
राजस्थान कैडर के सीनियर आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल (IAS Shikhar Agarwal) और उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर (IPS Prashakha Mathur) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (ACB) की ओर से की गई बड़ी कार्रवाई ने देश के प्रशासनिक गलियारों में तहलका मचा दिया है। राजस्थान सरकार ने निजी होटल कंपनी ‘अनंत ग्रुप/गोयल फैशन’ को आधिकारिक पद का दुरुपयोग कर अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाने और उदयपुर व अलवर (अजबगढ़) में बाजार मूल्य से बेहद कम दरों पर करीब 40 रिसॉर्ट विला खरीदने के आरोपों के बाद एसीबी जांच की औपचारिक मंजूरी दी है।
विभागीय अनुमतियों के बाद सीनियर आईएएस शिखर अग्रवाल को उनके सभी पदों से मुक्त करते हुए एपीओ (APO – Awaiting Posting Orders) कर दिया गया था। इसके तुरंत बाद राजस्थान सरकार ने एक्शन बढ़ाते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) के पद पर तैनात उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर को भी पदों से हटाकर एपीओ कर दिया है। फिलहाल आईएएस अफसर शिखर अग्रवाल विदेश (अमेरिका) दौरे पर हैं, जिसके चलते यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि उनके भारत लौटते ही एसीबी का अगला कानूनी कदम क्या होगा और क्या उनकी आईपीएस पत्नी भी जांच के सीधे घेरे में आएंगी? आइए इस पूरे मामले का ब्योरा और एसीबी का एक्शन प्लान विस्तार से समझते हैं।
क्या है 40 विला डील और वित्तीय अनियमितता का पूरा मामला?
एसीबी द्वारा दर्ज की गई प्राथमिक जांच (Preliminary Inquiry) की रिपोर्ट के अनुसार, 1990 कैडर के आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल ने अपनी प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक निजी रिसॉर्ट समूह (अनंत ग्रुप/गोयल फैशन) को नियमों में भारी छूट दी। आरोप है कि निर्माण शर्तों में छूट, बिना वेरिफिकेशन एनओसी और एक विशेष वित्तीय पैकेज स्वीकृत कराने के बदले अफसर व उनके परिवार को उदयपुर के भुजड़ा और अलवर के अजबगढ़ स्थित प्रीमियम रिसॉर्ट्स में 40 विला बेहद कम दामों में दिए गए।
एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्त के मुताबिक, जहां बाजार में एक-एक विला की कीमत 1.6 करोड़ रुपये के आसपास थी, वहीं इन्हें महज 15 लाख से 16.5 लाख रुपये प्रति विला के हिसाब से कागजों पर दर्शाकर खरीदा गया। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 27 मार्च को जिस दिन वित्त विभाग ने उस कंपनी को विशेष वित्तीय पैकेज की राहत दी, ठीक उसी दिन अफसरों और उनके परिजनों के नाम 20 विला की सेल डीड और लीज डीड एक साथ रजिस्टर कराई गई थी। इन विला से हर साल 1.80 करोड़ रुपये का रेंटल इनकम भी हासिल किया जा रहा था।
अमेरिका में बैठे IAS शिखर अग्रवाल पर कैसे तय हुआ ACB का कानूनी एक्शन प्लान?
मामला उजागर होने से ठीक पहले आईएएस शिखर अग्रवाल पहले से स्वीकृत छुट्टी पर अमेरिका चले गए थे। हालांकि, उनकी गैर-मजूदगी में भी जांच एजेंसी ने अपना कानूनी खाका पूरी तरह तैयार कर लिया है:
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प्राथमिक जांच का पंजीकरण: राज्य सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद एसीबी ने शिखर अग्रवाल के खिलाफ प्रिलिमिनरी जांच (PI) दर्ज कर ली है।
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दस्तावेजों व रजिस्ट्री की जब्ती: उदयपुर और अलवर के उप-पंजीयक (Sub-Registrar) कार्यालयों से खरीद-बिक्री, लीज डीड, बैंक ट्रांजैक्शन और स्टाम्प ड्यूटी से जुड़े सभी मूल दस्तावेज जब्त किए जा रहे हैं।
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वापसी पर लुकआउट और पूछताछ की तैयारी: जांच एजेंसी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, जैसे ही शिखर अग्रवाल अमेरिका से भारत लौटेंगे, एसीबी उन्हें समन जारी कर व्यक्तिगत पूछताछ के लिए तलब करेगी। यदि शुरुआती जांच में साक्ष्य और पुख्ता होते हैं, तो उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के तहत विधिवत एफआईआर (FIR) दर्ज की जा सकती है।
क्या IPS पत्नी प्रशाखा माथुर भी आएंगी ACB जांच के सीधे घेरे में?
इस प्रकरण का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि 1995 बैच की सीनियर आईपीएस अफसर प्रशाखा माथुर (ADG प्लानिंग, मॉडर्नाइजेशन एवं वेलफेयर) भी अब जांच के दायरे से बाहर नहीं हैं।
कार्मिक विभाग द्वारा शनिवार को जारी आदेश के तहत प्रशाखा माथुर को भी एपीओ (APO) कर दिया गया है। एसीबी की एफआईआर और प्राथमिक जांच दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि खरीदे गए 40 विला में से कई विला सीधे आईपीएस प्रशाखा माथुर के नाम पर, उनके दो बेटों के नाम पर और उनके माता-पिता (ससुराल पक्ष) के नाम पर रजिस्टर्ड कराए गए हैं।
यद्यपि एसीबी ने अभी तक आईपीएस माथुर के खिलाफ सीधी औपचारिक एफआईआर का ऐलान नहीं किया है, लेकिन विला में बेनामी मालिकाना हक और वित्तीय लेनदेन में नाम शामिल होने के कारण एजेंसी उन्हें भी पूछताछ के लिए समन भेज सकती है। यदि विला की खरीद में उनके वेतन/खातों के ट्रांजैक्शन पाए जाते हैं, तो वह भी सह-आरोपी के रूप में कानूनी घेरे में आ सकती हैं।
राजस्थान की राजनीति में भूचाल, ईडी और सीबीआई जांच की उठने लगी मांग
राजस्थान कैडर के इतने बड़े आईएएस-आईपीएस दंपत्ति पर एक साथ कार्रवाई से राज्य की नौकरशाही और राजनीति में भारी हड़कंप मच गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित विपक्ष के कई दिग्गज नेताओं ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए केवल एपीओ या विभागीय जांच को नाकाफी करार दिया है।
विपक्ष ने मांग की है कि चूंकि यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग और करोड़ों रुपये की सरकारी राजस्व हानि से जुड़ा है, इसलिए इस 40-विला घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जानी चाहिए। फिलहाल, एसीबी की यह तेजी इस बात का साफ संकेत है कि राजस्थान में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत प्रशासनिक पदों पर बैठे बड़े से बड़े अधिकारियों पर भी शिकंजा कसना तय हो चुका है।









