
DA Hike July 2026: क्या 60% से बढ़कर 64% होगा महंगाई भत्ता? जानिए कितनी बढ़ेगी सैलरी और क्या मूल वेतन में होगा डीए का विलय!
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DA Hike July 2026 Calculation & Merger: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए जुलाई 2026 के महंगाई भत्ते (DA) में 4% बढ़ोतरी के संकेत। जानिए 60% से 64% डीए होने पर वेतन वृद्धि और बेसिक पे में विलय का सच।
केंद्र सरकार के 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए त्योहारी सीजन से ठीक पहले महंगाई भत्ते (Dearness Allowance – DA) और महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के श्रम ब्यूरो द्वारा जारी औद्योगिक श्रमिकों के अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के आंकड़ों के आधार पर यह प्रबल संभावना जताई जा रही है कि जुलाई 2026 से प्रभावी होने वाले महंगाई भत्ते में 3 से 4 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को जनवरी 2026 से 60 प्रतिशत की दर से डीए मिल रहा है। यदि आगामी कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार 4 प्रतिशत की वृद्धि पर मुहर लगाती है, तो कुल महंगाई भत्ता बढ़कर रिकॉर्ड 64 प्रतिशत पर पहुंच जाएगा। इस संभावित वृद्धि के साथ ही कर्मचारी संघों और प्रशासनिक गलियारों में यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या 60 फीसदी का आंकड़ा पार कर चुके डीए का विलय मूल वेतन (Basic Pay) में किया जाएगा।
केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की गणना 12 महीनों के औसत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के आधार पर 7वें वेतन आयोग द्वारा निर्धारित तय फॉर्मूले से की जाती है।
इंडेक्स में उछाल: श्रम ब्यूरो द्वारा जारी हालिया मासिक आंकड़ों में सूचकांक 1.3 अंकों की बढ़त के साथ 153.2 के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे 12 महीनों का औसत स्कोर 64.38% की सैद्धांतिक डीए दर दर्शाता है।
दशमलव का नियम: चूंकि नियमों के तहत डीए की गणना में दशमलव मान को छोड़ दिया जाता है और केवल पूर्णांक (Whole Percentage) को ही स्वीकार किया जाता है, इसलिए यह दर 64 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
पिछला रुझान: कर्मचारियों का डीए जनवरी 2024 में 50% पर पहुंचा था, जिसके बाद जुलाई 2024 में 53%, जनवरी 2025 में 55%, जुलाई 2025 में 58% और जनवरी 2026 में 60% दर्ज किया गया था। अब जुलाई 2026 के लिए 63% या 64% का स्तर लगभग तय माना जा रहा है।
आगामी दशहरा, दिवाली और छठ पूजा जैसे बड़े त्योहारों को देखते हुए कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स (Confederation of Central Government Employees and Workers) ने वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure) को पत्र लिखकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
संगठन के महासचिव एम. एस. वेंकटेशन द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वे किसी अग्रिम या अतिरिक्त लाभ की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि औपचारिक प्रक्रिया को बिना किसी प्रशासनिक देरी के पूरा किया जाए। चूंकि यह संशोधन 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होना है, इसलिए यदि कैबिनेट अक्टूबर में मंजूरी देती है, तो कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने का 3 माह का पिछला बकाया (Arrears) वेतन के साथ एकमुश्त मिलेगा।
महंगाई भत्ते की गणना सीधे तौर पर कर्मचारी के मूल वेतन (Basic Pay) पर की जाती है। यदि डीए 60% से बढ़कर 64% होता है, तो विभिन्न पे-मैट्रिक्स लेवल्स पर मासिक वेतन में होने वाली संभावित वृद्धि इस प्रकार होगी:
पे लेवल-1 (न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000):
60% पर वर्तमान डीए: ₹10,800 प्रति माह
64% पर नया डीए: ₹11,520 प्रति माह
मासिक वेतन में सीधी वृद्धि: ₹720 (सालाना ₹8,640 का लाभ)
पे लेवल-7 (मध्यम स्तर बेसिक सैलरी ₹44,900):
60% पर वर्तमान डीए: ₹26,940 प्रति माह
64% पर नया डीए: ₹28,736 प्रति माह
मासिक वेतन में सीधी वृद्धि: ₹1,796 (सालाना ₹21,552 का लाभ)
पे लेवल-10 (राजपत्रित अधिकारी बेसिक सैलरी ₹56,100):
60% पर वर्तमान डीए: ₹33,660 प्रति माह
64% पर नया डीए: ₹35,904 प्रति माह
मासिक वेतन में सीधी वृद्धि: ₹2,244 (सालाना ₹26,928 का लाभ)
इसी अनुपात में केंद्र सरकार के करीब 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों की महंगाई राहत (DR) में भी समान बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी, जिससे उनकी मासिक पेंशन में सीधा इजाफा होगा।
सरकारी हलकों में यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि क्या डीए के 50% या 60% का आंकड़ा पार करने के बाद इसे मूल वेतन (Basic Pay) में मर्ज (Merge) कर दिया जाएगा?
5वें वेतन आयोग का ऐतिहासिक नियम: 5वें केंद्रीय वेतन आयोग (5th CPC) के दौरान यह सिफारिश की गई थी कि जब भी महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत तक पहुंचे, तो 50% डीए को सीधे मूल वेतन (Basic Pay) में मिला दिया जाए, जिसे ‘महंगाई वेतन’ (Dearness Pay) कहा गया था।
7वें वेतन आयोग की वर्तमान व्यवस्था: 7वें वेतन आयोग ने डीए के मूल वेतन में स्वतः विलय (Automatic Merger) के नियम को समाप्त कर दिया था। इसके स्थान पर आयोग ने यह व्यवस्था बनाई थी कि जब डीए 50% को पार करेगा, तो मकान किराया भत्ता (HRA), बाल शिक्षा भत्ता (CEA), हॉस्टल सब्सिडी और ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा जैसी सहायक मदों में 25% तक की स्वतः बढ़ोतरी हो जाएगी।
सरकार का स्पष्ट रुख: वित्त मंत्रालय पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि 7वें वेतन आयोग के ढांचे में 50% या 60% डीए होने पर बेसिक पे में विलय का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। इसलिए 64% डीए होने पर भी यह अतिरिक्त भत्ते के रूप में ही मिलता रहेगा।
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि डीए का मूल वेतन में विलय अब केवल 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) की सिफारिशों के तहत ही संभव होगा।
आमतौर पर हर 10 साल में नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाती हैं। 7वें वेतन आयोग का 10 वर्षीय कार्यकाल पूरा होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जब 8वां वेतन आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट और नए पे-मैट्रिक्स का गठन करेगा, तब तत्कालीन कुल महंगाई भत्ते (चाहे वह 60% हो, 64% हो या उससे अधिक) को शून्य (0%) करके एक नए ‘फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) के साथ नए बेसिक वेतन में समाहित कर दिया जाएगा।
फिलहाल, केंद्रीय मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में जुलाई 2026 की डीए वृद्धि पर आधिकारिक मुहर लगने का इंतजार है, जिससे त्योहारी सीजन में लाखों कर्मचारियों की जेब में अतिरिक्त नकदी का प्रवाह सुनिश्चित होगा।


















