
सुमन कल्याणपुर का निधन रविवार रात करीब 8 बजे हुआ।
भारतीय सिनेमा की मशहूर गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम 89 साल की उम्र में मुंबई स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी मौत का कारण उम्र संबंधी जटिलताएं थीं।

उनकी करीबी दोस्त मंगला खादिकर ने बताया कि सुमन ने रात करीब 8 बजे आखिरी सांस ली। वह पिछले कुछ दिनों से अपने ही गाने सुन रही थीं और बहुत शांति से उनका निधन हो गया।
उनका अंतिम संस्कार सोमवार सुबह 11:30 बजे से 12 बजे के बीच पवन हंस श्मशान घाट पर किया जाएगा। उनके परिवार में उनकी बेटी चारू हैं। उन्हें 2023 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
1960 और 1970 के दशक में बनाई खास पहचान

सुमन कल्याणपुर ने 1960 और 1970 के दशक में अपनी सुरीली आवाज से संगीत जगत में खास पहचान बनाई। उस दौर में लता मंगेशकर जैसी महान गायिका की मौजूदगी में भी उन्होंने अपनी अलग जगह बनाई।
उनके गाए गाने 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे', 'ना ना करते प्यार तुम्ही से' और 'तुमने पुकारा और हम चले आए' जैसे गाने आज भी लोकप्रिय हैं। उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, असमिया, कन्नड़, बंगाली और उड़िया समेत कई भाषाओं में गाने गाए।
हालाँकि लोग अक्सर उनकी आवाज़ की तुलना लता मंगेशकर से करते थे, लेकिन सुमन कल्याणपुर ने हमेशा इस तुलना को ख़ारिज कर दिया। 2022 के एक इंटरव्यू में उन्होंने लता मंगेशकर को अपना बेहद करीबी दोस्त बताया था और कहा था कि उनसे मिलना हमेशा एक गर्लफ्रेंड से मिलने जैसा लगता है।
आवाज लता मंगेशकर से मिलती-जुलती है

सुमन कल्याणपुर की आवाज लता मंगेशकर से मिलती थी। दोनों की गायन शैली, सुरों की शुद्धता और आवाज की बनावट एक समान मानी जाती थी। कई बार लता मंगेशकर के सहायक और करीबी परिचित भी उनकी और सुमन कल्याणपुर की आवाज़ के बीच भ्रमित हो जाते थे।

अपनी इसी खूबी के कारण 1960 के दशक में जब लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच विवाद हुआ तो सुमन कल्याणपुर फिल्म इंडस्ट्री की पहली पसंद बन गईं और उन्होंने रफी साहब के साथ एक के बाद एक ब्लॉकबस्टर गाने गाए।
अमीन सयानी को 45 साल तक इंतजार कराया
मशहूर रेडियो उद्घोषक अमीन सयानी 45 साल तक सुमन से इंटरव्यू के लिए समय मांगते रहे. लेकिन सुमन हर बार बात टाल देती. आख़िरकार 45 साल बाद 2005 में अमीन सयानी का इंतज़ार ख़त्म हुआ, जब सुमन कल्याणपुर एक घंटे के इंटरव्यू के लिए तैयार हुईं.

हालाँकि, उन्होंने केवल इस शर्त पर साक्षात्कार की अनुमति दी कि कोई भी उनकी तस्वीर नहीं लेगा और यदि कोई प्रश्न उन्हें असहज करता है, तो वह उसका उत्तर नहीं देंगी।
पड़ोसी ने पिता से संगीत सिखाने को कहा

सुमन को बचपन से ही चित्रकला और संगीत की ओर रुझान था। इसके चलते स्कूल के बाद उन्होंने आर्ट्स में ग्रेजुएशन भी किया। वह चित्रकार बनना चाहती थीं लेकिन सुमन की आवाज़ को उनके पड़ोसी और उनके पिता के मित्र पंडित केशव राव भोले ने पहचान लिया। उन्होंने सुमन के पिता को सुमन को संगीत सिखाने का सुझाव दिया।
शुरुआत में सुमन सिर्फ शौक के तौर पर संगीत सीख रही थीं, लेकिन समय के साथ उनकी रुचि इसमें बढ़ने लगी। उन्होंने और अधिक गंभीरता से संगीत सीखना शुरू कर दिया। आने वाले वर्षों में सुमन ने उस्ताद खान, अब्दुल रहमान खान और गुरुजी मास्टर नवरंग जैसे दिग्गजों से संगीत की बारीकियां भी सीखीं।








