
भारतीय लोक कल्याणकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास के इतिहास में जब भी जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सुधार और कुपोषण मुक्त समाज की बात की जाएगी, तो छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किए गए अभियानों का नाम हमेशा सबसे ऊपर लिया जाएगा। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक हालिया संबोधन के दौरान छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य में चलाए जा रहे बेहद लोकप्रिय और स्वास्थ्यवर्धक अभियान ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ (Sahjan / Drumstick Campaign) की खुले दिल से जमकर सराहना की है, जिसके बाद से पूरे राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री द्वारा इस लोक-कल्याणकारी पहल की राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा किए जाने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यह गर्व से कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य सुधार के नवाचारों को अब पूरे देश में एक नई और बड़ी पहचान मिल रही है। मुनगा यानी सहजन के पौधे में मौजूद औषधीय गुणों और पोषक तत्वों को घर-घर तक पहुंचाने वाले इस अभियान ने बच्चों और महिलाओं में कुपोषण की समस्या से निपटने में एक बहुत बड़ी क्रांति ला दी है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि इस अभियान की क्या खासियत है और क्यों प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी इतनी सराहना की है।
‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान की परिकल्पना और इसके पीछे का स्वास्थ्य उद्देश्य
छत्तीसगढ़ के दूरदराज और आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के बीच कुपोषण (Malnutrition) और आयरन की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने कुछ समय पहले ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ नाम से एक अनूठा जन-अभियान शुरू किया था। सहजन या ड्रमस्टिक (Drumstick / Moringa) को वनस्पति विज्ञान और आयुर्वेद में पोषक तत्वों का पावरहाउस माना जाता है, जिसमें दूध से कई गुना अधिक कैल्शियम, संतरे से ज्यादा विटामिन सी और गाजर से अधिक विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। सरकार का यह उद्देश्य था कि लोग महंगे सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय अपने घरों के आसपास या बाड़ी में आसानी से उगने वाले मुनगा के पेड़ लगाएं और इसके पत्तों, फूलों तथा फलियों को अपने दैनिक भोजन में शामिल करें ताकि शरीर को सभी जरूरी विटामिन्स मुफ्त में मिल सकें। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात या अन्य राष्ट्रीय मंचों पर इस अभियान की सफलता का जिक्र करते हुए ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी की तारीफ की, तो इसने इस योजना को एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे दिया।
प्रधानमंत्री मोदी की सराहना से बढ़ा छत्तीसगढ़ का मान: मुख्यमंत्री ने जताया आभार
जब देश के प्रधानमंत्री किसी राज्य की किसी छोटी से छोटी और जमीनी योजना की तारीफ करते हैं, तो उससे न केवल प्रशासनिक अमले का मनोबल बढ़ता है, बल्कि उस योजना से जुड़े आम नागरिकों को भी एक नया सम्मान मिलता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना होना राज्य के हर एक नागरिक के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह सफलता छत्तीसगढ़ के मेहनती किसानों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिलाओं और स्थानीय प्रशासन की उस संयुक्त मेहनत का परिणाम है जिन्होंने इस अभियान को केवल कागजों तक सीमित न रखकर हर गांव और हर घर के चूल्हे तक पहुंचाया है। इस राष्ट्रीय मान्यता के मिलने से अब राज्य सरकार को ऐसे अन्य स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रमों को और अधिक तेजी से लागू करने की प्रेरणा मिली है, जिससे ग्रामीण इलाकों की तस्वीर तेजी से बदल रही है।
कुपोषण मुक्ति की दिशा में मुनगा (सहजन) बना एक वरदान: वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक महत्व
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और प्राचीन आयुर्वेद—दोनों ही इस बात पर एकमत हैं कि सहजन का पौधा किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है, क्योंकि इसका हर एक हिस्सा मानव शरीर के लिए औषधीय रूप से बेहद फायदेमंद होता है। छत्तीसगढ़ के जंगलों और ग्रामीण अंचलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले इस पौधे की खासियत यह है कि इसके लिए किसी विशेष सिंचाई या महंगे उर्वरकों की जरूरत नहीं पड़ती, और यह कम पानी में भी तेजी से बढ़ता है। अभियान के तहत ग्रामीण महिलाओं को यह प्रशिक्षित किया गया कि वे मुनगा की पत्तियों को सुखाकर उसका पाउडर कैसे बनाएं और कैसे उसे बच्चों के दैनिक दलिया, सूप या दाल में मिलाकर उनके पोषण स्तर को मजबूत करें। जिन क्षेत्रों में कुपोषण दर एक बड़ी चुनौती हुआ करती थी, वहां इस अभियान के लागू होने के बाद से बच्चों के स्वास्थ्य में एक अभूतपूर्व और सकारात्मक सुधार देखने को मिला है, जिसे देश के शीर्ष वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी अपने शोध में सराहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण का एक नया मॉडल बनकर उभरा यह अभियान
यह अभियान केवल स्वास्थ्य और पोषण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) और महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) की रीढ़ भी मजबूत कर रहा है। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं को मुनगा की खेती, इसके प्रोसेसिंग और इसके विभिन्न उत्पादों को बाजार में बेचने की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे उन्हें एक अतिरिक्त और स्थिर आमदनी का जरिया मिल रहा है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनती हैं, तो पूरे परिवार और समाज का विकास तेजी से होने लगता है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस मॉडल की प्रशंसा किए जाने का अर्थ यह है कि अब देश के अन्य राज्य भी छत्तीसगढ़ के इस सफल फॉर्मूले को अपने यहां लागू करने पर विचार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह अभियान देश के अन्य राज्यों के लिए भी ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार का एक बेहतरीन ब्लूप्रिंट साबित होगा।
भविष्य की योजनाएं और छत्तीसगढ़ में सतत विकास का नया अध्याय
प्रधानमंत्री की इस सराहना के बाद छत्तीसगढ़ सरकार के हौसले और अधिक बुलंद हो चुके हैं, और प्रशासन अब इस अभियान के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की योजना पर काम कर रहा है। राज्य के हर जिले में सहजन के लाखों पौधों का निःशुल्क वितरण करने के साथ-साथ स्कूलों और अस्पतालों के परिसरों में भी मुनगा वाटिकाएं विकसित की जा रही हैं ताकि आने वाली पीढ़ी इसके औषधीय गुणों से अच्छी तरह वाकिफ हो सके। कुपोषण मुक्त भारत के सपने को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ का यह ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान आज पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन चुका है। कुल मिलाकर, यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब सही दिशा में जमीनी स्तर पर काम किया जाता है, तो उसकी गूंज देश की राजधानी तक सुनाई देती है और वह नवाचार इतिहास के पन्नों में अमर हो जाता है।

















