
देश में एक तरफ जहां दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, वहीं दूसरी तरफ समुद्र में बन रहे एक शक्तिशाली मौसमी सिस्टम ने कई राज्यों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बंगाल की खाड़ी में तीव्र चक्रवाती दबाव और डिप्रेशन (Depression) बनने को लेकर हाई अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मौसमी उथल-पुथल मॉनसून के विदाई चरण में तटीय और मध्य भारत के राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश ला सकती है।
पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी की रेखा आगे बढ़ रही है, लेकिन पूर्व और दक्षिण भारत में सक्रिय हो रहे इस नए वेदर सिस्टम के चलते अगले चार से पांच दिनों तक भयंकर गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज तूफानी हवाओं का दौर चलने का अनुमान है।
मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण अब पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में एक सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र (Low-Pressure Area) में तब्दील हो चुका है।
यह सिस्टम लगातार पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। मौसम विज्ञानियों का आकलन है कि 21 सितंबर तक यह पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में एक सशक्त डिप्रेशन (अवदाब) बन जाएगा और 22 सितंबर तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में ‘डीप डिप्रेशन’ (गहरे अवदाब) का रूप ले लेगा। इसके बाद 23 सितंबर की सुबह तक यह सिस्टम उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा तटों के करीब पहुंचेगा, जिससे तटीय इलाकों में समुद्र अशांत रहेगा और हवाओं की गति 70 से 75 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
इस गहरे दबाव का सबसे सीधा और विनाशकारी असर ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों पर पड़ने वाला है।
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ओडिशा: दक्षिण ओडिशा के जिलों (जैसे गंजम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी) में 23 और 24 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) होने की चेतावनी जारी की गई है। कई जगहों पर 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है।
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तटीय आंध्र प्रदेश: उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और यानम के इलाकों में 22 से 24 सितंबर के दौरान मूसलाधार बारिश का अलर्ट है। निचले इलाकों में जलभराव, स्थानीय नालों के उफान पर आने और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए आपदा प्रबंधन दलों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पूर्वी भारत के अन्य राज्यों में भी इस समुद्री सिस्टम का व्यापक असर देखने को मिलेगा:
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पश्चिम बंगाल: गांगेय पश्चिम बंगाल (कोलकाता, हावड़ा, दक्षिण व उत्तर 24 परगना, मेदिनीपुर) में 22 से 25 सितंबर के बीच रुक-रुक कर भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी 23-24 सितंबर को भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
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झारखंड: राज्य के कई हिस्सों में 21 और 22 सितंबर को बादलों की तेज गड़गड़ाहट और बिजली गिरने (Severe Lightning) की चेतावनी है, जबकि 23 से 25 सितंबर तक अधिकांश जिलों में भारी बारिश दर्ज हो सकती है।
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बिहार: उत्तर और दक्षिण बिहार के जिलों में 24 से 26 सितंबर के दौरान बादलों की सक्रियता बढ़ेगी और कई स्थानों पर तेज हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश का दौर शुरू होगा।
जैसे-जैसे यह मौसमी सिस्टम समुद्र से निकलकर जमीनी इलाकों की ओर बढ़ेगा, मध्य भारत के मौसम में भी भारी बदलाव आएगा:
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छत्तीसगढ़: दक्षिणी छत्तीसगढ़ के बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे जिलों में 24 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश का पूर्वानुमान है। 23 से 25 सितंबर के दौरान पूरे राज्य में व्यापक बारिश और आकाशीय बिजली की गतिविधियां देखने को मिलेंगी।
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महाराष्ट्र और विदर्भ: विदर्भ क्षेत्र में 24 और 25 सितंबर को भारी बारिश होने के आसार हैं। वहीं कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में 22-23 सितंबर को तेज बारिश की संभावना बनी हुई है।
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तेलंगाना और कर्नाटक: तेलंगाना में 23 से 25 सितंबर के बीच भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। कर्नाटक के तटीय और आंतरिक हिस्सों तथा केरल में भी स्थानीय स्तर पर बादलों की आवाजाही के साथ बारिश जारी रहेगी।
उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह अलग है। पश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर) से मानसून की आधिकारिक विदाई शुरू हो चुकी है और अगले कुछ दिनों में यह पंजाब, हरियाणा और सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ और हिस्सों से भी पीछे हट जाएगा।
उत्तर प्रदेश (लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, नोएडा) और दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों में वर्तमान में आसमान साफ या आंशिक रूप से बादलों वाला रहेगा। हालांकि, बंगाल की खाड़ी के इस डिप्रेशन के आगे बढ़ने पर 24-25 सितंबर के आसपास पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ तराई और सीमावर्ती जिलों में हल्की से मध्यम बारिश या बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। फिलहाल इन मैदानी इलाकों में दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी और उमस का असर बना रहेगा।
समुद्र में उठती ऊंची लहरों और तूफानी परिस्थितियों को देखते हुए मौसम विभाग ने एक सख्त समुद्री चेतावनी जारी की है:
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21 सितंबर को पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी में हवा की गति 45 से 55 किमी प्रति घंटे से लेकर 65 किमी प्रति घंटे के झोंकों तक पहुंच सकती है।
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22 से 24 सितंबर के दौरान मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में हवाएं 55 से 65 किमी प्रति घंटे तथा अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार पकड़ सकती हैं।
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मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे 20 से 25 सितंबर तक मध्य व उत्तर बंगाल की खाड़ी तथा ओडिशा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के तटीय समुद्र में बिल्कुल न जाएं। जो नावें पहले से समुद्र में हैं, उन्हें तुरंत निकटतम तट पर लौटने का निर्देश दिया गया है।









