September 19, 2026 6:18 pm

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APAAR ID New Role in Hiring: अपार आईडी अब सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, नौकरी दिलाने में भी करेगी मदद! कंपनियां एक क्लिक में देख सकेंगी कैंडिडेट्स की असली डिग्री, फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम

केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत शुरू की गई ‘अपार आईडी’ (Automated Permanent Academic Account Registry – APAAR ID) अब केवल स्कूल-कॉलेजों में छात्रों के नामांकन और परीक्षा फॉर्म भरने तक सीमित नहीं रहेगी। शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास मंत्रालय ने इस 12 अंकों की डिजिटल स्टूडेंट आईडी के दायरे को व्यापक करते हुए इसे सीधे कॉरपोरेट रिक्रूटमेंट और जॉब वेरिफिकेशन सिस्टम से जोड़ने की रूपरेखा तैयार कर ली है।

अब टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसी आईटी कंपनियों से लेकर बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स तक, भर्ती प्रक्रिया (Recruitment Process) के दौरान उम्मीदवारों के एकेडमिक बैकग्राउंड की जांच के लिए अपार आईडी का उपयोग कर सकेंगी। उम्मीदवार की सहमति से कंपनियां एक सुरक्षित डिजिटल गेटवे के जरिए यह सत्यापित कर सकेंगी कि कैंडिडेट द्वारा जमा की गई 10वीं, 12वीं, ग्रेजुएशन या पोस्ट-ग्रेजुएशन की डिग्री असली है या नहीं।

अपार आईडी को भारत के प्रत्येक छात्र के लिए ‘एजुकेशनल पासपोर्ट’ या ‘लाइफलॉन्ग एकेडमिक आईडी’ के रूप में डिजाइन किया गया है:

  • डिजिटल पहचान: यह 12 अंकों का एक विशिष्ट और आजीवन मान्य पहचान नंबर है, जो छात्र के प्री-प्राइमरी स्कूल में दाखिला लेने से लेकर उच्च शिक्षा और पीएचडी तक उसके सभी शैक्षणिक पड़ावों को एक ही स्थान पर दर्ज करता है।

  • एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) से जुड़ाव: अपार आईडी सीधे छात्र के ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स’ (Academic Bank of Credits) और डिजिलॉकर (DigiLocker) खाते से लिंक होती है।

  • क्रेडिट्स और सर्टिफिकेट्स का डिजिटल भंडार: छात्र द्वारा अर्जित किए गए क्रेडिट्स, सेमेस्टर ग्रेड शीट्स, डिग्री, डिप्लोमा, खेलकूद के प्रमाण पत्र और यहां तक कि नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (NSQF) के स्किल सर्टिफिकेट भी इसमें सीधे मान्यता प्राप्त बोर्डों और विश्वविद्यालयों द्वारा डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित (Digitally Signed) होकर अपलोड होते हैं।

कॉर्पोरेट जगत में हायरिंग के दौरान बैकग्राउंड वेरिफिकेशन (BGV) हमेशा से एक जटिल, खर्चीली और समय लेने वाली प्रक्रिया रही है। अपार आईडी के आने से इस पूरे सिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा:

  • मिनटों में पूरा होगा बैकग्राउंड वेरिफिकेशन: पहले किसी कैंडिडेट की डिग्री सत्यापित करने के लिए थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन एजेंसियों को संबंधित विश्वविद्यालय या कॉलेज में ईमेल या पत्र भेजना पड़ता था, जिसमें 15 से 45 दिन का समय लगता था। अपार आईडी के माध्यम से कैंडिडेट की अनुमति (Consent-Based Access) से यह काम 2 मिनट के भीतर ऑनलाइन पूरा हो जाएगा।

  • फर्जी डिग्री और जाली मार्कशीट का अंत: देश में जाली मार्कशीट और फर्जी विश्वविद्यालयों से जारी डिग्रियों के सहारे नौकरी पाने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। चूंकि अपार आईडी में डेटा सीधे संबंधित मान्यता प्राप्त संस्थान (जैसे सीबीएसई, राज्य शिक्षा बोर्ड, यूजीसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटीज) द्वारा प्रमाणित होकर आता है, इसलिए किसी भी स्तर पर दस्तावेजों में हेरफेर या फोटोशॉप करने की गुंजाइश शून्य हो जाएगी।

  • ड्रॉपआउट्स और स्किल्स का सटीक रिकॉर्ड: यदि किसी छात्र ने कॉलेज बीच में छोड़ा है या मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम के तहत कोई डिप्लोमा लिया है, तो कंपनी उसकी वास्तविक योग्यता और क्रेडिट स्कोर को पारदर्शी तरीके से देख सकेगी।

  • दस्तावेजों के खोने या फटने का डर खत्म: इंटरव्यू के समय भारी-भरकम फाइलों में मूल प्रमाण पत्रों को संभालकर ले जाने की मजबूरी खत्म होगी। उम्मीदवार अपने रिज्यूमे (CV) में केवल अपनी यूनिक अपार आईडी या उसका क्यूआर कोड मेंशन कर सकेंगे।

  • ऑन-द-स्पॉट ऑफर लेटर: बैकग्राउंड वेरिफिकेशन का समय घटने से कंपनियों की हायरिंग प्रक्रिया तेज होगी, जिससे चयनित उम्मीदवारों को हफ्तों तक ऑफर लेटर और जॉइनिंग डेट का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

  • स्किल बेस्ड हायरिंग को बढ़ावा: यदि छात्र ने कॉलेज के दौरान ‘स्वयं’ (SWAYAM), ‘एनएपीएस’ (NAPS) या किसी मान्यता प्राप्त सरकारी पोर्टल से कोई अतिरिक्त सर्टिफिकेशन या वोकेशनल कोर्स किया है, तो उसके क्रेडिट्स भी अपार आईडी में जुड़ेंगे, जिससे फ्रेशर्स को जॉब मार्केट में अतिरिक्त बढ़त मिलेगी।

छात्रों के शैक्षणिक डेटा की गोपनीयता को लेकर सरकार ने सख्त प्रावधान तय किए हैं:

  • सहमति आधारित प्रणाली (Consent-Based): कोई भी कंपनी या नियोक्ता किसी छात्र की अपार आईडी से उसका डेटा सीधे नहीं देख सकता। जब कंपनी वेरिफिकेशन रिक्वेस्ट भेजेगी, तो छात्र के रजिस्टर्ड मोबाइल और ईमेल पर एक ओटीपी (OTP) या अप्रूवल रिक्वेस्ट आएगी।

  • छात्र के नियंत्रण में डेटा: छात्र जब अपनी डिजिटल सहमति (Consent) देगा, तभी कंपनी को केवल आवश्यक शैक्षणिक विवरण देखने की अनुमति मिलेगी।

  • डेटा सुरक्षा कानून (DPDP Act) के अनुकूल: यह पूरा ढांचा डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के कड़े नियमों के तहत काम करता है, जिससे छात्रों का व्यक्तिगत विवरण लीक होने या व्यावसायिक विज्ञापनों के लिए बेचे जाने का कोई जोखिम नहीं है।

यदि किसी छात्र या युवा ने अभी तक अपनी अपार आईडी नहीं बनाई है, तो वह इन आसान चरणों के जरिए इसे खुद जनरेट कर सकता है:

  • सबसे पहले एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स के आधिकारिक पोर्टल (abc.gov.in) या ‘अपार’ पोर्टल (apaar.education.gov.in) पर जाएं।

  • अपने डिजीलॉकर (DigiLocker) क्रेडेंशियल्स के जरिए लॉगिन करें।

  • अपनी बेसिक डिटेल्स, स्कूल/कॉलेज का नाम और एनरोलमेंट नंबर दर्ज करें।

  • ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद सिस्टम स्वतः आपकी 12 अंकों की विशिष्ट अपार आईडी जनरेट कर देगा, जिसे डिजीलॉकर ऐप में ‘इश्यूड डॉक्यूमेंट’ के रूप में सुरक्षित डाउनलोड किया जा सकता है।

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