September 21, 2026 4:31 am

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364 दिनों की FD पर तगड़ा रिटर्न: आम नागरिक, सीनियर और सुपर सीनियर सिटीजन का पूरा गणित

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में पैसे निवेश करने वाले अधिकांश लोग आमतौर पर 1 वर्ष, 3 वर्ष या 5 वर्ष की पारंपरिक मैच्योरिटी अवधि चुनते हैं। बहुत कम निवेशकों को यह जानकारी होती है कि बैंक अक्सर ‘स्पेशल टेन्योर’ यानी विशेष अवधियों पर सामान्य से कहीं बेहतर ब्याज की पेशकश करते हैं। ऐसा ही एक बेहद लोकप्रिय और रणनीतिक टेन्योर है 364 दिन की एफडी (यानी ठीक 1 साल से 1 दिन कम)।

शॉर्ट-टर्म से मीडियम-टर्म के लिए सुरक्षित निवेश की तलाश कर रहे लोगों के लिए यह बकेट बेहद आकर्षक बन चुका है। आइए समझते हैं कि इस टेन्योर पर सबसे तगड़ा रिटर्न कहां मिल रहा है और अलग-अलग उम्र के निवेशकों के लिए इसका गणित कैसे काम करता है।

364 दिन की मैच्योरिटी पर ब्याज दरें बैंक की श्रेणी के आधार पर तय होती हैं। आमतौर पर स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) और कुछ चुनिंदा प्राइवेट बैंक बड़े सरकारी बैंकों की तुलना में इस अवधि पर 0.50% से लेकर 1.25% तक ज्यादा ब्याज ऑफर करते हैं।

  • स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs): सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक, यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक, उत्कर्ष और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक इस श्रेणी में सबसे आगे रहते हैं। यहां आम ग्राहकों को 7.75% से 8.25% तक, जबकि वरिष्ठ नागरिकों को 8.25% से 8.75% तक वार्षिक ब्याज मिल रहा है।

  • प्रमुख प्राइवेट बैंक: एचडीएफसी बैंक (HDFC), आईसीआईसीआई (ICICI) और एक्सिस बैंक इस अवधि (1 वर्ष से ठीक पहले के ब्रैकेट) के लिए आम जनता को 6.70% से 7.10% और सीनियर सिटीजंस को 7.20% से 7.60% तक का ब्याज दे रहे हैं।

  • सरकारी बैंक: भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा और पीएनबी जैसे सरकारी बैंक 364 दिनों के ब्रैकेट में सामान्य ग्राहकों को लगभग 6.50% से 6.80% और सीनियर सिटीजंस को 7.00% से 7.30% के आसपास रिटर्न देते हैं।

भारतीय बैंकिंग प्रणाली में निवेशकों को उनकी उम्र के हिसाब से तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है, जहां ब्याज दरों में सीधा अंतर देखने को मिलता है:

  • आम नागरिक (60 वर्ष से कम): इन्हें बैंक की बेस यानी मानक ब्याज दर मिलती है। स्मॉल फाइनेंस बैंकों में 364 दिनों के लिए यह दर औसतन 7.75% से 8.00% बैठती है।

  • सीनियर सिटीजन (60 से 80 वर्ष): अधिकांश बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य दर से 0.50% (50 बेसिस प्वाइंट्स) का अतिरिक्त प्रीमियम देते हैं। इससे उनका रिटर्न बढ़कर 8.25% से 8.50% तक हो जाता है।

  • सुपर सीनियर सिटीजन (80 वर्ष से अधिक): कई बैंक (जैसे पीएनबी, आरबीएल और कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक) 80 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों के लिए ‘सुपर सीनियर सिटीजन’ स्कीम चलाते हैं, जिसमें सीनियर सिटीजन दर से भी 0.20% से 0.25% अतिरिक्त ब्याज मिलता है (यानी सामान्य दर से कुल 0.75% से 0.80% अधिक)।

₹5 लाख के निवेश पर 364 दिनों में संभावित कमाई का उदाहरण:

श्रेणी अनुमानित ब्याज दर (SFBs में) 364 दिन बाद कुल ब्याज मैच्योरिटी पर मिलने वाली कुल रकम
आम नागरिक 8.00% ~ ₹40,000 ₹5,40,000
सीनियर सिटीजन 8.50% ~ ₹42,500 ₹5,42,500
सुपर सीनियर सिटीजन 8.75% ~ ₹43,750 ₹5,43,750

(नोट: वास्तविक रिटर्न बैंक के तिमाही/मासिक कंपाउंडिंग चक्र और दिन-आधारित ब्याज गणना के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।)

बैंक 364 दिन की अवधि को अपने लिक्विडिटी मैनेजमेंट और एसेट-लायबिलिटी मिसमैच को संतुलित करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। 365 दिन (पूरा 1 साल) होते ही कई नियामक और तकनीकी मानक बदल जाते हैं, इसलिए बैंक 1 दिन कम (364 दिन) की अवधि पर अक्सर आक्रामक ब्याज दरें तय करते हैं ताकि वे एक साल के भीतर अल्पकालिक पूंजी जुटा सकें।

निवेशकों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि उनका पैसा लंबे समय के लिए लॉक नहीं होता। एक साल से भी कम समय में पूंजी ब्याज सहित वापस मिल जाती है, जिसे बाजार के रुख के हिसाब से दोबारा री-इन्वेस्ट किया जा सकता है।

ज्यादा ब्याज के चक्कर में किसी भी बैंक में पैसा लगाने से पहले सुरक्षा और टैक्स के नियमों को समझना बेहद जरूरी है:

  • ₹5 लाख तक की सरकारी गारंटी: चाहे सरकारी बैंक हो, प्राइवेट बैंक या फिर स्मॉल फाइनेंस बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सहायक संस्था DICGC के तहत हर बैंक के प्रत्येक जमाकर्ता का ₹5 लाख तक का मूलधन और ब्याज पूरी तरह बीमित (सुरक्षित) होता है। इसलिए किसी एक स्मॉल फाइनेंस बैंक में ₹5 लाख तक का निवेश पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है।

  • TDS और टैक्स नियम: एफडी से होने वाली ब्याज आय निवेशक के टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होती है।

    • आम नागरिकों के लिए एक वित्तीय वर्ष में सभी एफडी से मिलने वाला ब्याज ₹40,000 से अधिक होने पर बैंक TDS काटते हैं।

    • सीनियर और सुपर सीनियर सिटीजंस के लिए आयकर कानून के सेक्शन 80TTB के तहत ₹50,000 तक की ब्याज आय पर पूरी कर-छूट मिलती है, और TDS भी ₹50,000 से अधिक ब्याज पर ही कटता है।

    • यदि आपकी कुल आय टैक्स के दायरे में नहीं आती, तो TDS से बचने के लिए आम नागरिक फॉर्म 15G और वरिष्ठ नागरिक फॉर्म 15H जमा कर सकते हैं।

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