मनीष सोनी | राजगढ़23 मिनट पहले

राजगढ़ के ट्रेंचिंग ग्राउंड में इस तरह पड़े हैं गाय के शव
राजगढ़ जिले के खिलचीपुर से गौ रक्षा के दावों की धज्जियां उड़ाती एक खौफनाक तस्वीर सामने आई है. खिलचीपुर नगर परिषद क्षेत्र के सोमवारिया स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में चारों तरफ गायों के शव और कंकाल बिखरे पड़े हैं.
हालात इतने खराब हैं कि आवारा कुत्ते दिन-रात इन शवों को नोंच रहे हैं। भास्कर टीम ने जब मौके का मुआयना किया तो वहां क्रूरता और लापरवाही का नजारा देखने को मिला।
देखिए भयावह तस्वीरें

जमीन पर पड़े-पड़े गायों के शव कंकाल में तब्दील हो गए

जमीन पर इतनी दुर्गंध है कि वहां खड़ा होना भी मुश्किल है
जहाँ तक नज़र जा रही थी, केवल हड्डियाँ और खोपड़ियाँ ही दिखाई दे रही थीं
मैदान के सुनसान हिस्से में भास्कर टीम ने खुले आसमान के नीचे पड़े 70 से ज्यादा गाय के शव और कंकालों की गिनती की। नगर परिषद के कर्मचारी मृत गायों को वैज्ञानिक तरीके से दफनाने के बजाय उन्हें एक के ऊपर एक गड्ढे में फेंककर चले जाते हैं। पूरे इलाके में सड़ते मांस की इतनी भयानक दुर्गंध है कि वहां कुछ मिनट भी खड़ा रहना मुश्किल है।
एक तरफ लाशें; दूसरी ओर, जीवित गायें भूख से पीड़ित हैं
ट्रेंचिंग ग्राउंड के बारे में सबसे चिंताजनक और परेशान करने वाली बात यह थी कि जहां एक तरफ दर्जनों गायों के शव सड़ रहे थे, वहीं दूसरी तरफ जीवित गायें उसी जहरीले कचरे के ढेर में भोजन की तलाश कर रही थीं। भूख से बेहाल ये गायें कचरे में लिपटी खतरनाक पॉलिथीन (प्लास्टिक शीट) चबाने को मजबूर थीं।

जहां गायों के शव पड़े थे, वहीं जीवित मवेशियों को भोजन की तलाश करते देखा गया
स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और कहा कि उन्हें इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा
स्थानीय लोगों ने झिझकते हुए और दबी जुबान में बताया कि शहर की आवारा और बेसहारा गायें अपनी भूख मिटाने के लिए प्लास्टिक और कचरा खाती हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है.
खिलचीपुर के पूर्व पार्षद राकेश जायसवाल के मुताबिक गाय के नाम पर सरकारें बनीं, लेकिन यहां तो बदहाली ही बदहाली है। शहर के ट्रेंचिंग ग्राउंड में खुलेआम गायों के शव डाले जा रहे हैं.
प्रशासन को कई बार चेताया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. पर्याप्त भोजन और चारे की कमी के कारण गायें प्लास्टिक खाती हैं और तड़प-तड़प कर मर जाती हैं। जिम्मेदार लोग सिर्फ अपना हित साध रहे हैं।
कैमरे में सामने आया, मृत गायें गौशाला की थीं
जब भास्कर टीम मैदान पर इस दृश्य को कैमरे में कैद कर रही थी, तभी नगर परिषद की एक गाड़ी वहां पहुंची। वाहन में 4 मृत गायें भरी हुई थीं। कर्मचारियों ने बिना किसी सुरक्षा या वैज्ञानिक नियम के उन्हें एक खुले गड्ढे में फेंक दिया और वहां से जाने लगे। पूछने पर उन्होंने स्वीकार किया कि ये मृत गायें सरकारी गौशाला की थीं.

नगर परिषद के कर्मचारी इसी तरह शव का निस्तारण कर चले जाते हैं

कुत्तों ने गाय के शव को इस तरह से नोंच डाला कि उसका आधा कंकाल दिखाई देने लगा
यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है
- यदि गायें गौशाला में थीं तो उन्हें पर्याप्त चारा-पानी क्यों नहीं मिल रहा था?
- क्या बीमार पड़ने पर मवेशियों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता?
- मृत गायों के शवों को सम्मानपूर्वक दफनाने की व्यवस्था क्यों नहीं है?
नगर परिषद व स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई जवाब नहीं मिला
इस लापरवाही और खुले में शव फेंके जाने के सवाल पर नगर परिषद और स्थानीय प्रशासन से कोई सीधा जवाब नहीं मिल सका.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा
उप निदेशक (पशुपालन विभाग) डॉ. डीआर अहिरवार ने कहा- जांच के लिए डॉक्टरों की टीम मौके पर भेजी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही गायों की मौत का असली कारण स्पष्ट हो सकेगा।
स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह लापरवाही पूरे क्षेत्र में महामारी का कारण भी बन सकती है।









