
केंद्र सरकार द्वारा 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के गठन की सुगबुगाहट तेज होते ही विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अपने-अपने संवर्ग के वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए मोर्चा खोल दिया है। इसी क्रम में देश भर के केंद्र सरकार के अस्पतालों, एम्स (AIIMS), रेलवे हॉस्पिटल्स और ईएसआईसी (ESIC) में सेवाएं दे रहीं नर्सिंग अधिकारियों ने सरकार के समक्ष अपनी 10 सूत्रीय प्रमुख मांगों का विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन (AIGNF) ने सरकार से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कोविड-19 महामारी से लेकर हर आपात स्थिति में फ्रंटलाइन पर जान जोखिम में डालकर काम करने वाले नर्सिंग कैडर के साथ पिछले वेतन आयोगों में जो अनदेखी हुई है, उसे 8वें वेतन आयोग में पूरी तरह दुरुस्त किया जाना चाहिए।
नर्सिंग फेडरेशन के प्रस्ताव में सबसे प्रमुख मांग एंट्री लेवल वेतन यानी नर्सिंग ऑफिसर के शुरुआती ग्रेड पे को लेकर है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत नर्सिंग ऑफिसर्स को लेवल-7 (4600 ग्रेड पे) में रखा गया है।
नर्सेज एसोसिएशन का कहना है कि उनकी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता बीएससी नर्सिंग (4 वर्ष) या जीएनएम के साथ अनुभव है, जो किसी भी तकनीकी और राजपत्रित (गजेटेड) अधिकारी के समकक्ष है। इसलिए नर्सिंग ऑफिसर के शुरुआती पद को सीधे लेवल-8 (4800 ग्रेड पे) या लेवल-9 (5400 ग्रेड पे) में अपग्रेड किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, कई दशकों से अटके पड़े सीनियर नर्सिंग ऑफिसर और चीफ नर्सिंग ऑफिसर के पदों के पे-स्केल को भी समयबद्ध तरीके से पुनर्गठित करने की पुरजोर मांग की गई है।
अस्पतालों में 24×7 चलने वाली इमरजेंसी सेवाओं के दौरान नर्सों को रात के समय बिना रुके काम करना पड़ता है। फेडरेशन ने सरकार के सामने तर्क रखा है कि लगातार नाइट शिफ्ट करने से नर्सिंग स्टाफ के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
वर्तमान में मिलने वाला रात्रि ड्यूटी भत्ता नाममात्र का है, जो वास्तविक चुनौतियों से मेल नहीं खाता। संगठन ने मांग की है कि:
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रात्रि पाली (Night Shift) के लिए केंद्रीय कर्मचारियों के समान एक ठोस और व्यावहारिक नाइट ड्यूटी अलाउंस (NDA) तय किया जाए।
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इसे बेसिक पे के प्रतिशत के आधार पर जोड़ा जाए, ताकि वरिष्ठता के साथ भत्ते में भी न्यायसंगत वृद्धि हो सके।
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कठिन परिस्थितियों और आईसीयू, बर्न वार्ड व संक्रामक रोगों के वार्डों में काम करने वाले नर्सिंग कर्मियों को विशेष रिस्क और हार्डशिप अलाउंस भी प्रदान किया जाए।
कोरोना काल के अनुभवों को रेखांकित करते हुए नर्सेज फेडरेशन ने कार्यस्थल पर सुरक्षा और व्यापक स्वास्थ्य बीमा की मांग को प्राथमिकताओं में शामिल किया है। अक्सर गंभीर संक्रमण, सुई चुभने (Needle Stick Injury) और जानलेवा वायरस के सीधे संपर्क में रहने के बावजूद नर्सिंग स्टाफ के पास कोई समर्पित सुरक्षा कवर नहीं होता।
संगठन ने सरकार से मांग की है कि प्रत्येक कार्यरत नर्सिंग कर्मचारी के लिए कम से कम 50 लाख रुपये का कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस और लाइफ कवर अनिवार्य रूप से सरकारी खर्चे पर लागू किया जाए। इसके साथ ही अस्पतालों में ड्यूटी के दौरान होने वाली हिंसक घटनाओं और दुर्व्यवहार से निपटने के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण, सुरक्षा गार्डों की पर्याप्त तैनाती और सख्त कानूनी सुरक्षा तंत्र लागू करने की मांग दोहराई गई है।
नर्सिंग संवर्ग में लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी पीड़ा करियर में प्रमोशन का अभाव (Career Stagnation) है। कई राज्यों और केंद्रीय अस्पतालों में नर्सिंग ऑफिसर एक ही पद पर 15 से 20 साल तक बिना किसी पदोन्नति के काम करने को मजबूर रहते हैं।
इस विसंगति को दूर करने के लिए नर्सेज फेडरेशन ने 8वें वेतन आयोग से मांग की है कि:
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मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) के मौजूदा 10, 20 और 30 साल के अंतराल को घटाकर 8, 16 और 24 वर्ष किया जाए।
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यदि विभाग में पद खाली न हों, तब भी समय पूरा होने पर वित्तीय लाभ के साथ-साथ अगला पदनाम (Functional Designation) स्वतः प्रदान किया जाए।
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नर्सिंग प्रशासन के शीर्ष पदों जैसे एडिशनल डायरेक्टर ऑफ नर्सिंग और नर्सिंग एडवाइजर के कैडर को स्वास्थ्य मंत्रालय के स्तर पर मजबूत किया जाए, ताकि नर्सिंग वर्ग से जुड़े नीतिगत फैसले समय पर लिए जा सकें।
वर्तमान में मिलने वाला नर्सिंग अलाउंस (Nursing Allowance) और यूनिफॉर्म अलाउंस फिक्स्ड राशि के रूप में दिया जाता है, जिससे महंगाई बढ़ने पर उसकी वास्तविक क्रय शक्ति घट जाती है। फेडरेशन ने मांग की है कि जब भी महंगाई भत्ता (DA) 50 प्रतिशत के पार जाए, तो नर्सिंग अलाउंस और ड्रेस मेंटेनेंस भत्ते में भी आनुपातिक रूप से स्वतः 25 प्रतिशत की वृद्धि की जानी चाहिए।
अस्पतालों में नर्स-मरीज के असंतुलित अनुपात (Nurse-to-Patient Ratio) का मुद्दा उठाते हुए संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि भारी वर्कलोड के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इसलिए नए वेतन आयोग की सिफारिशों के साथ-साथ खाली पड़े हजारों स्थायी पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए। केंद्र सरकार द्वारा गठित होने वाले 8वें वेतन आयोग के समक्ष यह मांग पत्र आने वाले समय में नर्सिंग कर्मचारियों के वेतन और सेवा शर्तों को तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।









