April 28, 2026 7:15 am

12 साल बिना काम के खाते में आते रहे वेतन के 28 लाख! MP पुलिस में चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा उजागर

MP News :
आरक्षक ने न प्रशिक्षण लिया, न ड्यूटी की… फिर भी खाते में जमा होता रहा वेतन, अब जांच में जुटी पुलिस

भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में एक अजीबोगरीब फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने सिस्टम की लापरवाही की पोल खोल दी है। विदिशा निवासी एक आरक्षक को पिछले 12 वर्षों से बिना एक दिन ड्यूटी किए हर महीने नियमित वेतन मिलता रहा। कुल मिलाकर करीब 28 लाख रुपये से ज्यादा की राशि उसके खाते में जमा हो गई, और किसी को भनक तक नहीं लगी

वर्ष 2011 में उक्त आरक्षक की भोपाल में भर्ती हुई थी। उसे प्रशिक्षण के लिए सागर स्थित पुलिस प्रशिक्षण केंद्र भेजा गया था, लेकिन वह वहां न जाकर सीधे अपने घर विदिशा चला गया। हैरानी की बात यह रही कि सागर केंद्र से अनुपस्थिति की सूचना भी भोपाल पुलिस लाइन को नहीं दी गई और न ही भोपाल ने फॉलोअप किया।

ड्यूटी पर कभी नहीं आया, फिर भी रिकॉर्ड में ‘पदस्थ’ बना रहा:
जब सारा बैच 6 माह का प्रशिक्षण पूरा कर लौटा, तब भी किसी अधिकारी ने गैरहाजिर आरक्षक की तलाश नहीं की। पुलिस लाइन के रिकॉर्ड में वह नियुक्त और सक्रिय बना रहा, और खाते में हर महीने वेतन जाता रहा।

2023 में खुली पोल, आरक्षक ने थमाया मानसिक बीमारी का सर्टिफिकेट:
साल 2023 में जब उस बैच को पदोन्नति और समयमान वेतनमान के लिए बुलाया गया, तब अधिकारियों को उसके गायब रहने का एहसास हुआ। बुलावे पर वह उपस्थित हुआ और मनोचिकित्सा इलाज के दस्तावेज पेश कर दिए। उसने दावा किया कि वह मानसिक रूप से बीमार था और इलाज चल रहा था।

पहले सस्पेंड, फिर बहाली भी हुई:
जब मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा, तो उसे पहले सस्पेंड किया गया, लेकिन बाद में उसे भोपाल की नेहरू नगर पुलिस लाइन में पदस्थ कर बहाल कर दिया गया। इस समय वह वहीं ड्यूटी कर रहा है। मामले की जांच एसीपी अंकिता खातरकर की अगुवाई में एक समिति कर रही है, जो पिछले 10 महीनों से इस घोटाले की परतें खोल रही है।

जवाबदेही तय करने की तैयारी:

डीसीपी मुख्यालय श्रद्धा तिवारी के अनुसार,

“जांच अंतिम चरण में है। सिर्फ आरक्षक ही नहीं, बल्कि वे तमाम अधिकारी और कर्मचारी भी चिन्हित किए जा रहे हैं, जिनकी लापरवाही से यह घोर प्रशासनिक चूक हुई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

सवालों के घेरे में पुलिस प्रशासन:

  • बिना हाजिरी और कार्य प्रदर्शन के लगातार 12 साल तक वेतन कैसे जारी होता रहा?
  • जिम्मेदार आरआई, टीआई और लेखा विभाग ने इतनी बड़ी चूक को नजरअंदाज कैसे किया?
  • अगर वह मानसिक रूप से अस्वस्थ था, तो बिना मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया के वेतन कैसे जारी हुआ?

यह मामला मध्य प्रदेश पुलिस के प्रशासनिक ढांचे की गंभीर खामियों और सुधार की सख्त जरूरत को उजागर करता है।

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