April 29, 2026 2:12 am

Mauganj-झुमकों के लिए डकैती: मऊगंज में सरपंच महिला का काटा कान, डेढ़ लाख की लूट, खौफ में मोहल्ला

Mauganj News :

मऊगंज। मऊगंज जिले में अपराधियों के हौसले अब इस कदर बुलंद हो गए हैं कि अब चोरी-डकैती के लिए वह महिलाओं की अस्मिता और शरीर तक को नहीं बख्श रहे। ताजा मामला मऊगंज हॉस्पिटल कॉलोनी का है, जहां बीती रात दिल दहला देने वाली वारदात में अज्ञात चोरों ने घर में घुसकर न सिर्फ लूट की, बल्कि ग्राम पंचायत रतनगवा खास की महिला सरपंच मोलिया साकेत का कान तक काट लिया—केवल सोने के झुमकों के लिए।

घर में तोड़फोड़ कर लूटपाट, फिर महिला को बनाया निशाना

जानकारी के अनुसार सरपंच मोलिया साकेत हॉस्पिटल कॉलोनी स्थित किराए के मकान में अपनी बेटी और नातिन के साथ रहती हैं।  देर रात अज्ञात चोर घर में घुसे, अलमारी तोड़कर ₹40,000 नगद और सोने-चांदी के जेवरात समेट लिए। इसके बाद चोर सरपंच के कमरे में घुसे जहां वह अपनी नातिन के साथ सो रहीं थीं।
बेरहम चोरों ने पहले नातिन के पैर से पायल उतारी, फिर महिला सरपंच के कान से झुमका खींचने के दौरान कान तक काट दिया, जिससे महिला लहूलुहान हो गईं।

पहचान पर दी जान से मारने की धमकी

घायल सरपंच मोलिया साकेत ने बताया कि उन्होंने चोरों में से एक को चेहरे से पहचान लिया है। लेकिन चोरों ने पहचान उजागर करने पर जान से मारने की धमकी देकर मौके से भाग निकले। पीड़िता किसी तरह घायल अवस्था में मऊगंज थाने पहुंचीं और घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

डेढ़ लाख की लूट, पुलिस के इकबाल पर सवाल

चोरी की इस वारदात में चोरों ने करीब डेढ़ लाख रुपये मूल्य की नकदी व जेवरात पर हाथ साफ किया। सरपंच की बेटी, जो सिविल अस्पताल में नाइट ड्यूटी पर थी, उस समय घर में मौजूद नहीं थी। घर में केवल बुजुर्ग महिला और मासूम बच्ची थी—जिसे भी अपराधियों ने नहीं बख्शा।

पुलिस पर उठे सवाल, अपराधियों में खौफ नहीं

घटना के बाद क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है। मोहल्लेवालों का कहना है कि पुलिस की गश्त न के बराबर है, और अपराधियों में पुलिस का कोई खौफ नहीं बचा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

सवाल ये है कि जब एक महिला जनप्रतिनिधि तक सुरक्षित नहीं, तो आम जनता कैसे महफूज़ रहेगी?
मऊगंज पुलिस के लिए यह सिर्फ एक चोरी नहीं, बल्कि एक सामाजिक शर्मिंदगी का सवाल बन गया है।

जरूरत है अब केवल जांच की नहीं, सख्त कार्रवाई और जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय करने की।

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