
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा संकट और आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल के बीच सरकार द्वारा लगाए गए तथाकथित ‘स्मार्ट लॉकडाउन’ ने पूरी दुनिया में चर्चा छेड़ दी है। देश के प्रमुख शहरों लाहौर, कराची, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में ईंधन की भारी किल्लत और बिजली संकट से निपटने के नाम पर लगाए गए इन प्रतिबंधों पर सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा और व्यंग्य एक साथ फूट पड़ा है। एक्स (पूर्व में ट्विटर), इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे डिजिटल मंचों पर पाकिस्तानी अवाम के साथ-साथ दुनिया भर के नेटिजन्स शहबाज शरीफ सरकार और सेना के करीबी माने जाने वाले सेलिब्रिटीज की जमकर क्लास लगा रहे हैं। विशेष रूप से पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी को लेकर सोशल मीडिया पर चुटकुलों और मीम्स की ऐसी सुनामी आई है, जिसने सीमा पार के संकट को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
सोशल मीडिया पर सबसे तीखा तंज पूर्व पाकिस्तानी कप्तान शाहिद अफरीदी पर कसा जा रहा है। दरअसल, अफरीदी अक्सर पाकिस्तान की सत्ताधारी व्यवस्था और सेना के सुर में सुर मिलाते हुए भारत विरोधी बयानबाजी और कश्मीर को लेकर भड़काऊ रैलियों या प्रचार अभियानों में सक्रिय नजर आते रहे हैं। यूजर्स ने अफरीदी के पुराने वीडियो और बयानों को शेयर करते हुए लिखना शुरू कर दिया कि ‘अब अफरीदी साहब के पास भारत के खिलाफ फर्जी रैलियां निकालने और कश्मीर के नाम पर गाड़ियों का काफिला दौड़ाने के लिए फ्यूल ही नहीं बचा है, इसलिए मुल्क में स्मार्ट लॉकडाउन लगाना पड़ गया।’ कई यूजर्स ने उन पर तंज कसते हुए कहा कि जिस देश के पास अपने अस्पतालों और एंबुलेंस को चलाने के लिए डीजल नहीं है, वहां के पूर्व खिलाड़ी दिन-रात बड़े-बड़े मंचों से खोखली देशभक्ति का ढोल पीटते हैं। अफरीदी की तस्वीरों को खाली पेट्रोल पंपों और साइकिल की सवारी के साथ एडिट करके सोशल मीडिया पर लगातार साझा किया जा रहा है।
पाकिस्तानी हुकूमत ने सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि यह लॉकडाउन प्रदूषण नियंत्रण और यातायात प्रबंधन के लिए उठाया गया एक सुनियोजित प्रशासनिक कदम है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक और खुद पाकिस्तान की आम जनता इस दावे की धज्जियां उड़ा रही है। जमीनी हकीकत यह है कि विदेशी मुद्रा भंडार के रसातल में चले जाने के बाद पाकिस्तान के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करने के लिए डॉलर नहीं बचे हैं। पेट्रोलियम की कमी के चलते देश के थर्मल पावर प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे हैं, जिससे पूरे देश में 12 से 16 घंटे की भीषण लोड शेडिंग हो रही है। इस आर्थिक विफलता और ईंधन के अकाल को छिपाने के लिए सरकार ने स्कूल, कॉलेज, बाजार और दफ्तरों को बंद करवाकर ‘स्मार्ट लॉकडाउन’ का पर्दा डाल दिया है, ताकि पेट्रोल और डीजल की दैनिक खपत को जबरन घटाया जा सके।
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के इस नए संकट को लेकर बेहद अनोखे और चुटीले मीम्स वायरल हो रहे हैं:
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पेट्रोल पंपों पर सन्नाटा: खाली पड़े फ्यूल स्टेशनों के सामने क्रिकेट बैट लेकर खड़े शाहिद अफरीदी की तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा जा रहा है, ‘रन तो बने नहीं, अब तेल भी खत्म हो गया।’
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वीआईपी काफिले बनाम गधा गाड़ी: उपयोगकर्ताओं ने मंत्रियों के लक्जरी काफिलों के स्थान पर बैलगाड़ियों और गधा गाड़ियों के एस्कॉर्ट वाले वीडियो बनाकर पोस्ट किए हैं, जिन पर कैप्शन दिया गया है—’पाकिस्तान का पर्यावरण-अनुकूल नया भविष्य।’
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आईएमएफ की शर्तें: कई मीम्स में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अधिकारियों को पाकिस्तान की चाबी थामे दिखाया गया है, जहां हर बत्ती बुझने पर आईएमएफ से लोन की नई किश्त मिलने का उपहास उड़ाया जा रहा है।
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अवाम का दर्द: कुछ भावुक और तीखे पोस्ट्स में आम नागरिकों ने लिखा कि एक तरफ अवाम आटे और बिजली के लिए कतारों में खड़ी है, वहीं नेता और अफरीदी जैसे लोग टीवी स्टूडियो में बैठकर बेतुके भाषण दे रहे हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान अपने आर्थिक कुप्रबंधन के चलते वैश्विक स्तर पर उपहास का पात्र बना हो। इससे पहले भी कभी चाय कम पीने की सरकारी सलाह, तो कभी शादी समारोहों में एक डिश और रात 8 बजे बाजार बंद कराने के आदेशों को लेकर पाकिस्तान की जग हंसाई हो चुकी है। अब स्मार्ट लॉकडाउन के नाम पर ऊर्जा संकट को दबाने की कोशिश ने सरकार की पोल खोलकर रख दी है। भारत समेत दुनिया भर के इंटरनेट यूजर्स पाकिस्तान की इस बदहाली पर टिप्पणी करते हुए लिख रहे हैं कि आतंकवाद और भारत-विरोध को अपनी राष्ट्रीय नीति बनाने वाले देश का अंततः यही हश्र होना था। विकास, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करने के बजाय जब कोई मुल्क नफरत की राजनीति करता है, तो उसके पास न तो अर्थव्यवस्था बचती है और न ही गाड़ियों को चलाने के लिए पेट्रोल।









