August 31, 2026 8:42 pm

BREAKING NEWS

TIN पोर्टल खनिज संसाधनों को जनजातीय आजीविका से जोड़ने वाली ‘मिनरल-टू-लाइवलीहुड’ पहल : मुख्यमंत्री श्री साय विशेष लेख : महतारी के आशीष से, राखी के विश्वास से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर पहल जशपुर में आधुनिक फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण के लिए 5.49 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति खनिज उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा छत्तीसगढ़, अन्वेषण से एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक विकसित होगी पूरी वैल्यू चेन – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया ‘ई-रेत संगवारी’ पोर्टल का शुभारंभ जशपुर में बनेगा फुटबॉल स्टेडियम, राज्य शासन ने मंजूर किए 5.49 करोड़

तालाब बना आत्मनिर्भरता का आधार, वैज्ञानिक मत्स्य पालन से कामिनी की आय में हुआ इजाफा

रायपुर, 31 अगस्त 2026

मेहनत, सही तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन का साथ मिले तो सीमित संसाधनों से भी बेहतर आमदनी का रास्ता तैयार किया जा सकता है। इसकी प्रेरक मिसाल हैं खोंगापानी, विकासखंड मनेन्द्रगढ़ की मत्स्य कृषक कामिनी रोहतिया, जिन्होंने वर्ष 2022 में मत्स्य विभाग के सहयोग से अपने लगभग 1 हेक्टेयर क्षेत्रफल के तालाब में वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन शुरू किया। आज यही तालाब उनके लिए आय का महत्वपूर्ण साधन बन गया है और वे प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख रुपये का लाभ प्राप्त कर रही हैं।

मत्स्य पालन ने बदली आय की तस्वीर

मत्स्य पालन शुरू करने से पहले कामिनी मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर थीं। कृषि कार्य में मेहनत अधिक होने के बावजूद अपेक्षाकृत कम आय प्राप्त होती थी। वर्ष 2022 में मत्स्य विभाग की नवीन तालाब निर्माण योजना के अंतर्गत उन्हें लगभग 1 हेक्टेयर तालाब निर्माण का लाभ मिला। इसके बाद उन्होंने तालाब का बेहतर उपयोग करते हुए मत्स्य पालन को अपनी आजीविका का साधन बनाया।

विभाग द्वारा उन्हें मत्स्य पालन की वैज्ञानिक तकनीक, तालाब प्रबंधन और मछलियों की देखभाल के संबंध में आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। विभागीय मार्गदर्शन के अनुसार उन्होंने तालाब में भारतीय प्रमुख कार्प (IMC) प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया। तालाब में लगभग 5 हजार फिंगरलिंग्स का स्टॉकिंग किया गया।

वैज्ञानिक प्रबंधन से बढ़ा उत्पादन

कामिनी तालाब में मछलियों के उचित प्रबंधन, पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी और समय-समय पर आवश्यक देखभाल पर विशेष ध्यान देती हैं। मत्स्य विभाग से प्राप्त प्रशिक्षण और तकनीकी सलाह के अनुसार वे तालाब प्रबंधन करती हैं। मछलियों में होने वाली संभावित बीमारियों की पहचान एवं रोकथाम के संबंध में भी उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

नियमित देखभाल और वैज्ञानिक पद्धति अपनाने का परिणाम उनकी आय में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। वर्तमान में लगभग 1 हेक्टेयर तालाब से मत्स्य पालन के माध्यम से उन्हें करीब 2 लाख रुपये का वार्षिक लाभ प्राप्त हो रहा है। मत्स्य पालन ने न केवल उनकी आय को बढ़ाया, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दिया है।

विभागीय मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी

कामिनी का कहना है कि मत्स्य विभाग द्वारा समय-समय पर दिए गए तकनीकी मार्गदर्शन से उन्हें तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज संचयन, मछलियों की देखभाल और उत्पादन बढ़ाने में काफी सहायता मिली। उनका अनुभव है कि यदि तालाब का सही प्रबंधन करते हुए वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन किया जाए तो सीमित संसाधनों में भी अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।

वर्ष 2022 से मत्स्य पालन करते हुए उन्होंने तालाब प्रबंधन और मछलियों की देखभाल का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया है। अब उनका लक्ष्य मत्स्य उत्पादन और आय को और बढ़ाना है। गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, बेहतर तालाब प्रबंधन और विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से वे भविष्य में अपने व्यवसाय को और विकसित करने के लिए प्रयासरत हैं।

अन्य किसानों के लिए प्रेरक संदेश

कामिनी अन्य किसानों को संदेश देते हुए कहती हैं कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन को आय का लाभदायक साधन बनाया जा सकता है। उनका सफल अनुभव बताता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर, विशेषज्ञों की सलाह अपनाकर और नियमित मेहनत के साथ मत्स्य पालन ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

कामिनी की सफलता आज यह संदेश देती है कि सही योजना, वैज्ञानिक तकनीक और निरंतर मेहनत से एक साधारण तालाब भी आत्मनिर्भरता और समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!