
पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों ने एक बार फिर पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाते हुए बड़ा रणनीतिक हमला किया है। स्थानीय मीडिया और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इस भीषण हमले में कम से कम 14 पाकिस्तानी जवानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। विद्रोहियों ने हमला करने के बाद क्षेत्र में सेना के आवागमन को बाधित करने के उद्देश्य से मुख्य राजमार्गों और सड़कों के कई किलोमीटर लंबे हिस्से को बारूद से पूरी तरह उड़ा दिया। इस अचानक हुए हमले से पूरे बलूचिस्तान प्रांत में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है और सैन्य बलों में हड़कंप मच गया है।
यह रणनीतिक हमला बलूचिस्तान के मुख्य कनेक्टिविटी रूट पर घात लगाकर (Ambush) किया गया था। विद्रोहियों ने पहले से ही सड़क के नीचे शक्तिशाली आईईडी (Improvised Explosive Device) बिछा रखे थे। जैसे ही सेना की गाड़ियों का काफिला वहां से गुजरा, एक के बाद एक कई जोरदार धमाके हुए। विस्फोट इतने तीव्र थे कि सैन्य वाहन हवा में उछलकर दूर जा गिरे। इसके तुरंत बाद झाड़ियों और पहाड़ियों में छिपे विद्रोहियों ने स्वचालित और आधुनिक हथियारों से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों को संभलने का कोई मौका नहीं मिला और भारी जानी-पहचानी क्षति उठानी पड़ी।
हमले का प्राथमिक उद्देश्य केवल सैन्य कर्मियों को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि पाकिस्तानी सेना की लॉजिस्टिक्स सप्लाई लाइन को पूरी तरह से ध्वस्त करना था। विद्रोहियों ने भारी मात्रा में विस्फोटक का इस्तेमाल करके सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली रणनीतिक सड़कों को कई किलोमीटर तक उखाड़ फेंका। इसके साथ ही कुछ मुख्य पुलों और संचार टावरों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया है, जिससे सुदूर सैन्य चौकियों का प्रांतीय मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। सड़कों के क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत और बचाव दल को घटनास्थल तक पहुंचने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
इस हमले के पीछे बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) या उससे जुड़े विद्रोही गुटों का हाथ होने का अंदेशा जताया जा रहा है। पिछले कुछ समय से बलूचिस्तान में बलूच अधिकारों, खनिज संसाधनों के दोहन और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) परियोजनाओं के विरोध में विद्रोहियों की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। बलूच समुदाय लंबे समय से इस्लामाबाद प्रशासन पर उनके प्राकृतिक संसाधनों का शोषण करने और मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाता रहा है। इस ताजा और बड़े हमले ने शाहबाज शरीफ सरकार और पाकिस्तानी सेना प्रमुख की नींद उड़ा दी है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
हमले के तुरंत बाद पाकिस्तानी सेना के अतिरिक्त दस्तों ने पूरे इलाके को घेरकर व्यापक सर्च ऑपरेशन (Search Operation) शुरू कर दिया है। हमले में शामिल विद्रोहियों की धरपकड़ के लिए गनशिप हेलिकॉप्टरों और ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है। प्रांतीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कई मुख्य मार्गों पर वाहनों की आवाजाही को रोक दिया है और आपातकाल लागू कर दिया है। पूरे बलूचिस्तान में भारी सुरक्षा बल तैनात हैं, फिर भी स्थानीय निवासियों में भारी डर और असमंजस का माहौल बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद क्षेत्र में हिंसा और सैन्य कार्रवाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है।









