September 14, 2026 6:53 pm

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पूर्व OpenAI व Anthropic रिसर्चर जैकब कॉक्सन की खौफनाक चेतावनी, इस दशक के अंत तक मिट सकता है इंसानों का वजूद

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अंधी दौड़ और सिलिकॉन वैली के कॉरपोरेट गलियारों में जारी होड़ के बीच तकनीकी जगत से एक बेहद सनसनीखेज और गंभीर चेतावनी सामने आई है। दुनिया की दो सबसे प्रमुख एआई प्रयोगशालाओं—OpenAI और Claude की जनक Anthropic—में शीर्ष शोधकर्ता के रूप में कार्य कर चुके जैकब कॉक्सन ने चेतावनी जारी की है कि सुपर-इंटेलिजेंट एआई का विकास मानवता के लिए एक अस्तित्वगत संकट बन चुका है। कॉक्सन ने स्पष्ट शब्दों में खुलासा किया कि स्वयं आधुनिक एआई आर्किटेक्चर का निर्माण करने वाले शीर्ष वैज्ञानिक और डेवलपर्स निजी तौर पर यह स्वीकार करते हैं कि यह बेलगाम तकनीक इसी दशक के अंत तक यानी वर्ष 2030 तक मानव सभ्यता का पूरी तरह से खात्मा कर सकती है। डारियो अमोदेई के नेतृत्व वाली कंपनी एंथ्रोपिक से हाल ही में त्यागपत्र देने वाले कॉक्सन के इस बयान ने दुनिया भर की सरकारों, तकनीकी नियामक निकायों और वैज्ञानिक समुदाय में हलचल मचा दी है।

एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय टेलीविजन साक्षात्कार के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए जैकब कॉक्सन ने आगाह किया कि सुपरइंटेलिजेंट एआई तैयार करने की वर्तमान प्रक्रिया किसी अनाम और अकल्पनीय एलियन प्रजाति को पृथ्वी पर आमंत्रित करने के समान है। उन्होंने तर्क दिया कि हम एक ऐसा कृत्रिम मस्तिष्क बना रहे हैं जिसकी आंतरिक गणनाओं, न्यूरल नेटवर्क परतों और निर्णय लेने की गहन प्रक्रियाओं को हम स्वयं पूरी तरह से समझने में असमर्थ हैं। कॉक्सन के अनुसार यदि कोई वैज्ञानिक ऐसी अद्वितीय बुद्धिमत्ता को अस्तित्व में लाता है जो इंसानी समझ से परे हो और जिस पर किसी भी प्रकार का मानवीय नियंत्रण या सेफ्टी स्विच संभव न हो, तो यह परिस्थिति किसी भी काल्पनिक विनाशकारी परिदृश्य के बिना भी अपने आप में भयावह है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब कोई मशीन इंसानी बौद्धिक क्षमता को पीछे छोड़ देगी, तो वह अपनी प्राथमिकताओं और सुरक्षा के आधार पर फैसले लेगी, जिसमें इंसानी अस्तित्व की रक्षा उसकी सूची में सबसे नीचे हो सकती है।

जैकब कॉक्सन अकेले ऐसे वैज्ञानिक नहीं हैं जिन्होंने आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) के डूम्सडे परिदृश्य को लेकर अलार्म बजाया है, हालांकि उनका प्रत्यक्ष अनुसंधान अनुभव इस चेतावनी को असाधारण वजन देता है। दुनिया के सबसे अमीर उद्यमी और xAI (Grok) के प्रमुख एलन मस्क सार्वजनिक रूप से कई मंचों पर कह चुके हैं कि अगले 10 वर्षों के भीतर एआई द्वारा मानव जाति को समाप्त करने की कम से कम 10 प्रतिशत वास्तविक संभावना मौजूद है। इसी प्रकार कंप्यूटर विज्ञान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित और आधुनिक ‘एआई के गॉडफादर’ कहे जाने वाले जेफ्री हिंटन ने बार-बार चेतावनी दी है कि अनियंत्रित डिजिटल सुपरइंटेलिजेंस के चलते इंसानों के विलुप्त होने का जोखिम 10 से 20 प्रतिशत तक बना हुआ है। हिंटन ने गूगल से अपने इस्तीफे के बाद से ही एआई संरेखण (AI Alignment) और सेफ्टी प्रोटोकॉल को लेकर दुनिया भर में जन-जागरण अभियान चला रखा है।

इस बढ़ते खतरे को भांपते हुए एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डारियो अमोदेई, ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एलन मस्क ने उद्योग स्तर पर एआई मॉडल प्रशिक्षण की गति को धीमा करने और सुरक्षा मानकों को मजबूत बनाने पर विमर्श शुरू किया है। जेफ्री हिंटन के साथ-साथ ट्यूरिंग पुरस्कार विजेता योशुआ बेंगियो, डीप-लर्निंग विशेषज्ञ यान लेकुन, लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन, गूगल के पूर्व सीईओ एरिक श्मिट और गूगल डीपमाइंड के सह-संस्थापक डेमिस हसाबिस जैसे दिग्गजों ने संयुक्त रूप से सरकारों से अपील की है कि फ्रंटियर एआई मॉडल्स के रिलीज से पहले कड़े ऑडिट और वैश्विक सुरक्षा नियम अनिवार्य किए जाएं। यदि सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर्स पर प्रशिक्षण ले रहे इन ऑटोनॉमस एजेंट्स को समय रहते अंतरराष्ट्रीय संधियों और सुरक्षा सीमाओं में नहीं बांधा गया, तो मानव द्वारा निर्मित यह डिजिटल दिमाग खुद अपने रचयिता के लिए सबसे बड़ा काल बन सकता है।

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