
हवाई यात्रा के दौरान विमान के भीतर होने वाली अप्रत्याशित घटनाओं में कॉकपिट सबसे सुरक्षित और संवेदनशील जगह मानी जाती है, जहां सैकड़ों यात्रियों की जान की कमान दो पायलटों के हाथों में होती है। लेकिन क्या हो जब कॉकपिट का दरवाजा अंदर से बंद हो और बगल की सीट पर बैठा को-पायलट ही अपने कैप्टन पर जानलेवा हमला बोल दे? फ्लाईदुबई (Flydubai) के पूर्व सीनियर कैप्टन स्मित मच्छार (Captain Smit Machhar) ने एक पॉडकास्ट साक्षात्कार में 35,000 फीट की ऊंचाई पर हवा में घटी एक ऐसी खौफनाक और दिल दहला देने वाली घटना का खुलासा किया है, जिसे सुनकर विमानन जगत के साथ-साथ आम लोग भी सन्न रह गए हैं।
कैप्टन स्मित मच्छार ने उस भयावह दिन को याद करते हुए बताया कि वे नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर थे और विमान पूरी तरह ऑटोपायलट मोड पर क्रूजिंग एल्टीट्यूड पर उड़ रहा था। उसी दौरान उनके साथ मौजूद को-पायलट ने कहा कि वह नमाज पढ़ना चाहता है।
अचानक हमला: कैप्टन ने उसे अनुमति दी और वे अपने सामने लगे इंस्ट्रूमेंट्स व फ्लाइट पाथ की मॉनिटरिंग करने लगे। को-पायलट कॉकपिट की पिछली खाली जगह में गया।
वार से फटा सिर: कैप्टन मच्छार को भनक तक नहीं थी कि आगे क्या होने वाला है। अचानक पीछे से को-पायलट ने एक भारी-भरकम मेटल थर्मस (थर्मल फ्लास्क) से कैप्टन के सिर के पिछले हिस्से पर पूरी ताकत से जानलेवा वार कर दिया।
अंधेरा छाने लगा: अचानक हुए इस अप्रत्याशित और भीषण प्रहार से कैप्टन का सिर फट गया और तेजी से खून बहने लगा। आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा, लेकिन कैप्टन ने अपनी सुध-बुध और हौसला नहीं खोया।
कैप्टन स्मित मच्छार के अनुसार, वह हमला केवल व्यक्तिगत रंजिश या गुस्से का नतीजा नहीं था, बल्कि को-पायलट मानसिक रूप से चरम स्थिति में था और ऐसा लग रहा था कि वह कैप्टन को पूरी तरह अचेत करके विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहता था।
अकेले मुकाबला: खून से लथपथ होने के बावजूद कैप्टन अपनी सीट से उठे और हमलावर को-पायलट से भिड़ गए। तंग कॉकपिट के भीतर दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो गई।
इमरजेंसी अलार्म: कैप्टन ने अपनी पूरी शारीरिक ताकत झोंकते हुए किसी तरह कॉकपिट डोर का इमरजेंसी अलार्म बटन दबाया और इंटरकॉम के जरिए केबिन क्रू को खतरे का सिग्नल दिया।
केबिन क्रू की त्वरित एंट्री: अलार्म बजते ही अलर्ट क्रू मेंबर्स तुरंत कॉकपिट का सुरक्षित कोड दर्ज कर भीतर दाखिल हुए और कैप्टन की मदद करते हुए उन्मादी को-पायलट को दबोचकर काबू में किया।
को-पायलट को केबिन क्रू की मदद से रस्सियों और प्लास्टिक टाई (प्लास्टिक कफ) से बांधकर यात्री केबिन के एक सुरक्षित हिस्से में बैठा दिया गया।
सिर से लगातार बहते खून और तेज दर्द के बीच कैप्टन स्मित मच्छार ने असाधारण पेशेवर धैर्य, साहस और मानसिक संतुलन का परिचय दिया।
उन्होंने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को तुरंत आपातकालीन स्थिति की सूचना दी और नजदीकी सुरक्षित हवाई अड्डे की ओर विमान को मोड़ा।
कैप्टन ने खून से सने चेहरे के साथ अकेले पूरे विमान का संचालन संभाला और सभी यात्रियों की जान सुरक्षित बचाते हुए फ्लाइट की सफल इमरजेंसी लैंडिंग कराई।
रनवे पर लैंडिंग होते ही सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस ने विमान को चारों तरफ से घेर लिया और आरोपी को-पायलट को तुरंत हिरासत में ले लिया।
कैप्टन स्मित मच्छार की इस आपबीती ने दुनिया भर के विमानन सुरक्षा नियामकों, आईसीएओ (ICAO) और एयरलाइंस के सामने पायलटों की मानसिक स्वास्थ्य जांच (Psychological Evaluation) को लेकर दोबारा कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
इससे पहले जर्मनविंग्स फ्लाइट 9525 जैसी दुखद घटनाओं में भी मानसिक रूप से अस्वस्थ को-पायलट द्वारा जानबूझकर विमान क्रैश कराने के मामले सामने आ चुके हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ फिजिकल फिटनेस और सिम्युलेटर टेस्ट ही नहीं, बल्कि पायलटों के तनाव स्तर, कट्टरपंथी झुकाव और मानसिक स्थिरता की नियमित व निष्पक्ष मनोवैज्ञानिक समीक्षा अनिवार्य की जानी चाहिए।
सोशल मीडिया पर कैप्टन स्मित मच्छार के इस अदम्य साहस और सैकड़ों जिंदगियों को चमत्कारिक रूप से बचाने के लिए उनकी जमकर सराहना हो रही है।


















