
भारतीय स्मार्टफोन एक्सेसरीज बाजार में स्थानीय उद्योग को गंभीर संकट से उबारने के लिए केंद्र सरकार ने कड़ा कदम उठाने की पूरी तैयारी कर ली है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाले व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने चीन से आयात होने वाले मोबाइल कवर और फोन केस पर 5 साल की अवधि के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी (Anti-Dumping Duty) लगाने की औपचारिक सिफारिश की है। इस सिफारिश के तहत भारत में प्रवेश करने वाले प्रत्येक चीनी मोबाइल कवर पर ₹6.15 का निश्चित शुल्क (Cess/Duty) लगाया जाएगा, जिससे सस्ती और घटिया सामग्री के जरिए घरेलू बाजार को पाटने की अनुचित व्यापार प्रथाओं पर सीधा ब्रेक लग सके।
भारतीय स्मार्टफोन बाजार दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है, जहां सालाना करोड़ों हैंडसेट बेचे जाते हैं। इसके समानांतर मोबाइल बैक कवर, सिलिकॉन केस और प्रोटेक्टिव एक्सेसरीज का भी एक विशाल बाजार तैयार हुआ है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से चीनी निर्यातक बेहद कम उत्पादन लागत और सरकारी सब्सिडी के दम पर भारत में इन कवर्स को उनकी सामान्य उत्पादन लागत से भी काफी नीचे बेच रहे थे, जिसे व्यापार नियमों में ‘डंपिंग’ कहा जाता है।
व्यापार उपचार महानिदेशालय ने यह कदम यूं ही नहीं उठाया है, बल्कि इसके पीछे महीनों तक चली गहन और साक्ष्य-आधारित जांच प्रक्रिया शामिल है। देश के घरेलू प्लास्टिक मोल्डिंग, सिलिकॉन प्रोसेसिंग और स्मार्टफोन एक्सेसरीज निर्माताओं ने डीजीटीआर के समक्ष एक विस्तृत याचिका दायर की थी। इस याचिका में स्पष्ट रूप से साबित किया गया था कि चीन से आने वाले बेहद सस्ते कवर्स के कारण भारत में उत्पादन करने वाली सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयां (MSME) भारी वित्तीय घाटे का सामना कर रही हैं और कई छोटी फैक्ट्रियों पर ताले लटकने की नौबत आ चुकी है।
डीजीटीआर ने आयातित कवर्स की लैंडेड लागत (Landed Cost), स्थानीय निर्माण लागत और दोनों के बीच मूल्य अंतर का बारीकी से विश्लेषण किया। जांच में पाया गया कि चीनी कंपनियों द्वारा भारतीय बाजार में मोबाइल कवर्स की डंपिंग जानबूझकर की जा रही थी ताकि स्थानीय प्रतिस्पर्धियों को बाजार से बाहर किया जा सके। इस विसंगति को दूर करने और घरेलू निर्माताओं को समान अवसर (Level Playing Field) प्रदान करने के लिए प्रति कवर ₹6.15 का शुल्क लगाना अनिवार्य माना गया।
अधिकांश उपभोक्ताओं के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इस नए टैक्स से उनके लिए मोबाइल कवर खरीदना बहुत महंगा हो जाएगा। विशेषज्ञों का आकलन है कि खुदरा स्तर पर इसका प्रभाव बहुत सीमित और नगण्य रहेगा:
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सड़कों और पटरियों पर मिलने वाले कवर्स: फुटपाथ और लोकल बाजारों में ₹50 से ₹100 में बिकने वाले गैर-ब्रांडेड कवर्स की लागत में ₹6 से ₹10 तक का मामूली अंतर आ सकता है।
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प्रीमियम और ऑनलाइन ब्रांड्स: ₹300 से ₹1,500 के बीच बिकने वाले प्रीमियम और ब्रांडेड कवर्स के मार्जिन पहले से अधिक होते हैं, इसलिए कंपनियां इस मामूली शुल्क का बोझ खुद वहन कर लेंगी और अंतिम ग्राहक पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
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क्वालिटी में सुधार: सस्ते रिसाइकिल प्लास्टिक और हानिकारक रसायनों से बने चीनी कवर्स के स्थान पर अब बेहतर गुणवत्ता वाले गैर-विषाक्त (Non-Toxic) स्थानीय कवर्स को बढ़ावा मिलेगा।
इस एंटी-डंपिंग ड्यूटी का सबसे बड़ा लाभ देश के स्थानीय विनिर्माताओं और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मिलेगा। भारत पहले से ही मोबाइल हैंडसेट निर्माण में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है, लेकिन कंपोनेंट और एक्सेसरीज इकोसिस्टम में अब भी आत्मनिर्भरता की कमी थी।
जब चीनी कवर्स पर ₹6.15 का सुरक्षात्मक शुल्क लगेगा, तो नोएडा, ग्रेटर नोएडा, चेन्नई, बेंगलुरु और पुणे के औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत स्थानीय प्लास्टिक व पॉलिमर इंजेक्शन मोल्डिंग इकाइयों को ऑर्डर्स मिलने बढ़ जाएंगे। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर हजारों नए रोजगार सृजित होंगे, बल्कि घरेलू कंपनियां नए डिजाइन, मजबूत सामग्री और नवाचार में पूंजी लगाने के लिए भी प्रोत्साहित होंगी।
डीजीटीआर केवल एक अर्ध-न्यायिक जांच एजेंसी है जो डंपिंग की पुष्टि होने पर उपायों की सिफारिश करती है। अब यह रिपोर्ट वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग (Department of Revenue) को भेजी गई है। वित्त मंत्रालय द्वारा आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचना जारी होते ही यह 5-वर्षीय एंटी-डंपिंग ड्यूटी देश भर के सभी बंदरगाहों और आईसीडी (Inland Container Depots) पर तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी। सरकार का यह कदम साफ संदेश देता है कि भारत विदेशी डंपिंग को बर्दाश्त नहीं करेगा और घरेलू उद्योग के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी उपाय अपनाएगा।








