
उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई की उलटी गिनती शुरू होने के बीच मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। पिछले कुछ दिनों से तेज धूप और चिपचिपी उमस से बेहाल लोगों को लग रहा था कि मानसून पूरी तरह शांत हो चुका है, लेकिन मौसम विज्ञानियों के अनुसार यह मानसून का ‘फाइनल राउंड’ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ ने ताजा बुलेटिन जारी करते हुए प्रदेश के 44 जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंके वाली हवाएं चलने की गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह दौर भले ही लगातार मूसलाधार बारिश का न हो, लेकिन संवहनीय बादलों (Convective Clouds) के बनने से स्थानीय स्तर पर अचानक तेज बौछारें पड़ने और बिजली कड़कने की घटनाएं सामान्य से ज्यादा होंगी। लखनऊ से लेकर पूर्वांचल के सुदूर जिलों और तराई के इलाकों में अगले 48 से 72 घंटों के दौरान मौसम का यह बदला हुआ मिजाज दिन के तापमान को नीचे लाएगा, लेकिन उमस और आकाशीय बिजली के खतरे को भी बढ़ाएगा।
इस समय अचानक सक्रिय हुए मानसूनी तंत्र के पीछे की वैज्ञानिक परिस्थितियों को समझाते हुए आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि दक्षिण-पूर्व राजस्थान और उत्तरी गुजरात के ऊपर एक सुस्पष्ट चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) बना हुआ है। इसके साथ ही, मानसून की मुख्य अक्षीय रेखा यानी मानसूनी ट्रफ (Monsoon Trough) एक बार फिर अपनी सामान्य स्थिति से थोड़ा उत्तर की ओर, यानी हिमालय की तलहटी और उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों की ओर खिसक रही है। जब भी मानसूनी ट्रफ उत्तर की तरफ शिफ्ट होती है, तो बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों तरफ से आने वाली नम हवाएं उत्तर प्रदेश के वायुमंडल में टकराने लगती हैं। इस टकराव के चलते स्थानीय स्तर पर निम्न वायुदाब के छोटे-छोटे पॉकेट्स बन रहे हैं। यही वजह है कि राज्य के किसी भी हिस्से में बाढ़ जैसी व्यापक भारी बारिश की चेतावनी भले न हो, लेकिन तराई, मध्यांचल और पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में अगले दो से तीन दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश और कई स्थानों पर तेज वज्रपात की स्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।
मौसम विभाग द्वारा जारी की गई विस्तृत सूची के अनुसार, प्रदेश के 44 जिलों को येलो अलर्ट की श्रेणी में रखा गया है। पूर्वांचल के प्रमुख धार्मिक और औद्योगिक केंद्रों में शामिल वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, कुशीनगर और महाराजगंज में 20 सितंबर तक रुक-रुक कर बादलों की आवाजाही और गर्जना के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं। विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, प्रयागराज, फतेहपुर, कौशांबी, बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, झांसी, जालौन और ललितपुर में भी बादलों की तेज गड़गड़ाहट और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। दूसरी तरफ, नेपाल सीमा से सटे तराई बेल्ट के जिलों जैसे सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और सीतापुर में मानसूनी ट्रफ की नजदीकी के कारण गरज-चमक के साथ कई दौर की मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है। मध्य यूपी के लखनऊ, बाराबंकी, उन्नाव, कानपुर नगर, कानपुर देहात, रायबरेली, अमेठी और अयोध्या में भी दोपहर बाद अचानक घने काले बादल घिरने और बिजली कड़कने के साथ तेज बौछारों का अनुमान है।
उत्तर प्रदेश के मौसम में असली और बड़ा मोड़ 19 सितंबर से आने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों जैसे सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) और बुलंदशहर में 18 सितंबर तक ही हल्की से मध्यम बारिश और बूंदाबांदी के सीमित आसार हैं। 19 सितंबर से पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हवा का रुख पूरी तरह बदल जाएगा। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली पुरवाई (पूर्वी नम हवाएं) कमजोर पड़ने लगेंगी और उनकी जगह उत्तर-पश्चिम से आने वाली शुष्क पछुआ हवाएं (Northwesterly Winds) ले लेंगी। पछुआ हवाओं के सक्रिय होते ही वातावरण में नमी का स्तर तेजी से गिरेगा, जिससे आसमान पूरी तरह साफ हो जाएगा और मौसम शुष्क होने लगेगा। यह बदलाव दरअसल दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक वापसी (Monsoon Withdrawal) की शुरुआत का संकेत होगा। पश्चिमी यूपी से शुरू होने वाला यह शुष्क दौर धीरे-धीरे 22 से 25 सितंबर के बीच पूरे मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश को भी अपनी आगोश में ले लेगा, जिसके बाद दिन में धूप तेज होगी लेकिन रात के तापमान में हल्की ठंडक यानी ‘गुलाबी सर्दी’ की पहली आहट महसूस होने लगेगी।
मानसून के इस अंतिम चरण की गतिविधियों को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों और मौसम विभाग ने राज्य के किसानों के लिए विशेष कृषि परामर्श जारी किया है। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के खेतों में खरीफ की मुख्य फसल धान (Paddy) बालियां निकलने और दाना भरने के अत्यंत संवेदनशील चरण में है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक तरफ हल्की से मध्यम बारिश धान की फसल के लिए अमृत का काम करेगी और भूजल स्तर को रिचार्ज रखेगी, वहीं दूसरी तरफ आंधी और तेज हवाओं के साथ होने वाली बारिश से पकी या बालियों से लदी फसल के खेतों में गिरने (Lodging) का खतरा बढ़ जाता है। किसानों को सलाह दी गई है कि जिन जिलों में गरज-चमक और वज्रपात का अलर्ट है, वहां अगले दो-तीन दिनों तक खेतों में यूरिया या किसी भी तरह के रासायनिक कीटनाशक का छिड़काव रोक दें। खेतों में अधिक जलभराव न होने दें और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें। इसके अलावा, जिन किसानों ने मक्का, तिल, उड़द या मूंग की अगेती फसलों की कटाई कर ली है, वे अपनी कटी हुई उपज को खुले खलिहानों में रखने के बजाय सुरक्षित गोदामों या तिरपाल से ढके स्थानों पर रखें ताकि अचानक होने वाली बारिश से दाना खराब न हो।
मानसून के विदाई दौर में सबसे बड़ा जानलेवा खतरा आकाशीय बिजली गिरने का होता है, क्योंकि गर्म और ठंडी हवाओं के अचानक मिलने से बनने वाले कपासी-वर्षी बादल (Cumulonimbus Clouds) भारी मात्रा में स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी पैदा करते हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। आंधी चलने और बिजली कड़कने के दौरान खेतों में काम कर रहे किसान और मजदूर तुरंत पक्के मकानों में शरण लें। किसी भी परिस्थिति में अकेले खड़े ऊंचे पेड़ों, टीन शेड, पानी से भरे तालाबों या बिजली के खंभों व ट्रांसफार्मर के नीचे खड़े न हों। जब तक गड़गड़ाहट बंद न हो जाए, दोपहिया वाहन चलाने और मोबाइल फोन को खुले में चार्जिंग पर लगाकर बात करने से बचें। नागरिकों को अपने स्मार्टफोन में भारत सरकार के ‘दामिनी’ (Damini App) और ‘मौसम’ ऐप को डाउनलोड करने की सलाह दी गई है, जो जीपीएस लोकेशन के आधार पर आकाशीय बिजली गिरने से 20 से 30 मिनट पहले ऑडियो और मैसेज के जरिए चेतावनी अलर्ट जारी कर देते हैं। इस ‘फाइनल राउंड’ में सावधानी और मौसम की चेतावनियों पर निरंतर नजर रखना ही सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है।








