September 13, 2026 10:30 am

‘छात्राओं के आरोपों को…’ ; दमोह स्कूल हिजाब केस में FIR रद्द करने की मांग MP HC ने ठुकराई, Madhya-pradesh Hindi News

मध्य प्रदेश के दमोह स्थित गंगा जमुना हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाली कुछ छात्राओं ने 2023 में स्कूल के स्टाफ पर उन्हें हिजाब पहनने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया था। इसके बाद सरकार के आदेश पर पुलिस द्वारा इस संबंध में जांच कर एफआईआर दर्ज की गई थी।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दमोह के एक स्कूल के चार पूर्व पदाधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ 3 साल पहले दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है। एफआईआर में इन सभी पर स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं को कथित तौर पर हिजाब पहनने और खास धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया गया है।

छात्राओं के आरोपों का फैसला सबूतों के आधार पर होगा

जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने शुक्रवार को सभी आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्कूल के पूर्व पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार जैन, अब्दुल वसीम बारी, टीचर अनस अथर और चपरासी रुस्तम अली की ओर से दायर की गई एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। जज ने कहा कि छात्राओं को धमकी देकर मजबूर करने के आरोपों को बेबुनियाद नहीं कहा जा सकता। इनका सबूतों के आधार पर फैसला किया जाना चाहिए।

3 साल पुराना है मामला

यह पूरा मामला दमोह जिले के गंगा जमुना हायर सेकेंडरी स्कूल से जुड़ा है, जहां मई 2023 में हिंदू छात्राओं को हिजाब पहने हुए दिखाने वाला एक पोस्टर सामने आने के बाद सरकार ने जांच के आदेश दिए थे।

इन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा

छात्राओं की शिकायत पर जिला कलेक्टर ने एक जांच कमेटी बनाई थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर, आईपीसी की धारा 295-A, 120-B और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके साथ ही जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और मध्य प्रदेश फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट, 2021 के प्रावधानों के तहत भी मामला दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता छात्राओं की ओर आरोप लगाया गया था कि स्कूल में हिजाब पहनना, नमाज पढ़ना और उर्दू भाषा सीखने जैसे काम अनिवार्य कर दिए गए थे, जबकि तिलक लगाने और कलावा पहनने पर रोक थी।

हाईकोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि एफआईआर में खास आरोप लगाए गए थे कि छात्राओं को धमकी देकर और दबाव डालकर उनकी मर्जी के खिलाफ एक खास ड्रेस कोड और धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए मजबूर किया गया था।

कोर्ट ने कहा कि इसलिए याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आरोपों को प्रथम दृष्टया निराधार नहीं कहा जा सकता। इसके साथ ही यह भी कहा कि उनकी सच्चाई का पता सबूतों के आधार पर ही लगाया जाएगा। पुलिस इस मामले में पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

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