September 21, 2026 3:01 am

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दिल्ली में SIR पर सियासी भूचाल: विदेश मंत्री एस जयशंकर को चुनाव आयोग का नोटिस, सूची में पूर्व डिप्टी सीएम से लेकर बड़े अफसर शामिल

देश की राजधानी दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस सत्यापन प्रक्रिया के तहत केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और उनकी पत्नी समेत कई दिग्गजों को चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है।

इस सूची में केवल राजनीतिक हस्तियां ही नहीं, बल्कि देश के कई शीर्ष नौकरशाह, जांच एजेंसियों के प्रमुख और पूर्व सैन्य अधिकारी भी शामिल हैं। नोटिस जारी होने की खबर सामने आते ही राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में व्यापक चर्चा छिड़ गई है।

चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको एस जयशंकर नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सुंदर बाग पोलिंग स्टेशन के तहत पंजीकृत मतदाता हैं। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान उनके मौजूदा वोटर रिकॉर्ड को दिल्ली में वर्ष 2002 में हुए पिछले सघन पुनरीक्षण (Last SIR) के डेटा से सीधे लिंक (मैप) नहीं किया जा सका।

इस तकनीकी वजह से उन्हें ‘अनमैप्ड विद लास्ट एसआईआर’ (Unmapped with last SIR) श्रेणी में रखा गया है। चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल दस्तावेजों के पुनर्सत्यापन और डेटाबेस को अद्यतन (अपडेट) करने के लिए उठाया गया एक सामान्य प्रक्रियात्मक कदम है।

विदेश मंत्री के अलावा दिल्ली की राजनीति और विपक्ष के कई बड़े चेहरों को भी इस सत्यापन प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी हुए हैं:

  • मनीष सिसोदिया और परिवार: आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया और उनके बेटे मीर सिसोदिया को भी नोटिस मिला है। परिजनों के रिकॉर्ड में नाम और अभिभावक के विवरण (Mismatch) से जुड़ी विसंगतियों की बात सामने आई है।

  • अरविंद केजरीवाल का परिवार: इससे पहले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल और उनके परिजनों को भी पिछले रिकॉर्ड से डेटा का पूर्ण मिलान न होने के कारण ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में रखते हुए नोटिस जारी किया गया था।

  • लालकृष्ण आडवाणी परिवार: वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की पुत्री प्रतिभा आडवाणी का नाम भी इस प्रक्रिया के तहत सत्यापन सूची में शामिल रहा है।

  • जॉन ब्रिटास का परिवार: माकपा (CPM) सांसद जॉन ब्रिटास की पत्नी शेबा ब्रिटास और बेटे आनंद ब्रिटास को नाम और संबंध विवरण में विसंगति के चलते नोटिस जारी किया गया है।

  • मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का रिकॉर्ड: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी आयु संबंधी तकनीकी विसंगति के कारण पूर्व में नोटिस मिला था, लेकिन बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद उनके सभी दस्तावेजों की पुष्टि कर ली गई है और उनका नाम अंतिम सूची के लिए मान्य कर दिया गया है।

चुनावी डेटाबेस के इस गहन पुनरीक्षण की जद में देश के प्रशासनिक ढांचे के कई प्रमुख चेहरे भी आए हैं:

  • सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक प्रवीण सूद, उनकी पत्नी वनिता सूद और उनकी मां कमलेश सूद को भी ‘अनमैप्ड’ श्रेणी के तहत नोटिस मिला है।

  • पूर्व थलसेना प्रमुख: पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी का नाम भी पिछली मतदाता सूची से लिंक न होने की वजह से इस प्रक्रिया में शामिल है।

  • पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज: उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई और उनके परिवार के सदस्यों को भी इस श्रेणी में रखा गया है।

  • वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी: विदेश सचिव विक्रम मिस्री, सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे, प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद, स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव और कैग (CAG) के संजय मूर्ति जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के रिकॉर्ड भी सत्यापन प्रक्रिया के दायरे में हैं।

मतदाता सूची के इस बड़े अभियान को लेकर लोगों के मन में कई प्रकार के भ्रम हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि नोटिस मिलने का मतलब मतदाता सूची से नाम कटना या किसी को वोट देने से वंचित करना बिल्कुल नहीं है

दरअसल, जब किसी नागरिक का मौजूदा मतदाता पहचान पत्र पिछले डिजिटल रिकॉर्ड्स (विशेष रूप से 2002 की एसआईआर सूची) से तकनीकी रूप से मेल नहीं खाता, या नाम, पिता के नाम व जन्मतिथि की स्पेलिंग में अंतर होता है, तो सिस्टम स्वतः उसे सत्यापन के लिए चिह्नित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य चुनावी रिकॉर्ड को पारदर्शी, त्रुटिरहित और शत-प्रतिशत सटीक बनाना है।

निर्वाचन आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार, जिन भी मतदाताओं (चाहे वे आम नागरिक हों या वीवीआईपी) को नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) या बीएलओ के समक्ष जरूरी पहचान और निवास संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

  • नोटिस निस्तारण की अंतिम तिथि: आयोग ने प्राप्त दावों और आपत्तियों के निस्तारण के लिए 29 अक्टूबर की समयसीमा तय की है।

  • अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: सभी आवश्यक भौतिक सत्यापनों और सुधारों को शामिल करते हुए 4 नवंबर को दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

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