
युद्धग्रस्त पश्चिम एशियाई देश यमन में शांति की कोशिशों को एक बार फिर गहरा झटका लगा है। दक्षिण-पश्चिमी यमन के अशांत ताइज (Taiz) प्रांत में एक भीड़भाड़ वाले स्थानीय बाजार पर हुए भीषण हवाई हमले में कम से कम 7 आम नागरिकों की मौत हो गई, जबकि 40 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। हूती संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक हताहत होने वालों में मासूम बच्चे और दुकानदार भी शामिल हैं। रविवार को हुआ यह हमला ताइजिया जिले के माविया जंक्शन (Mawiyah Junction) के पास स्थित बाजार में हुआ, जहां सुबह के समय लोग रोजमर्रा की खरीदारी के लिए जमा थे। चश्मदीदों के अनुसार, अचानक हुए जोरदार धमाकों से पूरा बाजार दहल उठा, कई व्यावसायिक दुकानें पलक झपकते ही मलबे के ढेर में तब्दील हो गईं और आसपास खड़ी गाड़ियां व मोटरसाइकिलें आग की लपटों में घिर गईं।
हमले के तुरंत बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और चारों तरफ चीख-पुकार सुनाई देने लगी। स्थानीय बचाव कर्मियों और नागरिकों ने मलबे में दबे घायलों को बाहर निकाला और नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया। कई घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई गई है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय ने इस हमले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि नागरिक ठिकानों और बाजारों पर किए जाने वाले हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का खुला उल्लंघन हैं।
इस घातक हमले के बाद दोनों पक्षों की ओर से परस्पर विरोधी बयान सामने आ रहे हैं। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी और उनके मीडिया संगठनों ने आरोप लगाया है कि यह कायराना हमला सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और यमन के सरकारी बलों द्वारा जानबूझकर आम नागरिकों व बाजार की दुकानों को निशाना बनाकर किया गया है। हूतियों ने इसे युद्ध अपराध करार देते हुए चेतावनी दी है कि इस रक्तपात का कड़ा और गंभीर जवाब दिया जाएगा।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन की सरकार और सैन्य सूत्रों ने हूतियों के आरोपों को खारिज करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। सरकारी सैन्य अधिकारियों का दावा है कि उनकी सेना ने बाजार के बिल्कुल समीप माविया जंक्शन पर हाल ही में स्थापित किए गए हूती विद्रोहियों के एक गुप्त सैन्य कैंप और हथियारों से लैस वाहनों को सटीक निशाना बनाया था। सरकार का आरोप है कि हूती विद्रोही जानबूझकर नागरिक बस्तियों, बाजारों और रिहायशी ढांचों के पास अपने सैन्य ठिकाने बनाते हैं ताकि किसी भी सैन्य कार्रवाई के दौरान आम जनता को ढाल (Human Shield) के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। दोनों पक्षों के दावों के बीच स्वतंत्र स्रोतों से असल नुकसान की पुष्टि होना अभी बाकी है।
यमन में साल 2014 से भीषण गृहयुद्ध चल रहा है, जब हूती लड़ाकों ने राजधानी सना पर कब्जा कर निर्वाचित सरकार को बेदखल कर दिया था। इसके बाद यमन सरकार की बहाली के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व में अरब गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप शुरू किया। हालांकि साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से एक अनौपचारिक संघर्ष विराम (सीजफायर) हुआ था, जिससे नागरिकों को कुछ समय के लिए राहत मिली थी। लेकिन हाल के महीनों में यह संघर्ष विराम पूरी तरह चरमरा गया है और मिसाइल, ड्रोन व हवाई हमलों का सिलसिला एक बार फिर तेज हो चुका है।
संयुक्त राष्ट्र के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, बीते दो महीनों के भीतर फिर से भड़की इस जंग में 700 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 80 हजार से अधिक नागरिक अपने घरों से विस्थापित होकर अस्थायी तंबुओं में रहने को मजबूर हुए हैं। यमन की भौगोलिक स्थिति रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है क्योंकि यह बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) और लाल सागर के व्यापारिक गलियारे के मुहाने पर स्थित है। हाल ही में हूतियों ने पश्चिमी तटवर्ती इलाकों और अहम द्वीपों पर अपनी पकड़ मजबूत करने का दावा किया है, जिससे यूरोप और एशिया के बीच होने वाले समुद्री व्यापार पर भी युद्ध के काले बादल मंडराने लगे हैं।
ताइज के बाजार पर हुए इस हमले ने क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हूती विद्रोही लगातार सीमा पार सऊदी अरब के रियाद, खमिस मुशैत और अन्य ठिकानों पर ड्रोन व बैलिस्टिक मिसाइलें दाग रहे हैं, जिन्हें सऊदी एयर डिफेंस द्वारा इंटरसेप्ट किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यमन में हूतियों और सरकारी गठबंधन के बीच टकराव इसी तरह अनियंत्रित रहा, तो इसका असर सीधे तौर पर पहले से सुलग रहे पूरे पश्चिम एशिया (Middle East) के शक्ति संतुलन पर पड़ेगा।
विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि सैन्य अभियानों में जब तक आम नागरिकों और सार्वजनिक बाजारों को सुरक्षा प्रदान नहीं की जाएगी, तब तक मानवीय संकट भयावह होता जाएगा। युद्ध में घिरे आम यमनी नागरिक बुनियादी भोजन, स्वच्छ पानी और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में पहले से ही भुखमरी के कगार पर हैं। विश्व नेताओं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पर अब यह दबाव बढ़ रहा है कि वे दोनों पक्षों को तुरंत युद्ध विराम की मेज पर लाएं, ताकि निर्दोष बच्चों और नागरिकों की जान बचाई जा सके।

















