
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। ईरान के साथ एक बार फिर से बातचीत की चर्चा के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहा है। ट्रंप ने इस दौरे के बातचीत के लिए सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात का नाम लिया, मगर पाकिस्तान का जिक्र तक नहीं किया। ट्रंप के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि अब शहबाज और मुनीर कि उनकी नजर में कोई इज्जत नहीं रह गई।
आतंकी मुल्क पाकिस्तान इन दिनों अपने घर में ही घिरा है। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) चल रहा विरोध प्रदर्शन ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पाकिस्तानी सेना ने जिस तरह निर्दोश लोगों का कत्लेआम किया है, उसकी हर तरफ निंदा हो रही है। इस बीच मुनीर को एक और बड़ा झटका लगा है। उसके सबसे बड़े हितैषी बने डोनाल्ड ट्रंप ने भी उसे गच्चा दे दिया है। ईरान वार्ता में जिस शांति दूत का टैग लेकर पाकिस्तान घूम रहा था उसे अब अमेरिका ने छिन लिया है।
ट्रंप ने मध्यस्था के लिए इन देशो का लिया नाम
ट्रंप ने अपने ताजा बयान में कहा कि ईरान के अनुरोध पर अमेरिका फिर से बातचीत कर रहा है और इस प्रक्रिया में सऊदी अरब, UAE और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। उनके मुंह से पाकिस्तान का नाम न निकलने के बाद इस्लामाबाद में हलचल मच गई है। ट्रंप ने यह भी कहा है कि फिलहाल बातचीत का मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े समस्या का समाधान निकालना है।
पहले ही रिटायर्ड जनरल ने दिया था संकेत
इस बयान के बाद पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नई चर्चा छिड़ गई है। इससे पहले अमेरिकी सेवानिवृत्त जनरल और रक्षा विशेषज्ञ जैक कीन ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान का रुख ईरान के पक्ष में झुकता नजर आ रहा है। कीन के अनुसार, पाकिस्तान और कतर जैसे कुछ मध्यस्थ देश अमेरिका के बजाय ईरान के हितों के ज्यादा करीब दिखते हैं। ऐसे में मध्यस्था की भूमिका में पाकिस्तान पर सवाल खड़ा होता है।
इस्लामाबाद में हुई थी अमेरिका-ईरान की बीच पहली बातचीत
बता दें कि जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के दौरान पाकिस्तान को कतर के साथ प्रमुख मध्यस्थ माना गया था। कतर के विदेश मंत्रालय ने उस समय सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान की मध्यस्थता कोशिशों का समर्थन किया था। इस्लामाबाद में भी ईरान-अमेरिका वार्ता हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
इसके बाद 22 जून को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में उच्चस्तरीय बैठक हुई थी, जिसमें अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान के प्रतिनिधि शामिल थे। बैठक में परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और आगे की बातचीत के ढांचे जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। उस समय तक पाकिस्तान को इस प्रक्रिया का मुख्य मध्यस्थ माना जा रहा था। मगर इस बार अमेरिका ईरान वार्ता से मुनीर और शहबाज शरीफ को आउट कर दिया गया है।









