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केरल HC ने वायरल लड़की को सुरक्षा प्रदान की; न्यायालय की अनुमति अनिवार्य

दिल्ली/भोपाल8 मिनट पहले

केरल उच्च न्यायालय ने अंतरधार्मिक विवाह से जुड़े व्यापक रूप से चर्चित “वायरल गर्ल” मामले के केंद्र में महिला को सुरक्षा प्रदान करते हुए सोमवार को एक अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने निर्देश दिया कि उसकी अनुमति के बिना उसे किसी भी व्यक्ति को नहीं सौंपा जा सकता।

अदालत ने यह भी फैसला सुनाया कि उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं ले जाया जा सकता। महिला को पहले से मिल रही पुलिस सुरक्षा फिलहाल जारी रहेगी।

कोर्ट ने एनसीएसटी के आदेश पर हैरानी जताई

सुनवाई के दौरान अदालत ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) द्वारा जारी एक आदेश के अंग्रेजी अनुवाद की जांच की। आदेश में पुलिस को निर्देश दिया गया था कि वह महिला को कानून के अनुसार मध्य प्रदेश पुलिस को सौंप दे और उच्च न्यायालय के समक्ष संशोधित जन्मतिथि से संबंधित दस्तावेज पेश करे।

न्यायमूर्ति थॉमस ने सवाल किया कि जब उच्च न्यायालय पहले से ही मामले की सुनवाई कर रहा था तो आयोग ऐसा आदेश कैसे जारी कर सकता है। अदालत ने उसके समक्ष मामला लंबित रहने के दौरान ऐसे निर्देश जारी करने के एनसीएसटी के अधिकार पर भी सवाल उठाए।

सीधे हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को पत्र लिखने पर अधिकारी को फटकार

कोर्ट ने एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस स्टेशन के SHO द्वारा सीधे हाई कोर्ट रजिस्ट्रार को पत्र लिखने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की.

जस्टिस थॉमस ने कहा कि ऐसे मामलों की जानकारी सरकारी वकील के माध्यम से अदालत के सामने रखी जानी चाहिए थी। अदालत ने सवाल उठाया कि एक पुलिस अधिकारी सरकारी वकील और महाधिवक्ता को दरकिनार कर सीधे रजिस्ट्रार को कैसे लिख सकता है।

अदालत ने सरकारी पक्ष को संबंधित अधिकारी को उचित प्रक्रिया के बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया.

जन्म तिथि का विवाद पहले से ही मप्र उच्च न्यायालय में लंबित है

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि शादी के समय महिला की उम्र 18 वर्ष से अधिक थी और इस तथ्य को मध्य प्रदेश की एक अदालत द्वारा पहले ही सत्यापित किया जा चुका है।

यह भी प्रस्तुत किया गया कि उसका मूल जन्म प्रमाण पत्र बाद में उसकी जानकारी के बिना रद्द कर दिया गया था।

उनकी जन्मतिथि के विवाद से संबंधित एक याचिका पहले से ही मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबित है। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा जारी कोई भी आदेश उसे औपचारिक रूप से प्रदान नहीं किया गया था।

हाई कोर्ट ने पुलिस सुरक्षा जारी रखने का निर्देश दिया

उच्च न्यायालय ने पाया कि, प्रथम दृष्टया, याचिकाकर्ता की दलीलों में दम नजर आता है। इसलिए इसने निर्देश दिया कि महिला के लिए पुलिस सुरक्षा अगली सुनवाई तक जारी रहनी चाहिए।

अदालत ने राज्य सरकार और कोच्चि शहर के पुलिस आयुक्त सहित संबंधित पुलिस अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि महिला को अदालत के आदेश के बिना या उसकी इच्छा के विरुद्ध उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं ले जाया जाए।

कोर्ट ने आगे कहा कि अगर उसे खतरा महसूस होता है तो वह सीधे पुलिस या उसके लिए नियुक्त महिला सुरक्षा अधिकारी से संपर्क कर सकती है. ऐसा अनुरोध प्राप्त होने पर तत्काल और पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।

अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित है

उच्च न्यायालय ने अगली सुनवाई अगले सप्ताह के लिए निर्धारित की है और सभी संबंधित पक्षों को संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है।

तब तक, पुलिस सुरक्षा प्रदान करने वाला और अदालत की अनुमति के बिना महिला को किसी को सौंपने पर रोक लगाने वाला अंतरिम आदेश लागू रहेगा।

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