
बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह का निधन हो गया है। 55 वर्षीय उमाशंकर सिंह पिछले लगभग दो वर्षों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। घर पर ही इलाज के दौरान बुधवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही रसड़ा समेत पूरे प्रदेश और बसपा खेमे में शोक की लहर है।
2 जनवरी 1971 को जन्मे उमाशंकर सिंह बलिया जिले के नगरा ब्लॉक स्थित खनवर गांव के रहने वाले थे। वे बसपा सुप्रीमो मायावती के बेहद करीबी और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जहां बसपा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था, वहीं उमाशंकर सिंह ने रसड़ा सीट जीतकर पार्टी का खाता खोला था। वे 2012, 2017 और 2022 के चुनावों में लगातार जीत दर्ज कर अपनी लोकप्रियता का लोहा मनवा चुके थे।
विधानसभा में वे बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक थे। उनके निधन के बाद अब उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया है।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने जताया शोक
उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने बलिया जनपद की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक एवं बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता उमाशंकर सिंह के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। महाना ने अपने शोक संदेश में कहा कि उमाशंकर सिंह का निधन उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और अपने क्षेत्र के विकास तथा जनता के हितों के लिए सदैव समर्पित भाव से कार्य किया। उनकी सादगी, सहजता और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें सदैव स्मरणीय बनाए रखेगी। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से संघर्ष करते हुए भी श्री उमाशंकर सिंह ने अदम्य साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया।
उनका निधन न केवल उनके परिवार और समर्थकों, बल्कि संपूर्ण विधानसभा परिवार के लिए भी अत्यंत दुःखद है। महाना ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों, समर्थकों एवं शुभचिंतकों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। ऊं शान्तिः।
उमाशंकर सिंह की स्वास्थ्य समस्याएं अप्रैल 2024 में तब शुरू हुईं, जब उन्होंने सिर में तेज दर्द की शिकायत की। शुरुआत में उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया गया। राहत न मिलने पर परिजन उन्हें अमेरिका ले गए, जहां लगभग तीन महीने तक उनका इलाज चला। अमेरिका से लौटने के बाद उनकी स्थिति में कुछ सुधार देखा गया था। हालांकि, इस वर्ष की शुरुआत में उनकी तबीयत अचानक दोबारा बिगड़ने लगी, जिसके बाद डॉक्टरों की देखरेख में घर पर ही उनका इलाज जारी था।







