
छत्तीसगढ़ के सुदूर दक्षिण बस्तर अंचल में लगातार जारी मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सोमवार को खुद वास्तविक स्थिति का मुआयना करने ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। सुकमा जिले में बाढ़ और गंभीर जलभराव के संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अपने अन्य प्रशासनिक कार्यक्रमों को स्थगित कर सीधे प्रभावित क्षेत्रों का रुख किया। उन्होंने जिले के विभिन्न जलमग्न इलाकों, संपर्क मार्गों और राहत शिविरों का सघन दौरा कर राहत व बचाव अभियानों की प्रत्यक्ष समीक्षा की। मुख्यमंत्री की इस त्वरित मौजूदगी ने आपदा के बीच राहत कार्यों में जुटे अमले में नई तत्परता भर दी है और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक आपदा के इस चुनौतीपूर्ण समय में राज्य सरकार का सर्वोच्च दायित्व प्रत्येक नागरिक की जान-माल की रक्षा करना है। दक्षिण बस्तर के नदी-नालों में आए उफान और कई गांवों के जिला मुख्यालय से कटे होने की सूचनाओं के बीच मुख्यमंत्री ने खुद बाढ़ के पानी से घिरे इलाकों का दौरा किया। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से सीधा संवाद कर प्रशासनिक तंत्र द्वारा अब तक उठाए गए कदमों की जमीनी हकीकत जानी, जिससे वास्तविक राहत वितरण में किसी भी प्रकार की कागजी औपचारिकता आड़े न आ सके।
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री सीधे जिला प्रशासन द्वारा बनाए गए अस्थायी राहत एवं पुनर्वास शिविरों में पहुंचे, जहां बाढ़ग्रस्त गांवों से सुरक्षित निकाले गए सैकड़ों परिवारों ने शरण ले रखी है। मुख्यमंत्री ने शिविर में मौजूद बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के पास बैठकर उनका कुशलक्षेम पूछा और उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने परिवारों से सीधी पूछताछ की कि क्या उन्हें समय पर पौष्टिक भोजन, शुद्ध पेयजल, सूखा राशन और जरूरी दवाइयां मिल पा रही हैं या नहीं। पीड़ितों को भरोसा दिलाते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह संकट का समय भले ही कठिन हो, लेकिन शासन उनके साथ एक मजबूत ढाल की तरह खड़ा है और किसी भी नागरिक को बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।
शिविरों में उपस्थित स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमों को सीएम ने निर्देश दिया कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों में डायरिया, हैजा और अन्य जलजनित बीमारियों के फैलने के खतरे को देखते हुए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण जारी रखें। गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य की विशेष निगरानी करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद स्वयं सहायता समूहों और सामाजिक संगठनों द्वारा चलाए जा रहे सेवा कार्यों की भी सराहना की और कहा कि प्रशासन तथा समाज का यह साझा प्रयास ही इस आपदा से उबरने का सबसे मजबूत जरिया बनेगा।
राहत शिविरों के निरीक्षण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुकमा कलेक्ट्रेट और आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष में जिला प्रशासन, पुलिस बल, होमगार्ड और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के आला अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने शबरी नदी सहित अन्य स्थानीय नालों के जलस्तर, जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों और अब तक चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन्स की विस्तृत रिपोर्ट तलब की। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि संकट की इस घड़ी में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लेटलतीफी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि दूरस्थ, वनांचल और पहुंचविहीन गांवों में यदि कोई भी ग्रामीण फंसा हुआ है तो उसे सुरक्षित निकालने के लिए बचाव दल चौबीसों घंटे पूरी क्षमता से सक्रिय रहें। इसके साथ ही उन्होंने राजस्व विभाग के अमले को निर्देशित किया कि जैसे ही जलस्तर में कमी आए, फसलों, कच्चे-पक्के मकानों और मवेशियों को हुए नुकसान का पारदर्शी और त्वरित सर्वे शुरू किया जाए। सीएम ने दो टूक कहा कि सर्वे रिपोर्ट में अनावश्यक विलंब किए बिना प्रभावित परिवारों को राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC 6-4) के तहत तय सरकारी मुआवजा राशि का वितरण तत्काल सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि लोग जल्द से जल्द अपने सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील दौरे के बाद पूरे सुकमा जिले में प्रशासनिक तंत्र पूरी मुस्तैदी से सक्रिय हो गया है। सुकमा, दोरनापाल, कोंटा और आसपास के तटीय इलाकों में सुरक्षा नावों और आपदा बचाव दस्तों की अतिरिक्त तैनाती कर दी गई है। जिला प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी कर आम नागरिकों से अपील की है कि वे जलभराव वाले पुल-पुलियों को पार करने का जोखिम न उठाएं और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें। मुख्यमंत्री साय ने आश्वस्त किया कि वे राजधानी रायपुर से भी पूरे बस्तर संभाग के हालात पर निरंतर नजर बनाए हुए हैं और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त वित्तीय और लॉजिस्टिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

















