October 4, 2026 10:25 am

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किशमिश से लेकर बादाम तक, किस ड्राई फ्रूट की तासीर होती है गर्म और किसकी ठंडी

स्वस्थ और तंदुरुस्त रहने के लिए हमारे खानपान में सूखे मेवे यानी ड्राई फ्रूट्स (Dry Fruits) का सेवन हमेशा से ही सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। बादाम, किशमिश, काजू, अखरोट, पिस्ता और छुहारा जैसे तमाम ड्राई फ्रूट्स पोषक तत्वों, विटामिंस, मिनरल्स और हेल्दी फैट्स का खजाना होते हैं, जो हमारे शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह बहुत बड़ा सवाल रहता है कि किस ड्राई फ्रूट की तासीर गर्म होती है और किसकी ठंडी, तथा यदि इन्हें गलत समय या गलत तरीके से खा लिया जाए तो शरीर पर इसका क्या असर पड़ता है। आयुर्वेद और स्वास्थ्य विज्ञान के अनुसार, हर सूखे मेवे की अपनी एक विशेष तासीर होती है, जिसे मौसम और अपने शरीर की प्रकृति (Body Constitution) के अनुसार ही खाना चाहिए। यदि आप सर्दियों के मौसम में ठंडी तासीर वाली चीजें ज्यादा खा लें या गर्मियों में अत्यधिक गर्म तासीर वाले मेवे का सेवन कर लें, तो पाचन संबंधी गड़बड़ी, फोड़े-फुंसी या एसिडिटी जैसी समस्याएं घेर सकती हैं। इस विस्तृत लेख में आइए जानते हैं कि किस ड्राई फ्रूट की तासीर कैसी होती है और उन्हें खाने का सही वैज्ञानिक व आयुर्वेदिक तरीका क्या है।

ड्राई फ्रूट्स के राजा कहे जाने वाले बादाम (Almonds) की तासीर गर्म होती है, इसलिए आयुर्वेद में इसे हमेशा रातभर पानी में भिगोकर और छिलका उतारकर खाने की सलाह दी जाती है। जब आप बादाम को भिगोकर खाते हैं, तो इसकी गर्मी कुछ हद तक संतुलित हो जाती है और शरीर इसके सभी पोषक तत्वों को आसानी से सोख लेता है। वहीं, काजू (Cashews) की तासीर भी गर्म होती है, इसलिए गर्मियों के दिनों में इसका अत्यधिक सेवन करने से शरीर में पित्त दोष बढ़ सकता है और त्वचा पर मुहासे निकल सकते हैं। अखरोट (Walnuts) की तासीर भी गर्म होती है, जो हमारे मस्तिष्क और हृदय के स्वास्थ्य के लिए अमृत के समान माना जाता है। अखरोट को सुबह के समय या शाम को स्नैक्स के रूप में सीमित मात्रा में खाना सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि अधिक मात्रा में गर्म तासीर वाले मेवे खाने से शरीर का तापमान असंतुलित हो सकता है।

बादाम और काजू के विपरीत, किशमिश (Raisins) और मुनक्का की तासीर ठंडी और मधुर मानी जाती है, जो पेट की गर्मी को शांत करने और खून बढ़ाने में बेहद मददगार होती है। गर्मियों के मौसम में या जिन लोगों को अक्सर एसिडिटी, पेट में जलन या कब्ज की शिकायत रहती है, उनके लिए किशमिश को पानी में भिगोकर उसका सेवन करना किसी वरदान से कम नहीं है। अंजीर (Figs) की तासीर भी मध्यम से ठंडी होती है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है और शरीर को भरपूर मात्रा में फाइबर प्रदान करती है। अंजीर को सुबह खाली पेट दूध या पानी के साथ भिगोकर खाने से पेट पूरी तरह साफ रहता है और पाचन क्रिया दुरुस्त बनी रहती है। इन ठंडी तासीर वाले मेवों को आप बिना किसी संकोच के साल भर अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं, बशर्ते इनकी मात्रा संतुलित होनी चाहिए।

खजूर (Dates) और छुहारा अपनी अत्यधिक गर्म तासीर के लिए जाने जाते हैं, जो शरीर को अंदर से ताकत और जबरदस्त ऊर्जा प्रदान करते हैं। सर्दियों के मौसम में खजूर का सेवन करना जोड़ों के दर्द, कमजोरी और थकान को दूर करने का सबसे बेहतरीन घरेलू उपाय माना जाता है। चूंकि इनकी तासीर काफी गर्म होती है, इसलिए गर्मियों के दिनों में इनका सेवन बहुत ही सीमित मात्रा में या फिर दूध में उबालकर करना चाहिए ताकि शरीर पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। जो लोग दुबलेपन या कमजोरी से परेशान हैं, वे रात को दूध में छुहारा उबालकर और उसका सेवन करके अपने शरीर के वजन और स्टेमिना को तेजी से बढ़ा सकते हैं।

ड्राई फ्रूट्स सेहत के लिए जितने फायदेमंद होते हैं, उतनी ही सावधानी इन्हें खाने के समय और मात्रा को लेकर बरतनी जरूरी होती है। सुबह के समय खाली पेट भीगे हुए बादाम और अखरोट खाना सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि इस समय हमारा मेटाबॉलिज्म एक्टिव होता है और शरीर मेवों के पोषक तत्वों को सबसे अच्छी तरह अवशोषित करता है। दोपहर के वक्त या शाम की हल्की भूख के समय आप कुछ मात्रा में किशमिश या पिस्ता का सेवन कर सकते हैं, लेकिन रात के समय बहुत अधिक गर्म तासीर वाले मेवे खाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे नींद में खलल पड़ सकती है या भारीपन महसूस हो सकता है। एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना मुट्ठी भर यानी लगभग 20 से 30 ग्राम ड्राई फ्रूट्स ही खाने चाहिए, क्योंकि अत्यधिक सेवन से कैलोरी और वजन बढ़ने का खतरा रहता है।

संक्षेप में कहें तो हर ड्राई फ्रूट की अपनी एक अलग तासीर और विशेषता होती है, और यदि हम अपनी शारीरिक प्रकृति तथा मौसम के हिसाब से इनका सेवन करें, तो हम हमेशा स्वस्थ और ऊर्जावान बने रह सकते हैं। आयुर्वेद के इन प्राचीन नियमों और आधुनिक पोषण विज्ञान के तालमेल को समझकर यदि आप अपनी डाइट में मेवों को शामिल करते हैं, तो आपको कभी भी पाचन या गर्मी की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। आज ही अपनी जीवनशैली में इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनाएं और सूखे मेवों के इस खजाने से अपने परिवार के स्वास्थ्य को और अधिक मजबूत बनाएं।

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