्ड से प्रथम दृष्टया सास की भूमिका भी सामने आ रही है।

त्विशा और समर्थ की शादी 9 दिसंबर 2025 को हुई थी।
4. गर्भपात के संबंध में गंभीर टिप्पणियाँ
अदालत ने माना कि यह निर्विवाद तथ्य है कि त्विशा गर्भवती थी और दो महीने के भीतर गर्भावस्था समाप्त हो गई। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि पति और सास ने उसके चरित्र पर संदेह कर गर्भपात का दबाव बनाया। महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मृतक के परिवार के मुताबिक, आरोपी पक्ष कहता था कि बच्चा किसी और का है और गर्भपात के बाद ही त्विशा को घर में रहने की इजाजत होगी.
5. हाई कोर्ट ने जांच में असहयोग के आरोप भी माने
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद भी आरोपी जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुआ. रिकॉर्ड के मुताबिक, 13 और 14 मई को नोटिस जारी किया गया था और जमानत के बाद भी 20, 21 और 23 मई को नोटिस दिया गया था, लेकिन गिरिबाला सिंह जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुईं. कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी के साथ असहयोग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
6. सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ का आरोप
मामले में पहली बार कोर्ट के सामने विस्तार से यह आरोप पेश किया गया कि आरोपी पक्ष ने सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की. सीबीआई ने कहा कि पुलिस ने 13 मई को डीवीआर जब्त कर लिया था, फिर भी आरोपी पक्ष के पास घटना की फुटेज थी. चुनिंदा क्लिप सोशल मीडिया पर लीक कर दी गईं, कथित तौर पर सबूतों को प्रभावित करने के इरादे से ऐसा किया गया।

रिटायर जज के घर से सीसीटीवी फुटेज जब्त भोपाल. आरोप है कि सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई.
7. पोस्टमॉर्टम के दौरान दो रिश्तेदारों की मौजूदगी पर उठे सवाल
सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान आरोपी की बहन डॉ. राजबाला सिंह भदौरिया और डॉ. यशवीर जेके मौजूद थे। दोनों भोपाल के वरिष्ठ डॉक्टर बताए गए। त्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा रहस्य, प्रभावशाली आरोपियों की संभावित संलिप्तता और चल रही जांच के दौरान असहयोग से संकेत मिलता है कि मामला अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए गिरिबाला सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत पड़ेगी.
8. त्विशा के खाते में पैसे भेजने से दहेज की मांग खारिज नहीं हो जाती
महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि शादी में महंगा दहेज और उपहार दिए गए थे, इसके बावजूद आरोपी पक्ष ने दावा किया कि दहेज उनके मानक के अनुरूप नहीं था। त्विशा के शेयर अपने नाम करने का दबाव बनाया जा रहा था. ट्रायल कोर्ट ने इस आधार पर राहत दी थी कि आरोपी पक्ष मृतक के खाते में पैसे भेजता था, लेकिन हाई कोर्ट ने कहा कि इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दहेज की मांग नहीं की गई थी.
9. रिटायर जज होने के बावजूद कोर्ट की सख्त टिप्पणी
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि गिरिबाला सिंह एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी हैं और उन्होंने साइबर अपराध, साइबर फोरेंसिक और अपराध स्थल प्रबंधन में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। यह आरोप लगाया गया कि इसी विशेषज्ञता का इस्तेमाल कथित तौर पर अपराध स्थल को प्रभावित करने के लिए किया गया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया, लेकिन जांच के दौरान इसे गंभीर परिस्थिति माना.
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अग्रिम जमानत एक असाधारण राहत है और अदालतों को गंभीर मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए। यदि ट्रायल कोर्ट महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज करता है, तो उच्च न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है।







