
भारतीय उपमहाद्वीप से दक्षिण-पश्चिम मानसून की औपचारिक विदाई का समय करीब आते ही मौसम के मिजाज में अचानक नाटकीय बदलाव देखने को मिल रहा है। सामान्य तौर पर सितंबर के दूसरे पखवाड़े में उत्तर-पश्चिम भारत से मानसूनी हवाएं लौटने लगती हैं, लेकिन इस बार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) और पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता ने जाते-जाते मानसूनी बादलों को एक बार फिर से रिचार्ज कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम बुलेटिन के अनुसार, देश के उत्तरी, पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में अगले 48 से 72 घंटों के दौरान रुक-रुक कर भारी से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और नोएडा-गाजियाबाद से लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, बिहार के मैदानी इलाकों और असम की ब्रह्मपुत्र घाटी तक आसमान में घने काले बादलों का डेरा बना हुआ है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यह बारिश मानसून की विदाई से पहले का अंतिम बड़ा स्पेल साबित हो सकती है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी लेकिन कुछ राज्यों में जलभराव और आकाशीय बिजली का खतरा भी बना रहेगा।
देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR)—नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद—में पिछले कुछ दिनों से तेज धूप और 80 प्रतिशत से अधिक की चिपचिपी उमस ने आम जनजीवन को बेहाल कर रखा था। लेकिन मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान ने दिल्लीवासियों को बड़ी राहत दी है। आईएमडी के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में आज आंशिक से लेकर सामान्य रूप से बादल छाए रहेंगे और दोपहर से शाम के बीच कई इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का भी अनुमान है। सफदरजंग मौसम केंद्र पर आज अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान जताया गया है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली से मानसून की आधिकारिक वापसी इस बार थोड़ी देर से यानी 21 सितंबर के आसपास शुरू हो सकती है। ऐसे में अगले दो दिनों तक रुक-रुक कर होने वाली यह बूंदाबांदी राजधानी की वायु गुणवत्ता (AQI) को ‘संतोषजनक’ श्रेणी में बनाए रखेगी और तापमान को भी नियंत्रित रखेगी।
उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नम पुरवैया हवाओं के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में कन्वेक्टिव क्लाउड (गरज वाले बादल) तेजी से बन रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश: लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, सुल्तानपुर, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, गोरखपुर, देवरिया, बस्ती और बहराइच समेत तराई पट्टी के जिलों में आज मेघगर्जन के साथ मध्यम बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पश्चिमी यूपी के मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, आगरा और अलीगढ़ में छिटपुट बौछारें पड़ने की उम्मीद है। विभाग ने विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में आकाशीय बिजली (Lightning Strike) गिरने की आशंका जताई है, जिसे देखते हुए खेतों में काम करने वाले किसानों को खुले में न रहने की सलाह दी गई है।
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बिहार: पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज में मानसून पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। उत्तर बिहार के जिलों में नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही बारिश के चलते नदियों के जलस्तर में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। बिहार के अधिकांश हिस्सों में अगले दो दिनों तक रुक-रुक कर झमाझम बारिश और बिजली चमकने का पूर्वानुमान है।
पूर्वोत्तर भारत में मानसून का रुख सबसे ज्यादा आक्रामक बना हुआ है। मौसम विभाग ने असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। असम के कामरूप, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, धेमाजी, लखीमपुर और बारपेटा जिलों में पिछले 24 घंटों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ी इलाकों में भारी वर्षा के चलते ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में एक बार फिर बाढ़ और भूस्खलन (Landslide) का खतरा मंडराने लगा है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) और एनडीआरएफ की टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। गुवाहाटी और आसपास के इलाकों में तेज हवाओं और लगातार हो रही बारिश से दृश्यता (Visibility) कम हो गई है, जिससे पहाड़ी सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग का कहना है कि पूर्वोत्तर के राज्यों में कम से कम 18 सितंबर तक इस भारी मानसूनी बारिश से राहत मिलने के आसार नहीं हैं।
मध्य और पश्चिम भारत के मौसम में इस समय दिलचस्प विरोधाभास देखने को मिल रहा है:
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राजस्थान: पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर के इलाकों में बारिश का दौर लगभग थम चुका है और वहां उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाएं चलना शुरू हो गई हैं। आईएमडी के संकेत के अनुसार, राजस्थान के पश्चिमी छोर से मानसून की आधिकारिक वापसी (Monsoon Withdrawal Line) की प्रक्रिया कभी भी शुरू हो सकती है। हालांकि, पूर्वी राजस्थान के जयपुर, कोटा, उदयपुर और भरतपुर संभाग में आज भी गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है।
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मध्य प्रदेश: भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में बादलों की आवाजाही जारी रहेगी। राज्य के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों (रीवा, शहडोल, छिंदवाड़ा) में स्थानीय चक्रवाती परिसंचरण के कारण मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है।
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गुजरात और महाराष्ट्र: सौराष्ट्र और कच्छ के तटीय इलाकों में समुद्री दबाव के चलते रुक-रुक कर बौछारें पड़ने का अनुमान है, जबकि मुंबई और कोंकण क्षेत्र में हल्की बूंदाबांदी के साथ उमस भरा मौसम रहेगा।
मानसून के इस अंतिम दौर में हो रही बारिश जहां खरीफ की देर से बोई गई धान की फसलों के लिए अमृत समान है, वहीं पक चुकी फसलों और तिलहन-दलहन के लिए चिंता का सबब भी बन सकती है। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने आम नागरिकों और किसानों के लिए निम्नलिखित जीवनरक्षक सुरक्षा टिप्स जारी किए हैं:
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आकाशीय बिजली से बचाव: बारिश या बादलों की गड़गड़ाहट के समय किसी भी हाल में ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों, मोबाइल टावरों या धातु की टिन शेड के नीचे शरण न लें। कंक्रीट की मजबूत इमारत के भीतर ही रहें।
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दामिनी ऐप (Damini App) का उपयोग: आकाशीय बिजली की सटीक और अग्रिम चेतावनी पाने के लिए अपने मोबाइल में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का ‘दामिनी’ ऐप जरूर डाउनलोड रखें, जो 20 किलोमीटर के दायरे में बिजली गिरने का 15 मिनट पहले अलर्ट देता है।
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कटी फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखें: जिन किसानों की मक्का, बाजरा, उड़द या मूंग की फसल कट चुकी है, वे खलिहान में पड़ी फसल को तिरपाल से अच्छी तरह ढककर रखें या सुरक्षित गोदामों में पहुंचाएं ताकि अनाज में फफूंद न लगे।
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धान के खेतों में जल-निकासी: जहां धान की फसल अभी गभोट या बाली निकलने की अवस्था में है, वहां जलभराव की स्थिति पर नजर रखें और अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था दुरुस्त रखें।
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सड़क यात्रा और जलभराव: शहरों में अंडरपास, जलभराव वाले रास्तों और खुले मेनहोल से दूर रहें। दोपहिया वाहन चालक तेज हवाओं और भारी बारिश के दौरान वाहन चलाने से बचें।
मानसून की यह अंतिम बारिश भले ही जाते-जाते कुछ इलाकों में चुनौतियां पेश कर रही हो, लेकिन भूमिगत जलस्तर को रीचार्ज करने और आने वाली रबी फसलों (खासकर गेहूं और सरसों) के लिए खेतों में पर्याप्त नमी छोड़ने के लिहाज से यह बेहद लाभकारी साबित होगी।









