October 17, 2026 12:27 pm

इंडस्ट्रियल एरिया में अब नहीं बनेंगे रो-हाउस और प्लॉट, सिर्फ फ्लैट बनाने की अनुमति

भोपाल 
 राज्य सरकार (MP Govt) ने इंडस्ट्रियल एरिया (Industrial Area) में रेजिडेंशियल निर्माण और इंडस्ट्रियल जमीन (industrial land) के उपयोग को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इंडस्ट्रियल पॉलिसी एवं इन्वेस्टमेंट प्रोत्साहन विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, अब औद्योगिक क्षेत्रों में स्वतंत्र रेजिडेंशियल प्लॉट, रो-हाउस और प्लॉट आधारित रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को विकसित करने की अनुमति नहीं मिलेगी। 

केवल बहुमंजिला और ग्रुप हाउसिंग को मिलेगी मंजूरी
नए नियमों के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों के भीतर सिर्फ बहुमंजिला फ्लैट या ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स ही तैयार किए जा सकेंगे। इनमें एकल व दोहरे शयनकक्ष (सिंगल/डबल बेडरूम) वाली आवासीय इकाइयों के साथ-साथ हॉस्टल और उनसे जुड़ी सामाजिक-सामुदायिक सुविधाएं विकसित करने का प्रावधान रखा गया है। इसका सीधा उद्देश्य कम जगह में अधिक से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों के रहने की सुचारू व्यवस्था बनाना है।

पुराने निर्माण और चालू प्रोजेक्ट्स पर नहीं पड़ेगा असर
यह नियम उन जमीनों पर प्रभावी होगा जो आवासीय उपयोग के लिए आरक्षित हैं, साथ ही औद्योगिक इकाइयों को कर्मचारियों के लिए कैप्टिव आवासीय परिसरों हेतु दी जाने वाली भूमि पर भी लागू होगा। किसी भी परियोजना को शुरू करने से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति अनिवार्य होगी। निर्माण के दौरान मास्टर प्लान, भवन उपविधियों, पर्यावरण तथा अग्निशमन संबंधी सभी दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूर्व से जारी आवासीय योजनाओं और पुराने बने मकानों पर इन नए नियमों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

कलेक्टर गाइडलाइन से तय होगा जमीन का मूल्य
शासन ने औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि का मूल्य निर्धारण करने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया है। ग्रामीण व शहरी इलाकों में विकसित या विकसित होने वाले औद्योगिक क्षेत्रों की भूमि का मूल्य संबंधित क्षेत्र की असिंचित कृषि भूमि की कलेक्टर गाइडलाइन दर को 0.6 से विभाजित कर निकाला जाएगा। किसी भी परिस्थिति में जमीन की न्यूनतम कीमत 250 रुपये प्रति वर्गमीटर से कम नहीं होगी। यदि गणना में दर इससे कम आती है, तो एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक को संचालक मंडल की पूर्व अनुमति से दरें बढ़ाने का अधिकार होगा।

अतिरिक्त भूमि पर नहीं मिलेगी रियायत
निवेश के आधार पर तय सीमा से अधिक जमीन लेने पर अतिरिक्त भू-भाग पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। उदाहरण स्वरूप, यदि कोई कंपनी संयंत्र एवं मशीनरी में 200 करोड़ रुपये का निवेश करती है और उसे 25 हेक्टेयर भूमि मिलती है, तो प्रीमियम छूट का लाभ केवल 20 हेक्टेयर पर ही मिलेगा। शेष 5 हेक्टेयर पर सामान्य दरें लागू होंगी। नियमों में 40 हेक्टेयर तक भूमि आवंटन पर प्रीमियम गणना के समय 50% तक छूट का प्रावधान शामिल है।

अनुपयोगी जमीन के हस्तांतरण के कड़े नियम
यदि किसी औद्योगिक इकाई के पास आवंटित जमीन का कोई हिस्सा अनुपयोगी पड़ा है, तो उसे शर्तों के अधीन पृथक कर स्थानांतरित किया जा सकेगा। इसके लिए अनुपयोगी हिस्सा कुल आवंटित भूमि का अधिकतम 50% या कम से कम 5,000 वर्गमीटर होना चाहिए, जहां स्वतंत्र पहुंच मार्ग की उपलब्धता अनिवार्य है। हस्तांतरण से पूर्व आवंटी को भू-भाटक, संधारण शुल्क सहित सभी बकायों का भुगतान करना होगा तथा विधिक समर्पण दस्तावेज पंजीकृत कराने होंगे।

अधिकारियों के प्रशासनिक अधिकार तय
प्रशासनिक पारदर्शी व्यवस्था हेतु भूमि और भवनों के आवंटन के अधिकार क्षेत्र भी निर्धारित कर दिए गए हैं। औद्योगिक भवनों के आवंटन का अधिकार क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक को सौंपा गया है। आवासीय तथा व्यावसायिक भूमि आवंटन में क्षेत्रीय कार्यकारी संचालक 10,000 वर्गमीटर तक की सीमा तक फैसला ले सकेंगे, जबकि इससे अधिक भूमि के आवंटन का निर्णय प्रबंध संचालक के स्तर से होगा। इसके अतिरिक्त, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर भी औद्योगिक आवास योजनाएं शुरू करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है।

इसके अलावा आवासीय भूखंडों का उप-विभाजन भी प्रतिबंधित रहेगा।

सिर्फ फ्लैट और हाइराइज बिल्डिंग्स को मंजूरी
नई व्यवस्था के तहत इंडस्ट्रियल एरिया में केवल फ्लैट आधारित और हाइराइज रेजिडेंशियल बिल्डिंगस विकसित की जा सकेंगी। 

इनमें एक और दो बेडरूम वाले फ्लैट के साथ छात्रावास और जरूरी सामाजिक सुविधाओं के निर्माण का प्रावधान किया गया है।

पुराने रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए नियम सिर्फ भविष्य में शुरू होने वाले प्रोजेक्ट्स पर लागू होंगे। 

पहले से संचालित रेजिडेंशियल स्कीम और अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

निर्माण से पहले अधिकारी की मंजूरी जरूरी
नए दिशा-निर्देश नोटिफाइड रेजिडेंशियल लेंड के साथ इंडस्ट्रियल यूनिट्स को आवंटित जमीन पर कर्मचारियों के लिए विकसित की जाने वाली कैप्टिव रेजिडेंशियल सुविधाओं पर भी लागू होंगे। 

प्रत्येक परियोजना के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा निर्माण कार्यों में मास्टर प्लान, विकास योजना, भवन निर्माण नियमों, भूमि आवंटन की शर्तों, अग्नि सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी मानकों का पालन करना होगा।

जमीन की कीमत ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम नहीं
सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि के मूल्य निर्धारण का आधार भी तय किया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकसित या विकसित किए जाने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन का मूल्य संबंधित क्षेत्र की असिंचित कृषि भूमि के लिए निर्धारित कलेक्टर गाइडलाइन को 0.6 से भाग देकर निकाला जाएगा।

हालांकि, किसी भी स्थिति में भूमि का मूल्य ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम नहीं होगा।
यदि औद्योगिक क्षेत्र में तय गणना के आधार पर भूमि का मूल्य ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम आता है, तो एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक को संचालक मंडल की अनुमति से मूल्य बढ़ाने का अधिकार होगा।

अतिरिक्त क्षेत्रफल पर कोई छूट नहीं
निर्धारित निवेश सीमा से अधिक भूमि के लिए आवेदन करने पर अतिरिक्त क्षेत्रफल पर छूट नहीं मिलेगी। उदाहरण के लिए, यदि कोई इकाई संयंत्र और मशीनरी में ₹200 करोड़ का निवेश करती है और उसे 25 हेक्टेयर जमीन आवंटित होती है, तो 20 हेक्टेयर पर ही छूट मिलेगी। बाकी 5 हेक्टेयर पर छूट लागू नहीं होगी।

नियमों में प्रीमियम की गणना के दौरान 40 हेक्टेयर तक भूमि आवंटन पर भूमि के मूल्य में 50% छूट का भी उल्लेख है। अन्य औद्योगिक प्रयोजनों के लिए प्रीमियम की गणना में भी भूमि के मूल्य पर 50% छूट का प्रावधान दिया गया है।

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