September 27, 2026 9:02 pm

खाड़ी देशों की सुरक्षा को हल्के में ना लें’ UNGA के मंच से सऊदी विदेश मंत्री की दुनिया को चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान वैश्विक कूटनीति के मंच से सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने दुनिया को बेहद कड़े शब्दों में एक बड़ी चेतावनी जारी की है। सऊदी मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि खाड़ी देशों की क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को अब बिल्कुल भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। अपने इस भाषण के दौरान उन्होंने यमन के हूती विद्रोहियों की आक्रामक गतिविधियों और ईरान की क्षेत्रीय नीतियों का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिससे मिडिल ईस्ट की भू-राजनीतिक स्थिति पर एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान केंद्रित हो गया है। वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले खाड़ी क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच सऊदी अरब का यह तीखा रुख अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।

संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित मंच से जब सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने अपना संबोधन शुरू किया, तो उनका मुख्य फोकस मिडिल ईस्ट की सुरक्षा वास्तुकला पर था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया कि खाड़ी क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक मुख्य केंद्र है और इस क्षेत्र की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की सेंध या लापरवाही वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी संकट में डाल सकती है। सऊदी मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि कुछ बाहरी ताकतें और क्षेत्रीय मिलिशिया समूह लगातार इस क्षेत्र की शांति को भंग करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे अब और अधिक सहन नहीं किया जाएगा। इस संबोधन के माध्यम से रियाद ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

अपने संबोधन के दौरान सऊदी विदेश मंत्री ने यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर किए जाने वाले ये दुस्साहसिक हमले न केवल सऊदी अरब की शांति को खतरे में डालते हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के समुद्री व्यापार और सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा हैं। यद्यपि पिछले कुछ समय से यमन में संघर्ष विराम और शांति वार्ताओं को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन हूती गुटों की तरफ से जारी आक्रामक हरकतें इस पूरी प्रक्रिया पर पानी फेर रही हैं। सऊदी अरब ने स्पष्ट किया कि जब तक क्षेत्र में आतंकवाद और सशस्त्र मिलिशिया का प्रभाव समाप्त नहीं होता, तब तक स्थायी शांति स्थापित करना बेहद कठिन होगा।

सऊदी विदेश मंत्री के इस भाषण का सबसे अहम हिस्सा ईरान से जुड़े कूटनीतिक संकेत रहे। उन्होंने तेहरान पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान को अपनी पड़ोसी देशों के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी बंद करनी होगी और प्रॉक्सी युद्धों के जरिए क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने की नीति को छोड़ना होगा। हालांकि पिछले कुछ महीनों में चीन की मध्यस्थता से सऊदी अरब और ईरान के बीच राजनयिक संबंधों को बहाल करने के लिए कुछ समझौते जरूर हुए थे, लेकिन ज़मीनी स्तर पर सुरक्षा चिंताओं को लेकर रियाद अब भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। सऊदी अरब ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से यह भी अपेक्षा जताई है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रमों और उसकी विस्तारवादी नीतियों पर कड़ी नजर रखे, ताकि मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बना रहे और कोई नया बड़ा युद्ध न भड़के।

खाड़ी देशों की सुरक्षा का मुद्दा केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ा हुआ है। सऊदी विदेश मंत्री ने दुनिया को आगाह किया कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स चेन पर पड़ेगा। दुनिया के कई देश पहले से ही महंगाई और आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहे हैं, ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में अशांति वैश्विक रिकवरी की रफ्तार को पूरी तरह से पटरी से उतार सकती है। रियाद ने दुनिया भर के तमाम बड़े देशों से अपील की है कि वे इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक दबाव बढ़ाएं और खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से लें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!