August 13, 2026 7:55 pm

जब 8 फीट की दूरी से चला दी थी गोली, अब कृपाण से हमला, दूसरी बार बाल-बाल बचे पूर्व डिप्टी CM; जानिए क्यों निशाने पर हैं सुखबीर सिंह बादल?

पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल एक बार फिर सुरक्षा चिंताओं को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित तख्त श्री हजूर साहिब में दर्शन के दौरान उन पर हमला हुआ। आपको बता दें, करीब दो साल पहले अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के बाहर भी उन पर जानलेवा हमला हो चुका है। पंजाब की राजनीति के सबसे प्रभावी चेहरों में शुमार सुखबीर सिंह बादल का करियर जितना राजनीतिक उपलब्धियों से भरा रहा है, उतना ही गंभीर विवादों और अकाल तख्त द्वारा मिली धार्मिक सजाओं से भी घिरा रहा है। आइए नजर डालते हैं उन प्रमुख विवादों और हमलों पर, जिन्होंने पंजाब के सियासी और सामाजिक माहौल को प्रभावित किया।

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को माफी का विवाद 

साल 2007 में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर सिख धर्म के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का स्वांग रचने का गंभीर आरोप लगा था। बाद में अकाली दल सरकार के हस्तक्षेप से अकाल तख्त द्वारा उसे माफी दे दी गई। सुखबीर बादल पर चुनावी लाभ के लिए इस माफी में मुख्य भूमिका निभाने और SGPC के कोष का उपयोग कर राम रहीम के समर्थन में विज्ञापन जारी करवाने के आरोप लगे। लंबे समय बाद, साल 2024 में सुखबीर ने अकाल तख्त के समक्ष पेश होकर अपनी इस भूमिका को स्वीकार किया।

बड़गड़ी बेअदबी कांड और पुलिस फायरिंग 

साल  2015 का बड़गड़ी बेअदबी कांड पंजाब के इतिहास के सबसे संवेदनशील मामलों में से एक है। जून 2015 में बुरज जवाहर सिंह वाला से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप चोरी हुआ, जिसके बाद विवादित पोस्टर लगाए गए और अक्टूबर में बड़गड़ी में पावन अंग बिखरे मिले। इसके विरोध में जारी शांतिपूर्ण  प्रदर्शनों के दौरान 14 अक्टूबर 2015 को बेहबल कलां और कोटकपूरा में पुलिस फायरिंग हुई, जिसमें दो सिख युवकों की मौत हो गई। उस समय सुखबीर सिंह बादल राज्य के गृह मंत्री थे। उन पर जांच में ढिलाई बरतने और दोषियों को बचाने के आरोप लगे, जिसको लेकर SIT ने 2026 तक उनसे कई बार पूछताछ की।

विवादित पुलिस अधिकारियों को संरक्षण देने के आरोप

सुखबीर बादल पर सिख समुदाय की भावनाओं के विपरीत जाकर कई विवादित अधिकारियों को बढ़ावा देने का आरोप भी लगा। 1990 के दशक में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से घिरे सैनी को पंजाब का DGP बनाया गया। वहीं विवादित ‘आलम सेना’ से जुड़े पूर्व IPS इजहार आलम की पत्नी फरजाना आलम को अकाली दल से टिकट देकर मंत्री पद का दर्जा दिया गया।

‘तनखैया’ घोषित और स्वर्ण मंदिर के बाहर जानलेवा हमला 

2007 से 2017 के शासनकाल की भूलों के चलते अकाल तख्त ने अगस्त 2024 में सुखबीर बादल को ‘तनखैया’ घोषित किया। दिसंबर 2024 में उन्हें गले में तख्ती लटकाकर स्वर्ण मंदिर के बाहर सेवादार के रूप में पहरा देने, जूते साफ करने और बर्तन धोने की सजा दी गई। वहीं 4 दिसंबर 2024 को जब वे स्वर्ण मंदिर के बाहर सेवा दे रहे थे, तब नारायण सिंह चौरा नामक व्यक्ति ने उन पर गोली चलाई। सुरक्षाकर्मियों की मुस्तैदी से वे बाल-बाल बचे। 2025 में समन की अनदेखी करने पर तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब ने भी उन्हें ‘तनखैया’ घोषित किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!