September 14, 2026 4:47 pm

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MP News: ‘न धमकी, न दबाव… हम अपनी मर्जी से शादी करना चाहते थे’; धर्म परिवर्तन केस में मुस्लिम युवक बाइज्जत बरी, कोर्ट में पलट गई पूरी कहानी

मध्य प्रदेश में अंतरधार्मिक संबंधों और जबरन धर्मांतरण के आरोपों को लेकर लागू मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (Madhya Pradesh Freedom of Religion Act) के तहत दर्ज एक संवेदनशील मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत में कानूनी प्रक्रिया के तहत शादी करने पहुंचे प्रेमी जोड़े के मामले में जब भारी विरोध के बाद युवक के खिलाफ कथित ‘लव जिहाद’ और जबरन धर्म परिवर्तन की गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, तब यह मामला सुर्खियों में आ गया था। हालांकि, लंबी कानूनी प्रक्रिया और गवाहों के बयानों के बाद अदालत में पूरी कहानी ही पलट गई। युवती और परिजनों के बयानों के आधार पर अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में युवक को सभी आपराधिक आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया है।

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ था जब नर्मदापुरम (पिपरिया) के रहने वाले एक कारखाने में कार्यरत युवक और उसके पड़ोस में रहने वाली दूसरे धर्म की युवती के बीच प्रेम संबंध बने। दोनों अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखते थे, इसलिए दोनों ने किसी सामाजिक विवाद से बचने के लिए कानूनी प्रक्रिया (Special Marriage Act) के जरिए विवाह करने का फैसला किया। दोनों अदालत के माध्यम से विवाह संपन्न कराने भोपाल पहुंचे थे।

हालांकि, भोपाल कोर्ट परिसर में पहुंचते ही कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा भारी विरोध प्रदर्शन किया गया। विवाद बढ़ने पर दोनों को पुलिस थाने ले जाया गया, जहां परिजनों की शिकायतों और सामाजिक दबाव के बाद युवक के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता कानून के तहत धर्म परिवर्तन कराने का आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया। इस घटना के बाद दोनों के परिवारों में तनाव बढ़ गया और दोनों को अलग कर दिया गया।

अतिरिक्त सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान यह मामला पूरी तरह बदल गया। जब अदालत में अभियोजन पक्ष ने अपने मुख्य गवाहों और युवती को पेश किया, तो युवती ने अपने पूर्व के पुलिसिया बयानों का खंडन करते हुए जज के समक्ष सच्चाई बयान की:

  • स्वेच्छा से विवाह का निर्णय: युवती ने अदालत के समक्ष स्पष्ट किया कि उस पर किसी भी तरह का कोई दबाव, लालच या धमकी नहीं थी। वह बालिग थी और अपनी स्वतंत्र सहमति से युवक के साथ जीवन बिताने के लिए विवाह करने कोर्ट आई थी।

  • धर्मांतरण का कोई प्रयास नहीं: उसने साफ किया कि युवक या उसके परिवार द्वारा कभी भी उसका धर्म बदलने, रीति-रिवाज थोपने या मजहबी इबादत करने का कोई अनुचित दबाव नहीं बनाया गया।

  • परिजनों का भी बदला रुख: युवती के परिजनों ने भी अदालत में अपनी गवाही के दौरान युवक पर लगे सीधे आरोपों की पुष्टि करने से इनकार कर दिया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलों, गवाहों के बयानों और उपलब्ध पुलिस साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण किया। अदालत ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि:

  • किसी भी बालिग नागरिक को अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने और कानूनी प्रक्रिया के तहत विवाह का आवेदन करने का संवैधानिक अधिकार है।

  • जबरन धर्म परिवर्तन, प्रलोभन या धोखाधड़ी का कोई भी दस्तावेजी या प्रत्यक्ष प्रमाण अभियोजन पक्ष अदालत में साबित नहीं कर सका।

  • मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता द्वारा आरोपों का समर्थन न करने के कारण आरोपी के खिलाफ कोई ठोस अपराध नहीं बनता।

इन आधारों पर अदालत ने युवक को जेल और लंबी अदालती कार्रवाई से राहत देते हुए सभी आरोपों से दोषमुक्त (Acquitted) घोषित कर दिया।

हालांकि युवक अदालत से बेदाग बरी हो गया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने दोनों के जीवन को पूरी तरह बदल दिया। मुकदमे और सामाजिक विरोध के लंबे दौर के बीच युवती का विवाह उसके परिजनों ने अपने ही समाज में कहीं और संपन्न करा दिया था। बरी होने के बाद युवक ने कहा कि कानून ने उसे निर्दोष तो साबित कर दिया, लेकिन इस कानूनी लड़ाई ने उसके रिश्ते, सामाजिक प्रतिष्ठा और करियर पर जो गहरा असर डाला, उसकी भरपाई कभी मुमकिन नहीं है।

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