September 19, 2026 2:32 am

How to Stop Nausea Fast: उल्टी जैसा महसूस हो रहा है तो क्या करें? एक्सपर्ट से जानें जी मिचलाने (Nausea) से तुरंत छुटकारा पाने के 5 सबसे असरदार घरेलू उपाय

दैनिक जीवन में कई बार ऐसा होता है कि बिना किसी गंभीर बीमारी के अचानक पेट में अजीब सी हलचल शुरू हो जाती है, मुंह में अतिरिक्त लार बनने लगती है और जी मिचलाने (Nausea) के साथ उल्टी आने जैसा अहसास होने लगता है। सफर के दौरान होने वाली मोशन सिकनेस (कार या बस में चक्कर आना), बाहर का बासी या अत्यधिक तैलीय-मसालेदार खाना खाने से हुई बदहजमी (Indigestion), एसिडिटी, माइग्रेन, महिलाओं में प्रेगनेंसी की ‘मॉर्निंग सिकनेस’ या फिर अत्यधिक मानसिक तनाव—ये सभी जी मिचलाने के मुख्य ट्रिगर्स होते हैं।

जब पेट का तंत्रिका तंत्र मस्तिष्क के ‘वोमिटिंग सेंटर’ (Chemoreceptor Trigger Zone) को विपरीत संकेत भेजता है, तो पेट की मांसपेशियां उल्टी दिशा में सिकुड़ने लगती हैं। अगर आपको भी ऐसा असहज महसूस हो रहा है, तो तुरंत तेज एलोपैथिक दवाओं के पीछे भागने के बजाय रसोई में मौजूद प्राकृतिक तत्वों और एक्यूप्रेशर तकनीकों की मदद से इसे मिनटों में शांत किया जा सकता है।

गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट और आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार अदरक (Ginger) जी मिचलाने की सबसे सटीक प्राकृतिक औषधि है।

  • जिंजरोल का जैविक प्रभाव: अदरक में ‘जिंजरोल’ (Gingerol) और ‘शोगिओल’ (Shogaol) नामक शक्तिशाली बायोएक्टिव कंपाउंड्स पाए जाते हैं। ये तत्व आंतों के संकुचन को सामान्य करते हैं और पेट के भीतर बनने वाले एसिड को तेजी से न्यूट्रलाइज करते हैं।

  • इस्तेमाल का तरीका: ताजे अदरक के एक छोटे टुकड़े पर चुटकी भर सेंधा नमक और नींबू का रस लगाकर धीरे-धीरे चूसें। यदि कच्चा अदरक खाना तीखा लगे, तो एक कप पानी में घिसा हुआ अदरक उबालकर, हल्का गुनगुना कर घूंट-घूंट पिएं। सफर शुरू करने से 30 मिनट पहले अदरक की चाय पीने से मोशन सिकनेस की समस्या बिल्कुल नहीं होती।

नींबू में मौजूद प्राकृतिक साइट्रिक एसिड और क्षारीय प्रभाव पेट की बेचैनी को सेकंडों में दूर भगाने में सक्षम हैं।

  • एसिड न्यूट्रलाइजेशन: जब पेट में अत्यधिक पित्त या गैस्ट्रिक जूस बढ़ जाता है, तो जी मिचलाने लगता है। नींबू का रस पेट के पीएच स्तर को संतुलित करने में मदद करता है और इसके खट्टे स्वाद से मुंह का कड़वापन तुरंत दूर हो जाता है।

  • इस्तेमाल का तरीका: एक ताजे नींबू को बीच से काटें, उस पर थोड़ा सा काला नमक और भुना हुआ जीरा पाउडर छिड़कें। इसे तवे पर 10-15 सेकंड हल्का गर्म करें और फिर धीरे-धीरे चाटें। इसके अलावा, यदि केवल एक ताजे नींबू के छिलके को सूंघ भी लिया जाए, तो इसकी तेज साइट्रस सुगंध मस्तिष्क के नॉजिया रिसेप्टर्स को तुरंत शांत कर देती है।

बिना कुछ खाए-पिए यदि आप तुरंत राहत चाहते हैं, तो एक्यूप्रेशर की ‘P6’ तकनीक सबसे असरदार और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तरीका है।

  • कलाई पर स्थित है जादुई बिंदु: अपनी कलाई के भीतरी हिस्से पर हथेली के ठीक नीचे अपनी तीन उंगलियां (तर्जनी, मध्यमा और अनामिका) रखें। तीसरी उंगली के ठीक नीचे, कलाई की दो मुख्य नसों (Tendons) के बीच का जो गड्ढा होता है, उसे ‘पेरिकार्डियम 6’ (P6) पॉइंट कहा जाता है।

  • दबाव देने की तकनीक: अपने दूसरे हाथ के अंगूठे से इस बिंदु पर मध्यम से तेज दबाव डालें और 2 से 3 मिनट तक गोलाकार (Circular Motion) दिशा में मालिश करें। इसके बाद यही प्रक्रिया दूसरी कलाई पर दोहराएं। यह दबाव तंत्रिका तंत्र के जरिए मस्तिष्क को उल्टी का वेग रोकने का सीधा सिग्नल भेजता है।

पुदीना (Peppermint) अपने कूलिंग और एंटी-स्पास्मोडिक (ऐंठन-रोधी) गुणों के लिए जाना जाता है।

  • मांसपेशियों को आराम: पुदीने में मौजूद मेन्थॉल पेट और इसोफेगस (भोजन नली) की ऐंठन को शांत करता है, जिससे खाना वापस ऊपर की ओर नहीं चढ़ता।

  • इस्तेमाल का तरीका: 4-5 ताजी पुदीने की पत्तियों को धोकर सीधे चबाएं या पुदीने का अर्क/चाय पिएं। यदि आप किसी बंद कमरे या गाड़ी में हैं, तो तुरंत खुली खिड़की के पास जाएं। खुली ताजी हवा में बैठकर 4 सेकंड तक नाक से गहरी सांस लें और 6 सेकंड तक मुंह से धीरे-धीरे सांस छोड़ें (4-7-8 तकनीक)। यह शरीर के पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय कर उल्टी के अहसास को शांत कर देता है।

भारतीय रसोई का यह पारंपरिक नुस्खा बदहजमी और गैस के कारण होने वाले जी मिचलाने में तुरंत आराम पहुंचाता है।

  • एंटी-एमेटिक गुण: लौंग में ‘यूजेनॉल’ (Eugenol) नामक तत्व होता है, जिसमें प्राकृतिक एनेस्थेटिक और एंटी-एमेटिक (उल्टी रोकने वाले) गुण होते हैं। सौंफ पेट की गर्मी को शांत करती है।

  • इस्तेमाल का तरीका: एक लौंग और आधा चम्मच सौंफ को मुंह में रखकर धीरे-धीरे चबाएं और उसका रस निगलते रहें। यदि बार-बार खट्टी डकारें आ रही हैं, तो एक चम्मच सौंफ और एक लौंग को पानी में उबालकर ठंडा करके पिएं। यह गैस्ट्रिक जलन को शांत कर पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है।

  • तुरंत बिस्तर पर सीधा न लेटें: उल्टी जैसा लगने पर सपाट लेटने से पेट का एसिड सीधे भोजन नली में आ जाता है। हमेशा सिर को तकिए के सहारे 45 डिग्री ऊंचा रखकर अर्ध-बैठी मुद्रा में आराम करें।

  • एक साथ ज्यादा पानी न पिएं: पेट में भारीपन होने पर एक साथ पूरा गिलास पानी पीने से उल्टी तुरंत ट्रिगर हो सकती है। हमेशा चम्मच या छोटे घूंट (Sips) में ही पानी या ओआरएस (ORS) पिएं।

  • भारी और मीठे खाद्य पदार्थों से परहेज: जब तक पेट पूरी तरह सामान्य न हो जाए, दूध, पनीर, तली हुई चीजें और अत्यधिक मीठी मिठाइयों से पूरी तरह दूर रहें। पेट हल्का होने पर ही उबले चावल, टोस्ट या केला (BRAT Diet) जैसी सुपाच्य चीजें खाएं।

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