
भारतीय राजनीति और कूटनीति के मंच से एक बहुत ही गर्व से भरा और प्रेरणादायक बयान सामने आया है, जिसने देश के बढ़ते हुए अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और मजबूत होते प्रशासनिक ढांचे पर मुहर लगा दी है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान देश को संबोधित करते हुए यह बड़ा बयान दिया है कि आज़ाद भारत का गवर्नेंस और विकास मॉडल पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा बन चुका है। मुख्यमंत्री ने विशेष तौर पर इस बात पर जोर दिया कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका और कूटनीतिक कद में जो अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, वह किसी से छिपी नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए दुनिया की बड़ी महाशक्तियों के बीच अपनी एक अलग और सशक्त पहचान बना ली है। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि ब्रिक्स (BRICS) जैसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय संगठन की अध्यक्षता करना इस बात का सीधा और स्पष्ट प्रमाण है कि आज दुनिया भारत की लीडरशिप क्वालिटी और उसकी निर्णय लेने की क्षमता पर कितना भरोसा करती है। इस प्रकार के बयानों से न केवल देशवासियों के भीतर राष्ट्रवाद और गर्व की भावना मजबूत होती है, बल्कि यह भी पता चलता है कि कैसे एक मजबूत और स्थिर राजनीतिक इच्छाशक्ति वाले देश में हर एक नागरिक का भविष्य सुरक्षित और प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। मुख्यमंत्री के इस संबोधन के बाद से राजनीतिक और वैचारिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि कैसे भारत अब वैश्विक नीतियों को तय करने में एक अगुआ की भूमिका निभा रहा है।
वैश्विक पटल पर भारत के बढ़ते कदम और कूटनीतिक सफलताएं
पिछले कुछ दशकों के दौरान अगर दुनिया के नक्शे पर भारत की स्थिति का आकलन किया जाए, तो यह साफ तौर पर दिखाई देता है कि देश ने कूटनीति, अर्थव्यवस्था और विज्ञान के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है। कभी विकासशील देशों की श्रेणी में गिने जाने वाले भारत ने आज अपनी आत्मनिर्भरता, डिजिटल क्रांति और मजबूत विनिर्माण क्षेत्रों के दम पर विकसित देशों को भी पीछे छोड़ना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसी बात को रेखांकित करते हुए कहा कि दुनिया के तमाम देश आज भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं क्योंकि हमारे यहां की नीतियां और योजनाएं सीधे तौर पर आम जनमानस के कल्याण को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। चाहे कोरोना महामारी के दौरान दुनिया भर के देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने की बात हो या फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक मंदी जैसे गंभीर मुद्दों पर मजबूत पक्ष रखने की, भारत ने हमेशा एक विश्वगुरु की भूमिका निभाई है। जब कोई देश अपने आंतरिक प्रबंधन को मजबूत करते हुए बाहरी दुनिया में शांति और विकास का संदेश देता है, तो उसकी प्रतिष्ठा स्वतः ही आसमान छूने लगती है। भारत की इसी बढ़ती हुई कूटनीतिक ताकत का परिणाम है कि आज दुनिया का हर बड़ा मंच भारत की सहभागिता के बिना अधूरा माना जाता है, और यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब भारतीय मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहा है।
ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता और भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता का लोहा
ब्रिक्स जैसे बड़े और प्रभावशाली संगठन, जिसमें दुनिया की उभरती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, की अध्यक्षता करना किसी भी राष्ट्र के लिए एक बहुत बड़ा सम्मान और कूटनीतिक उपलब्धि माना जाता है। भारत ने जब-जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे बड़े संगठनों की कमान संभाली है, तब-तब उसने यह साबित कर दिया है कि वह केवल अपने देश के हितों की रक्षा करना नहीं जानता, बल्कि पूरी दुनिया को एक साथ लेकर चलने की कुब्बत रखता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ब्रिक्स की इस अध्यक्षता को भारत की उस नेतृत्व क्षमता का जीवंत प्रतीक बताया जो वसुधैव कुटुंबकम की प्राचीन भारतीय संस्कृति और परंपरा पर आधारित है। आज के इस बहुध्रुवीय विश्व में जहां महाशक्तियों के बीच वर्चस्व की जंग चल रही है, भारत ने हमेशा गुटनिरपेक्ष और शांतिप्रिय देश के रूप में अपनी छवि को बरकरार रखते हुए निष्पक्ष फैसले लिए हैं। ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार, तकनीकी सहयोग, कृषि, स्वास्थ्य और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत ने जिस प्रकार का नेतृत्व प्रदान किया है, उससे सभी सदस्य देशों के बीच एक नया विश्वास पैदा हुआ है। यह इस बात का सबूत है कि बीसवीं सदी के उत्तरार्ध का भारत अब एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास से लैस होकर इक्कीसवीं सदी की वैश्विक व्यवस्था का मार्गदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
देश के भीतर समावेशी विकास और जनता के कल्याण का भारतीय मॉडल
अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के साथ-साथ जब हम देश के भीतर चल रही विकास योजनाओं और नीतियों पर नजर डालते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि ‘भारत का मॉडल’ क्यों दुनिया के लिए इतना खास और अनुकरणीय बनता जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता हमेशा से देश के अंतिम छोर पर बैठे उस गरीब व्यक्ति तक हर मूलभूत सुविधा पहुंचाना रही है, जो दशकों तक विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ था। डिजिटल इंडिया, जनधन योजना, मुफ्त राशन वितरण, पक्के आवास, स्वच्छ भारत अभियान और स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाओं ने देश के करोड़ों नागरिकों के जीवन स्तर को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य का उदाहरण देते हुए यह भी बताया कि कैसे राज्य सरकारें केंद्र के साथ कदम से कदम मिलाकर गरीब कल्याण और आदिवासी उत्थान के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर धरातल पर उतार रही हैं। जब किसी देश का विकास केवल कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों तक सीमित न रहकर गांव, गरीब, किसान, महिला और युवाओं तक समान रूप से पहुंचता है, तो उसे एक सच्चा और टिकाऊ विकास मॉडल कहा जाता है। दुनिया के कई देश आज इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि इतनी बड़ी आबादी वाले देश में कैसे पारदर्शी तरीके से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाया जा रहा है। भारत का यह समावेशी और कल्याणकारी मॉडल अब ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक ऐसा मार्गदर्शक बन गया है जिसे वे अपने यहां भी लागू करने की इच्छा रखते हैं।
भविष्य का भारत और वैश्विक मंच पर नेतृत्व की नई इबारत
आज जब भारत आजादी के अमृत काल से आगे बढ़ते हुए भविष्य के लक्ष्यों को साध रहा है, तो देश के प्रत्येक नागरिक के मन में यह विश्वास पैदा हो चुका है कि आने वाला समय भारत का ही है। तकनीकी नवाचार, अंतरिक्ष विज्ञान में चंद्रयान और गगनयान जैसी सफलताओं, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और युवाओं की ऊर्जा ने देश को दुनिया के सबसे गतिशील राष्ट्रों की श्रेणी में ला खड़ा किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह बयान केवल एक राजनीतिक भाषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस जमीनी सच्चाई का आईना है जिसे आज पूरी दुनिया महसूस कर रही है। जब देश का नेतृत्व मजबूत, दूरदर्शी और जनता के प्रति समर्पित होता है, तो राष्ट्र निर्माण की राह में आने वाली हर बाधा स्वतः ही समाप्त हो जाती है। ब्रिक्स की अध्यक्षता से लेकर वैश्विक मंचों पर गूंजने वाली भारत की हर एक आवाज इस बात का ऐलान करती है कि अब भारत किसी का अनुकरण करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वह खुद दुनिया को नई राह दिखाने वाला एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बन चुका है। आने वाले वर्षों में भारत की यह वैश्विक भूमिका और अधिक मजबूत होगी, जिससे न केवल हमारे देश का मान-सम्मान बढ़ेगा, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा।









