September 19, 2026 9:33 pm

BREAKING NEWS

यूपी में घायल गोवंश के लिए शुरू होगी 24×7 इमरजेंसी सर्विस, सीएम योगी का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश की सड़कों पर होने वाले हादसों में घायल और बेसहारा गोवंश की रक्षा के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक युगांतरकारी नीतिगत निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार अब राज्य के सभी 75 जिलों में गोवंश के लिए त्वरित आपातकालीन बचाव एवं प्राथमिक चिकित्सा प्रणाली (इमरजेंसी रिस्पांस सर्विस) लागू करने जा रही है। शनिवार को अपने सरकारी आवास पर उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं शीर्ष पदाधिकारियों के साथ आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह निर्देश जारी किए। इस नई व्यवस्था के तहत हाईवे, एक्सप्रेसवे और स्थानीय मार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होने वाले मवेशियों को सूचना मिलते ही विशेष एम्बुलेंस और पशु चिकित्सकों की त्वरित रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंचकर जीवन रक्षक उपचार उपलब्ध कराएगी। इस मानवीय कदम से न केवल हजारों बेजुबानों की अकाल मृत्यु रुकेगी, बल्कि आवारा पशुओं के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज होगी।

गोवंश के समग्र स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रमाणित करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक दूरगामी कार्ययोजना का ऐलान किया है। सीएम योगी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान (मथुरा) तथा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज (लखनऊ) को निर्देश दिए हैं कि वे संयुक्त रूप से पंचगव्य आधारित चिकित्सा संभावनाओं पर अत्याधुनिक शोध और अनुसंधान (R&D) को युद्धस्तर पर आगे बढ़ाएं। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र से निर्मित पंचगव्य के औषधीय गुणों को आधुनिक वैज्ञानिक कसौटी पर कसकर प्रमाणित किया जाए। इससे गंभीर पशु रोगों के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य और पारंपरिक औषधियों के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव आ सकेगा और पारंपरिक भारतीय चिकित्सा ज्ञान को वैश्विक मंच पर वैज्ञानिक मान्यता हासिल होगी।

मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि गोवंश संरक्षण का कार्य केवल प्रशासनिक आदेशों और सरकारी बजट के भरोसे स्थायी नहीं हो सकता, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आत्मनिर्भर चक्र से जोड़ना अनिवार्य है। सरकार की नई नीति के तहत प्रदेश भर में सक्रिय महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs), कृषक उत्पादक संगठनों (FPOs), सीमांत किसानों और स्थानीय गोपालकों को गो-आधारित उत्पादों के निर्माण, आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग, वैल्यू एडिशन और बाजार में विपणन (मार्केटिंग) से जोड़ा जाएगा। गाय के गोबर और गोमूत्र से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक, अगरबत्ती, दीये, मूर्तियां, जैविक पेंट और अन्य उत्पाद तैयार करने की सूक्ष्म इकाइयां गांवों में स्थापित की जाएंगी। इससे ग्रामीण महिलाओं को घर के पास सम्मानजनक आजीविका मिलेगी और गोपालन किसानों के लिए घाटे का सौदा न होकर एक अत्यंत लाभकारी व्यवसाय बन सकेगा।

गोशालाओं की जमीनी हकीकत को बेहतर बनाने के लिए सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कागजी औपचारिकताओं से बाहर निकलें। उन्होंने कहा कि गोशालाओं का निरीक्षण केवल खामियां और कमियां गिनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सामने आने वाली हर समस्या का तय समय-सीमा के भीतर ठोस समाधान निकाला जाना चाहिए। राज्य की सभी पंजीकृत व अस्थायी गोशालाओं में गोवंश के उचित भरण-पोषण, नियमित साफ-सफाई, पूरे साल भर के लिए सूखे भूसे व हरे चारे का पर्याप्त भंडारण, स्वच्छ पेयजल और सर्दी-गर्मी से बचाव के लिए मजबूत शेड की व्यवस्था की 24 घंटे निगरानी की जाएगी। विशेष रूप से बीमार, वृद्ध और कमजोर मवेशियों के लिए अलग आइसोलेशन वार्ड बनाने और उनके विशेष पोषण का ध्यान रखने का कड़ा फरमान जारी किया गया है।

पशुओं में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों की रोकथाम को लेकर मुख्यमंत्री का रुख पूरी तरह सख्त नजर आया। उन्होंने पशुपालन विभाग को निर्देश दिए कि लम्पी स्किन डिजीज, खुरपका-मुंहपका (FMD) और ब्रुसेलोसिस जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए 100 प्रतिशत समयबद्ध टीकाकरण अभियान चलाया जाए। यदि किसी भी जिले में गोवंश के टीकाकरण में ढिलाई पाई गई या समय पर दवाएं उपलब्ध न होने से किसी गोवंश की असमय मौत हुई, तो संबंधित विकास खंड और जिले के पशु चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक और निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा गोशालाओं में वैज्ञानिक प्रबंधन लागू करने के लिए नर, मादा, युवा बछड़े और बीमार मवेशियों को अलग-अलग बाड़ों में रखकर उनकी उम्र और शारीरिक जरूरत के अनुसार चारा व देखभाल सुनिश्चित करने पर सहमति बनी।

गो सेवा आयोग ने बैठक में राज्य में निराश्रित गोवंश की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कई व्यवहारिक और नवाचारी सुझाव पेश किए। आयोग ने सिफारिश की कि मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के अंतर्गत 10 या उससे अधिक गोवंश का पालन करने वाले प्रगतिशील किसानों और गोपालकों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी अनुदान दिया जाए। इसके तहत उनके परिसरों में कैटल शेड का निर्माण, घरेलू बायोगैस संयंत्र और गोमूत्र संग्रहण टैंक (यूरिन टैंक) जैसी बुनियादी सुविधाएं सरकारी मदद से स्थापित की जाएं। इसके अलावा, पूरे साल हरे चारे की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए ग्राम समाज की बंजर जमीनों और गोचर भूमि को चारागाह के रूप में विकसित करने और स्थानीय किसानों से अनुबंध कर चारा उत्पादन बढ़ाने की नीति पर सहमति जताई गई। इससे गांवों में जीवामृत और बीजामृत जैसे प्राकृतिक खेती के घटकों का उत्पादन बढ़ेगा, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी और किसानों की खेती की लागत में भारी गिरावट आएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!