
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बहुप्रचारित 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में सामने आई गंभीर संरचनात्मक खामियों, घटिया गुणवत्ता और पहली ही बारिश में सड़क धंसने की घटनाओं पर बेहद सख्त दंडात्मक रुख अख्तियार किया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देशों के क्रम में एनएचएआई ने निर्माणदायी दिग्गज कंपनी पीएनसी इन्फ्राटेक लिमिटेड (PNC Infratech) और उसकी विशेष प्रयोजन इकाई अवध एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड को आगामी तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट करते हुए प्राधिकरण के समस्त नए टेंडरों से प्रतिबंधित कर दिया है। इस आदेश के लागू होने के बाद अब कंपनी अगले तीन साल तक एनएचएआई या उससे जुड़ी किसी भी सड़क परिवहन एजेंसी की नई बोली या टेंडरिंग प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकेगी। आगरा स्थित भाजपा के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य नवीन जैन के पारिवारिक समूह से जुड़ी इस कंपनी को 5 अगस्त 2026 को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने का कारण बताओ नोटिस थमाया गया था, जिसके बाद लंबी तकनीकी सुनवाई और विस्तृत साइट मुआयने के उपरांत यह कठोर प्रशासनिक फैसला लिया गया है।
लखनऊ से कानपुर के बीच यात्रा के समय को घटाकर 40 से 45 मिनट करने के महत्वाकांक्षी उद्देश्य के साथ 63 किलोमीटर लंबे इस एलिवेटेड व ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत रिकॉर्ड समय में पूरा करने का दावा किया गया था। 13 जुलाई को धूमधाम से इस नए एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया गया था, लेकिन उद्घाटन के महज 12 से 13 दिनों के भीतर जब मानसून की पहली भारी बारिश हुई, तो नव-निर्मित राजमार्ग की इंजीनियरिंग गुणवत्ता ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। एक्सप्रेसवे के कई महत्वपूर्ण हिस्सों पर डामर की परतें बुरी तरह धंस गईं, मुख्य कैरिजवे के बीच में गहरी दरारें उभर आईं और कई स्थानों पर एलिवेटेड स्ट्रक्चर के स्लैब से सीमेंट के बड़े-बड़े टुकड़े टूटकर नीचे गिरने लगे।
इस अप्रत्याशित संरचनात्मक विफलता ने न केवल रोजाना सफर करने वाले हजारों वाहन चालकों की जान जोखिम में डाली, बल्कि उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार की जीरो टॉलरेंस बुनियादी ढांचा नीति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। घटना के तुरंत बाद सड़क परिवहन मंत्रालय ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे एनएचएआई के परियोजना निदेशक, कंसल्टेंट इंजीनियरों और तकनीकी पर्यवेक्षकों पर सख्त प्रशासनिक गाज गिराई थी। संबंधित कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ ही पूरे 63 किलोमीटर के स्ट्रेच पर टोल प्लाजा संचालन और वाणिज्यिक टोल वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई थी। तभी से एनएचएआई मुख्यालय में कंपनी के तकनीकी स्पष्टीकरण और बचाव दलीलों की आधिकारिक सुनवाई चल रही थी, जिसे अंततः असंतोषजनक पाते हुए तीन साल के निष्कासन में बदल दिया गया।
एनएचएआई द्वारा 11 सितंबर 2026 को जारी किए गए प्रतिबंध आदेश की पुष्टि स्वयं पीएनसी इन्फ्राटेक ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियामकीय प्रावधानों के तहत बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को औपचारिक फाइलिंग भेजकर 14 सितंबर को की। कंपनी ने एक्सचेंज को सूचित किया कि एनएचएआई ने उसकी सहयोगी कंपनी अवध एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड पर पूर्व में प्रस्तावित प्रतिबंध का दायरा बढ़ाते हुए मूल कंपनी पीएनसी इन्फ्राटेक पर भी तीन साल का पूर्ण प्रतिबंध प्रभावी कर दिया है। जैसे ही यह नियामकीय खुलासा वित्तीय बाजारों में सार्वजनिक हुआ, शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों में भारी बिकवाली शुरू हो गई और मंगलवार को पीएनसी इन्फ्राटेक का शेयर 20 प्रतिशत के लोअर सर्किट के करीब पहुंच गया, जिससे कंपनी के बाजार पूंजीकरण को गहरा झटका लगा।
हालांकि, पीएनसी प्रबंधन ने शेयरधारकों को आश्वस्त करने का प्रयास करते हुए एक आधिकारिक बयान में कहा कि प्राधिकरण की इस कार्रवाई से कंपनी के मौजूदा चालू प्रोजेक्टों, निर्माण अनुबंधों और संचालन पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा। फिर भी, उद्योग विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि एनएचएआई की निविदाओं से तीन साल तक बाहर रहने और टेक्निकल कैपेसिटी रेटिंग (तकनीकी क्षमता) में भारी गिरावट आने के कारण भविष्य में घरेलू व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए हाईवे, एक्सप्रेसवे और मेट्रो टेंडर हासिल करने में कंपनी को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। कंपनी प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे एनएचएआई द्वारा पारित इस कठोर आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय या अपीलीय अधिकरण के समक्ष चुनौती देने के लिए सभी उपलब्ध विधिक और कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
पीएनसी इन्फ्राटेक पर तीन साल के इस व्यापक प्रतिबंध के साथ-साथ अब भारी वित्तीय मार पड़ने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। एनएचएआई ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क की स्थिति सुधारने और सुरक्षा ऑडिट पूरा होने तक टोल टैक्स वसूली पूरी तरह बंद करा रखी है। आधिकारिक गणना के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे से प्रतिदिन अनुमानित 42 लाख रुपये का टोल राजस्व एकत्र होना था। चूंकि यह परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत बनी है और निर्माण में खामियों के कारण टोल वसूली रुकी है, इसलिए प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि रोजाना होने वाले इस 42 लाख रुपये के भारी टोल राजस्व नुकसान की पूरी भरपाई निर्माणदायी कंपनी को अपने खजाने से करनी होगी।
इसके अलावा, निर्माण कार्य की वास्तविक मजबूती और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच के लिए एनएचएआई ने देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) के सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गठित की थी। आईआईटी खड़गपुर की टीम ने विभिन्न स्थलों से कोर ड्रिलिंग, डामर थिकनेस और कंक्रीट स्ट्रेंथ के नमूने एकत्रित कर अपनी तकनीकी जांच रिपोर्ट एनएचएआई को सौंप दी है। प्राधिकरण के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने पुष्टि की है कि जांच रिपोर्ट में सब-ग्रेड का धंसना, बारिश के पानी की समुचित निकासी का अभाव और कंक्रीट मिक्स में विसंगतियां प्रमुख वजहों के रूप में सामने आई हैं। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विशेषज्ञों की सिफारिशों के मुताबिक एक्सप्रेसवे पर केवल पैचवर्क या मामूली मरम्मत से काम नहीं चलने वाला है, बल्कि बड़े हिस्से की पूरी री-सरफेसिंग (सड़क को दोबारा नए सिरे से उखाड़कर बिछाना) करनी पड़ेगी। इस पूरे पुनर्निर्माण का शत-प्रतिशत खर्च कंपनी को खुद वहन करना होगा, जिससे कंपनी पर कई सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।









