
मानव शरीर के सबसे महत्वपूर्ण और बड़े अंगों में शुमार लिवर यानी यकृत को हमारे शरीर की मुख्य फैक्टरी कहा जाता है, जो पाचन से लेकर खून को साफ करने और ऊर्जा स्टोर करने जैसे सैकड़ों जरूरी काम संभालता है। लेकिन विडंबना यह है कि आधुनिक जीवनशैली, खानपान की बुरी आदतें और शारीरिक सक्रियता की कमी के चलते आज के समय में लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से महामारी का रूप लेती जा रही हैं। चिकित्सा विज्ञान और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा लिवर की बीमारियों को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ यानी खामोश कातिल के नाम से पुकारा जाता है, जिसके पीछे एक बेहद डरावनी और वैज्ञानिक सच्चाई छिपी हुई है। इस बीमारी को साइलेंट किलर इसलिए कहा जाता है क्योंकि जब लिवर अंदर ही अंदर खराब होना शुरू होता है या फैटी लिवर जैसी शुरुआती समस्याओं से जूझ रहा होता है, तो यह शुरुआती दौर में शरीर में कोई खास दर्द या स्पष्ट लक्षण प्रकट नहीं होने देता। लोग अपनी आम थकान और कमजोरी को नजरअंदाज करते रहते हैं, और जब तक इस गंभीर बीमारी के लक्षण बाहर आते हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और लिवर का अधिकांश हिस्सा खराब हो चुका होता है।
हमारे शरीर में लिवर एक ऐसा अनोखा और चमत्कारी अंग है जिसमें खुद को दोबारा पुनर्जीवित (Regenerate) करने की प्राकृतिक क्षमता होती है, जिसके कारण यह शुरुआती नुकसान को चुपचाप सहता रहता है। जब कोई व्यक्ति अत्यधिक मात्रा में जंक फूड, ऑयली खाना, प्रोसेस्ड शुगर और अनहेल्दी डाइट का सेवन करता है, या फिर शारीरिक रूप से बिल्कुल सक्रिय नहीं रहता, तो लिवर की कोशिकाओं में धीरे-धीरे अतिरिक्त चर्बी यानी फैट जमा होने लगता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में फैटी लिवर डिजीज (Fatty Liver Disease) कहा जाता है, जो आगे चलकर सिरोसिस और लिवर फेलियर जैसी जानलेवा बीमारियों का रास्ता साफ कर देती है। चूंकि लिवर के पास कोई भी दर्द महसूस करने वाली नसें (Pain Receptors) नहीं होती हैं, इसलिए वह अंदर से डैमेज होने के बावजूद व्यक्ति को दर्द का अहसास नहीं करा पाता। यही कारण है कि अधिकांश मरीजों को यह पता ही नहीं चल पाता कि उनका लिवर अंदर ही अंदर बीमारी की चपेट में आ चुका है और यही खामोशी इसे इंसानी शरीर का सबसे बड़ा दुश्मन बना देती है।
लिवर को अंदर से खोखला करने वाली बीमारियों में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD), अल्कोहलिक लिवर डिजीज, हेपेटाइटिस बी और सी जैसे खतरनाक वायरल संक्रमण मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके अलावा जो लोग जरूरत से ज्यादा शराब का सेवन करते हैं, उनका लिवर टॉक्सिन्स को बाहर निकालते-निकालते थक जाता है और लिवर की कोशिकाएं मरने लगती हैं। टाइप-2 डायबिटीज, बढ़ा हुआ मोटापा (Obesity), हाई ब्लड प्रेशर और शरीर में कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन भी सीधे तौर पर लिवर की सेहत को तबाह करने का काम करते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार पेनकिलर या एंटीबायोटिक्स दवाइयों का अत्यधिक सेवन करना भी लिवर पर भारी टॉक्सिक लोड डालता है, जिससे लिवर टिशूज डैमेज होने लगते हैं। जब ये सभी बीमारियां और बुरी आदतें एक साथ मिलकर लिवर पर दबाव डालती हैं, तो यह अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है और शरीर में जहर फैलने लगता है, जिससे मरीज की जान तक जा सकती है।
भले ही लिवर डिजीज को साइलेंट किलर कहा जाता है, लेकिन जब यह बीमारी थोड़ा आगे बढ़ती है तो शरीर कुछ बेहद सूक्ष्म और छुपे हुए संकेत देने लगता है, जिन्हें समय रहते पहचानना बहुत जरूरी है। बिना किसी मेहनत के लगातार अत्यधिक थकान रहना, शरीर में कमजोरी महसूस होना, आंखों या त्वचा का हल्का पीला पड़ना (पीलिया के लक्षण), पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में भारीपन या हल्का दर्द होना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा अचानक वजन कम होना, पैरों और टखनों में सूजन आना, त्वचा पर लगातार खुजली होना और पेशाब का रंग बहुत ज्यादा गहरा पीला होना भी इस बात की ओर इशारा करता है कि आपका लिवर खतरे में है। यदि किसी व्यक्ति को इनमें से कोई भी लक्षण लंबे समय तक महसूस हो, तो उसे तुरंत लापरवाही छोड़कर किसी अच्छे गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या लिवर विशेषज्ञ से मिलकर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) और अल्ट्रासाउंड करवा लेना चाहिए।
अपने जीवन को सुरक्षित रखने और लिवर को हमेशा स्वस्थ बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है कि हम अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाएं और खानपान पर विशेष ध्यान दें। अपने भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज, फाइबर युक्त आहार और भरपूर मात्रा में पानी को शामिल करें, जो लिवर को डिटॉक्सीफाई करने में मदद करते हैं। मैदा, रिफाइंड शुगर, पैक्ड फूड और अत्यधिक तली-भुनी चीजों से पूरी तरह तौबा कर लें, क्योंकि ये चीजें फैटी लिवर का सबसे बड़ा कारण बनती हैं। इसके अलावा नियमित रूप से योगासन, प्राणायाम, दौड़ना या जिम करना शुरू करें ताकि शरीर का वजन नियंत्रित रहे और फैट लिवर तक न पहुंच सके। शराब और धूम्रपान जैसी घातक आदतों से दूरी बनाना ही लिवर की लंबी उम्र की सबसे बड़ी गारंटी है, क्योंकि एक बार लिवर पूरी तरह खराब हो जाए तो इसका इलाज बेहद कठिन और महंगा हो जाता है, इसलिए ‘इलाज से बेहतर बचाव है’ के सिद्धांत को अपनाकर आज ही अपने लिवर की देखभाल शुरू करें।









