April 27, 2026 11:07 am

CG: आत्मसमर्पण से पुनर्वास तक-पवन कुमार ने हिंसा का रास्ता छोड़ जीवन की नई शुरुआत की

CG: आत्मसमर्पण से पुनर्वास तक-पवन कुमार ने हिंसा का रास्ता छोड़ जीवन की नई शुरुआत की

विशेष आवास परियोजना से मिला पक्का आशियाना

रायपुर, 06 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ में सुशासन सरकार की सरकार ने माओवादी आत्मसमर्पण, पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025 हिंसा छोड़ मुख्यधारा से जुड़ने वाले नक्सलियों को नई जिंदगी दे रही है। छत्तीसगढ सरकार ने माओवादी  आत्मसमर्पितों को 5 लाख तक की सहायता, कौशल प्रशिक्षण, और सम्मानजनक जीवन प्रदान कर नक्सल-मुक्त बस्तर के सपने को साकार कर रही है। कोण्डागांव जिले के फरसगांव के सुदेर पंचायत चिंगनार के श्री पवन कुमार को पुनर्वास नीति के तहत पक्का आवास मिलने से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।

कोण्डागांव जिले के विकासखण्ड फरसगांव के दूरस्थ ग्राम पंचायत चिंगनार, जो मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, कभी इस क्षेत्र में माओवाद के प्रभाव के कारण भय और असुरक्षा का माहौल था। अब इन क्षेत्रों में राज्य शासन की पुनर्वास नीति के तहत शांति और विकास स्थापित हो रहा हैं। इसी गांव में रहने वाले श्री पवन कुमार को पुनर्वास नीति के तहत पक्का आवास मिलने से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। पवन कुमार पूर्व में माओवादी संगठन से जुड़े हुए थे। उस दौर में उनका जीवन असुरक्षित और कठिनाइयों से भरा हुआ था। उनका परिवार जंगल किनारे एक झोपड़ी और जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर था, जहां न तो पर्याप्त सुविधाएं थीं और न ही सुरक्षित भविष्य की कोई उम्मीद।

समय के साथ उन्होंने यह महसूस किया कि हिंसा का मार्ग केवल विनाश की ओर ले जाता है। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर उन्होंने साहसिक निर्णय लेते हुए माओवादी संगठन से नाता तोड़ लिया और समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।

आत्मसमर्पण के बाद जिला प्रशासन द्वारा विशेष परियोजना आवास (आत्मसमर्पित परिवार) प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में उन्हें आवास स्वीकृत किया गया। शासन की सहायता से उन्हें चरणबद्ध तरीके से आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया, जिसमें प्रथम किश्त के रूप में 40 हजार रुपये, द्वितीय किश्त में 55 हजार रुपये तथा अंतिम किश्त के रूप में 25 हजार रुपये की राशि दी गई। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत 90 दिनों की मजदूरी भी प्रदान की गई। इन सभी सहायता राशि और योजनाओं के समुचित उपयोग से पवन कुमार ने निर्धारित समय में अपना पक्का घर पूर्ण कर लिया। यह घर केवल एक आशियाना नहीं, बल्कि उनके नए जीवन की मजबूत नींव है। अब उनका परिवार सुरक्षित वातावरण में रह रहा है और भविष्य को लेकर आश्वस्त है।

इसके अतिरिक्त शासन द्वारा उनके घर में बिजली कनेक्शन, रसोई गैस, शौचालय और नल-जल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। इन सुविधाओं ने उनके जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है और उन्हें एक सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया है। आज पवन कुमार अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण, सुरक्षित और खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं। और बेहतर भविष्य के लिए भी नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन की इस पहल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री का धन्यवाद ज्ञापित किया है।

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