Mauganj:बिजली विभाग की बदहाल व्यवस्था से त्रस्त मऊगंज

Mauganj: बिजली विभाग की बदहाल व्यवस्था से त्रस्त मऊगंज, डीई सुशांत सोनल के कार्यकाल पर उठ रहे सवाल

मऊगंज। भीषण गर्मी के बीच मऊगंज में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। हालात ऐसे हैं कि हल्की बूंदाबांदी और मामूली हवा के बाद भी कई इलाकों में घंटों नहीं, बल्कि एक-एक से दो-दो दिन तक बिजली गुल रहना आम बात हो गई है। इससे आम जनता को गर्मी के साथ-साथ पानी संकट का भी सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब से बिजली विभाग की कमान डीई सुशांत सोनल के हाथों में आई है, तब से व्यवस्थाएं सुधरने के बजाय और बदहाल होती दिखाई दे रही हैं। सवाल उठ रहे हैं कि हर साल बिजली सुधार और मेंटेनेंस के नाम पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपये आखिर कहां जा रहे हैं?

अगर वास्तव में लाइन मेंटेनेंस, ट्रांसफार्मर अपग्रेडेशन और फॉल्ट सुधार के काम नियमित रूप से हुए होते, तो मामूली बारिश में पूरा सिस्टम इस तरह दम नहीं तोड़ता। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बिजली विभाग का नेटवर्क पहली बूंद गिरते ही घुटने टेक देता है।

बिजली गई तो पानी भी गया

मऊगंज में बिजली संकट सिर्फ अंधेरे तक सीमित नहीं है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मोटर पंप बंद होने से पानी सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। मई की भीषण गर्मी में लोग बिजली और पानी—दोनों के लिए परेशान हैं। घरों में पंखे बंद, कूलर बंद और टंकियां सूखी पड़ी हैं।

जनता का कहना है कि “बिजली विभाग मानो शिकायत सुनने के लिए नहीं, सिर्फ बिल वसूली के लिए सक्रिय है।” फॉल्ट की शिकायत करने पर न तो समय पर रिस्पॉन्स मिलता है और न ही स्पष्ट जवाब।

धरनावीर भी मौन, विपक्ष भी गायब

सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि हर छोटे-बड़े मुद्दे पर सक्रिय दिखने वाले स्थानीय “धरनावीर” भी इस गंभीर जनसमस्या पर चुप्पी साधे हुए हैं। धरना देना तो दूर, खुलकर बयान देने तक से बचते नजर आ रहे हैं।

वहीं विपक्ष भी जनता के इस मूलभूत मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने के बजाय गैरजरूरी राजनीतिक विषयों में उलझा हुआ दिखाई दे रहा है। ऐसे में आम लोगों को लगने लगा है कि उनकी समस्या न सत्ता की प्राथमिकता है और न विपक्ष की।

मनमानी पर उतरा विभाग?

लगातार बढ़ती शिकायतों के बीच बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का आरोप है कि विभाग में जवाबदेही लगभग खत्म हो चुकी है। न समय पर मरम्मत, न वैकल्पिक व्यवस्था और न ही जनता को कोई ठोस जानकारी।

जनता पूछ रही है कि अगर हर साल मेंटेनेंस और सुधार के नाम पर बजट खर्च हो रहा है, तो फिर सिस्टम इतना कमजोर क्यों है? आखिर कब तक मऊगंज की जनता हर बारिश और हर गर्मी में यही दुश्वारियां झेलती रहेगी?


कुल मिलाकर, मऊगंज में बिजली विभाग की हालत ऐसी हो चुकी है कि जनता के सब्र का ट्रांसफॉर्मर भी अब ओवरलोड होने लगा है। अब देखने वाली बात होगी कि जिम्मेदार अधिकारी इस नाराजगी को गंभीरता से लेते हैं या फिर अगली बारिश तक सब कुछ यूं ही चलता रहेगा।

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