September 19, 2026 9:43 pm

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चरखी दादरी को सूखाग्रस्त घोषित करने की उठी मांग: किसानों ने 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की लगाई गुहार

हरियाणा के दक्षिणी-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित चरखी दादरी जिले में मानसून की बेरुखी और सिंचाई संकट के कारण खेती-किसानी गंभीर मुहाने पर पहुंच गई है। जिले भर में फसलों के सूखने और किसानों की बढ़ती समस्याओं को लेकर शनिवार को अखिल भारतीय किसान सभा की जिला कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। दादरी शहर के प्रमुख केंद्र सोनी धर्मशाला के पास आयोजित इस विशाल सभा में सैकड़ों अन्नदाताओं ने हिस्सा लेकर अपनी बेबसी और आक्रोश को व्यक्त किया। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार से मांग की गई कि चरखी दादरी जिले को अविलंब सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल विशेष गिरदावरी करवाकर प्रति एकड़ 50 हजार रुपये का सीधा मुआवजा घोषित नहीं किया, तो ग्रामीण अंचल में व्यापक जनआंदोलन की शुरुआत की जाएगी।

बैठक की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ किसान नेता बिजेंद्र सांगवान और संचालन कर रहे जिला कमेटी प्रधान रणधीर कुंगड़ ने किसानों की दयनीय स्थिति का विस्तृत ब्योरा सामने रखा। उन्होंने कहा कि बारिश की भारी कमी के कारण खरीफ की फसलें खेतों में ही जलकर खाक हो चुकी हैं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत और लागत डूब चुकी है। किसान सभा ने प्रशासन से मांग की कि सरकार अपनी ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को तुरंत प्रभाव से खोले ताकि प्रभावित किसान अपनी खराब फसलों का सही और पारदर्शी ब्योरा दर्ज करा सकें। इसके साथ ही क्षेत्र की सभी प्रमुख नहरों और डिस्ट्रीब्यूटरी में पूरी क्षमता के साथ टेल तक पानी छोड़ने की मांग की गई, ताकि आगामी फसलों की बुआई के साथ-साथ गांवों में गहराते गंभीर पेयजल संकट से भी आम जनता और मवेशियों को बचाया जा सके।

किसान नेताओं ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ी निजी बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। सभा में मांग उठाई गई कि बीमा कंपनियां आगामी एक सप्ताह के भीतर हर हाल में सभी प्रभावित गांवों में क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट का काम पूरा करें। किसानों ने कृषि अधिकारियों को चेताया कि अगली रबी फसल की तैयारी का समय नजदीक आ चुका है और किसानों को अपनी खराब हो चुकी फसल को खेतों से हटाना मजबूरी बन गया है। ऐसे में यदि समय पर क्रॉप कटिंग नहीं हुई, तो किसानों को उनके वाजिब बीमा क्लेम से वंचित रहना पड़ सकता है। कृषि विभाग को निर्देश दिए जाएं कि वह पर्याप्त तकनीकी स्टाफ की तैनाती करे और बीमा कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही निष्पक्ष रूप से क्रॉप कटिंग करवाकर प्रत्येक किसान को उसकी हस्ताक्षरित रसीद मौके पर ही मुहैया कराए।

राज्य कमेटी के फैसलों की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए भिवानी जिला कमेटी के उपाध्यक्ष कॉमरेड ओमप्रकाश ने किसानों को आगामी संघर्ष के लिए लामबंद होने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि आगामी 26 नवंबर को ऐतिहासिक किसान आंदोलन की छठी वर्षगांठ के रूप में मनाया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर किसान-मजदूर आंदोलन को एक बार फिर से पूरी ताकत और संगठित शक्ति के साथ शुरू किया जाएगा। किसान सभा ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी और संवैधानिक गारंटी देने, बिजली क्षेत्र के निजीकरण पर पूरी तरह रोक लगाने, प्रस्तावित बीज विधेयक को वापस लेने, अन्नदाताओं के सभी कृषि ऋणों की संपूर्ण माफी तथा प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए पूरे बीमा क्लेम की अदायगी की पुरानी मांगों को दोहराया।

सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन पर अपनी मांगों को लेकर निर्णायक दबाव बनाने के लिए किसान सभा ने रणनीति बनाई है। संगठन के नेताओं ने फैसला लिया कि दादरी जिले के हर गांव और ढाणी में किसानों की बैठकों का दौर शुरू किया जाएगा और जमीनी स्तर पर किसान सभा की इकाइयों को मजबूत किया जाएगा। जब तक सरकार दादरी को सूखा क्षेत्र घोषित कर मुआवजा जारी नहीं करती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। इस महत्वपूर्ण बैठक में किसान सभा के जिला सचिव नरेंद्र फोगाट, वरिष्ठ उप प्रधान अनोखी देवी, उप प्रधान मास्टर महावीर रानीला, फतेह सिंह चिड़िया, ओमप्रकाश खोरड़ा, जिला कोषाध्यक्ष सुरेंद्र मोठसरा और जिला कमेटी सदस्य ओम नंबरदार सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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