
उत्तर प्रदेश से रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में रूस (Russia) गए चार भारतीय युवकों के अचानक लापता हो जाने से उनके परिजनों में कोहराम मच गया है। पिछले डेढ़ महीने (45 दिनों) से लापता युवकों का अपने घर वालों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। परिजनों का आरोप है कि उन्हें रूस में सुरक्षा गार्ड या हेल्पर की नौकरी देने का झांसा देकर ले जाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें धोखे से रूसी सेना (Russian Army) में भर्ती कर युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया है। पीड़ित परिवारों ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) से गुहार लगाते हुए अपने बेटों की सकुशल भारत वापसी की मांग की है।
लापता युवकों के परिजनों के अनुसार, स्थानीय और दिल्ली स्थित कुछ धोखेबाज ट्रैवल एजेंटों ने उन्हें रूस में मोटी पगार वाली आसान नौकरी का सपना दिखाया था। इसके लिए परिवारों ने कर्ज लेकर और अपनी जमीन गिरवी रखकर एजेंटों को लाखों रुपये की फीस दी। हालांकि, जब युवक रूस पहुंचे, तो वहां उनके पासपोर्ट और मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए। रूसी भाषा में लिखे अनुबंधों (Contracts) पर जबरन हस्ताक्षर कराए गए और बिना किसी सैन्य प्रशिक्षण के उन्हें अग्रिम युद्ध मोर्चे पर तैनात कर दिया गया। अंतिम बार जब युवकों ने अपने घर फोन किया था, तब उन्होंने रोते हुए अपनी जान का खतरा बताया था और कहा था कि उन्हें वापस नहीं आने दिया जा रहा है।
रूस में फंसे उत्तर प्रदेश के इन चार युवकों से संपर्क टूटने के बाद से ही उनके गांवों और परिवारों में भारी चिंता का माहौल है। परिजनों का कहना है कि डेढ़ महीने से फोन बंद आ रहे हैं और किसी भी माध्यम से उनकी कोई खैर-खबर नहीं मिल रही है। पीड़ित परिवारों ने स्थानीय जिला प्रशासन, राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय के चक्कर काट-काटकर अपने बेटों की लोकेशन्स को ट्रैक करने और उन्हें वापस वतन लाने की अपील की है। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भी पत्र लिखकर रूसी दूतावास के जरिए त्वरित कूटनीतिक हस्तक्षेप (Diplomatic Intervention) की मांग उठाई है।
विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे इस फर्जीवाड़े और इंसानी तस्करी (Human Trafficking) के रैकेट के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियां भी अलर्ट मोड पर आ गई हैं। पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत के आधार पर संबंधित एजेंटों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी तरीके से भारतीय युवाओं को युद्धग्रस्त क्षेत्रों में भेजने वाले गिरोहों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, केंद्रीय एजेंसियों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे विदेश जाने से पहले केवल पंजीकृत रिक्रूटमेंट एजेंटों (Ministry of External Affairs Approved) के माध्यम से ही प्रक्रिया पूरी करें।
आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO), आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) और गूगल डिस्कवर के विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से, उत्तर प्रदेश से रूस गए लापता युवकों की यह संवेदनशील खबर इंटरनेट पर शीर्ष स्थान पर ट्रेंड कर रही है। गूगल और बिंग सर्च पर ‘UP Youths Missing in Russia’, ‘Forced Recruitment Russian Army Indian Youths’, ‘MEA Russia Missing Indians Update’ जैसे कीवर्ड्स को बड़े पैमाने पर खोजा जा रहा है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और रूस के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को ध्यान में रखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा इस मुद्दे को रूसी अधिकारियों के समक्ष उठाकर युवकों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।









