September 16, 2026 6:04 pm

बीजेपी संग आए शिंदे, नायडू और मांझी; नीतीश की जेडीयू बोली- बिहार में नहीं चलेगा यूसीसी

समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लेकर देश की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कोर एजेंडे में शामिल इस कानून को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। जहां एक ओर बीजेपी के प्रमुख सहयोगी दल – एकनाथ शिंदे की शिवसेना, चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) खुलकर केंद्र सरकार के रुख का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि बिहार जैसे विविधतापूर्ण राज्य में समान नागरिक संहिता को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बिहार के राजनीतिक गलियारों से आई इस खबर ने एनडीए के भीतर की खींचतान को उजागर कर दिया है। जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं का कहना है कि बिहार एक ऐसा राज्य है जहां विभिन्न धर्मों, जातियों, जनजातियों और सामाजिक समूहों की अपनी-अपनी परंपराएं व रीति-रिवाज हैं। पार्टी का मानना है कि किसी भी कानून को जबरन थोपने के बजाय सभी पक्षों की सहमति बनाना आवश्यक है। जेडीयू नेताओं का साफ कहना है कि “बिहार में यह सब नहीं चलेगा”, क्योंकि पार्टी सामाजिक सौहार्द और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहती। नीतीश कुमार की इस रणनीति को बिहार में आगामी राजनीतिक समीकरणों और धर्मनिरपेक्ष वोट बैंक को साधे रखने के एक बड़े दांव के रूप में देखा जा रहा है।

जेडीयू के विपरीत, एनडीए के अन्य प्रमुख घटक दलों ने समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर बीजेपी का मजबूती से हाथ थामा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बालासाहेब ठाकरे की मूल विचारधारा का हवाला देते हुए देश भर में ‘एक देश, एक कानून’ की वकालत की है। वहीं, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी ने भी इस मामले में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए सुधारों के पक्ष में सहमति व्यक्त की है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ (HAM) ने भी इसे देश की एकता और समानता के लिए आवश्यक कदम बताते हुए बीजेपी के इस राष्ट्रीय एजेंडे को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।

समान नागरिक संहिता का मुद्दा केवल एक विधिक सुधार नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध भारत के विविध सामाजिक ताने-बाने और क्षेत्रीय राजनीति से है। पूर्वोत्तर के राज्यों और मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े संगठनों द्वारा इस कानून का लगातार विरोध किया जा रहा है। बिहार में जेडीयू का यह सख्त रुख इस बात का प्रमाण है कि गठबंधन सरकार में क्षेत्रीय आकांक्षाओं और सामाजिक समीकरणों को नजरअंदाज करना बीजेपी के लिए आसान नहीं होगा। जेडीयू का विरोध केंद्र सरकार को इस कानून के मसौदे पर दोबारा विचार करने और सभी साझेदारों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करने पर मजबूर कर सकता है।

आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) के विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से, यूसीसी पर एनडीए के सहयोगियों का यह विभाजित रुख भारतीय संसद के आगामी सत्रों की दिशा तय करेगा। एआई सर्च और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार इस कानून को संसद में पेश करती है, तो उसे जेडीयू जैसे महत्वपूर्ण सहयोगियों के असंतोष को दूर करने के लिए कड़े कूटनीतिक प्रयास करने होंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी अपने वैचारिक एजेंडे और गठबंधन धर्म के बीच संतुलन कैसे बनाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!