इसे सरकार की पूर्ण विफलता बताते हुए उन्होंने सीएम से इसका समाधान करने की मांग की थी। उन्होंने लिखा था, ‘ये सरकार की पूर्ण विफलता है। मुख्यमंत्री स्वयं इसका समाधान करें और क्षेत्र में तत्काल जांच, इलाज और राहत उपलब्ध कराएं।
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बीते तीन महीनों में हुई 30 आदिवासी बच्चों की मौत के मामले ने सबको हिलाकर रख दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार घातक बीमारी के साथ ही पीने के पानी, कुपोषण और समय पर इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों की जान जा रही है। जिसके बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके इस मुद्दे को उठाने के लिए मध्य प्रदेश के इसी बालाघाट जिले में आ रहे हैं। इस बात की जानकारी उन्होंने शुक्रवार की रात को सोशल मीडिया के जरिए दी। इस दौरान उन्होंने MP पुलिस पर उन आदिवासी छात्रों को हिरासत में लेने का आरोप भी लगाया। जो कि उनके दौरे का इंतजाम कर रहे थे।
अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘मैं मध्य प्रदेश के बालाघाट जा रहा हूं, जहां 30 आदिवासी बच्चों की मौत हो गई है। मुझे एक आदिवासी एक्टिविस्ट से जानकारी मिली है कि MP पुलिस अब उन आदिवासी छात्रों को हिरासत में लेने की कोशिश कर रही है जो मेरे दौरे का इंतजाम कर रहे हैं।’
दिपके ने पूछा- हमेशा भाजपा शासित राज्य ही क्यों?
अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, ‘ऐसा क्यों है कि हमेशा भाजपा-शासित राज्य ही सच सामने आने से इतना डरते हैं?’ दिपके की इसी पोस्ट को शेयर करते हुए पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने लिखा, ‘दिपके एंड कंपनी भाजपा के इन गुंडों का घमंड तोड़ेगी। अगर वे बातचीत नहीं कर सकते, तो यह उनकी समस्या है, हमारी नहीं।’
राहुल गांधी भी उठा चुके आदिवासी बच्चों की मौत का मुद्दा
बता दें कि अभिजीत दिपके बालाघाट इसलिए जा रहे हैं कि बीते तीन महीनों के दौरान वहां पर लगभग तीस आदिवासी बच्चे अलग-अलग कारणों से दम तोड़ चुके हैं। इस मुद्दे को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी सोशल मीडिया के जरिए उठा चुके हैं। 5 सितंबर को शेयर की अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा था, ‘मध्य प्रदेश के बालाघाट में 30 आदिवासी बच्चों की मृत्यु की खबर बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक है। इस घातक बीमारी के साथ पीने के पानी, पोषण, और समय पर इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बच्चों की जान ले रहा है।’
राहुल ने इसे बताया था सरकार की विफलता
इसे सरकार की पूर्ण विफलता बताते हुए उन्होंने सीएम से इसका समाधान करने की मांग की थी। उन्होंने लिखा था, ‘ये सरकार की पूर्ण विफलता है। मुख्यमंत्री स्वयं इसका समाधान करें और क्षेत्र में तत्काल जांच, इलाज और राहत उपलब्ध कराएं। बच्चों की जिंदगी से समझौता नहीं हो सकता।’ इसके साथ ही गांधी ने एक अखबार की खबर की कतरन भी पोस्ट की थी जिसमें बालाघाट क्षेत्र में आदिवासी बच्चों की मौत का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाये गए थे।
MP हाई कोर्ट में आ चुकी जनहित याचिका
उधर इसी मुद्दे को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार के स्वास्थ विभाग, महिला एव बाल विकास विभाग और बालाघाट के जिलाधिकारी कलेक्टर सहित सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
‘बच्चों को अबतक पर्याप्त उपचार नहीं मिल रहा’
यह जनहित याचिका नरसिंहपुर जिले के निवासी अंशुल तिवारी ने विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकशित खबरों के आधार पर दायर की है। उन्होंने बताया कि बालाघाट में संक्रामक बीमारियों के कारण 30 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। याचिका में कहा गया था कि बच्चों को अबतक पर्याप्त उपचार नहीं मिल रहा है और 50 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 बच्चों का इलाज किया जा रहा है।









