
Monsoon Session of Parliament: 20 जुलाई से जारी संसद के मॉनसून सत्र का आज (13 अगस्त) आखिरी दिन है। सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई और राम मंदिर में चंदे में गबन के मुद्दे पर चर्चा को लेकर हंगामा करता रहा है। अभी तक एक-आध मुद्दे छोड़ बाकी किसी पर भी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा के लिए सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में अब तक सत्र के कमोबेश सभी दिन हंगामे की भेंट चढ़ चुके हैं। अब सवाल यह है कि क्या मॉनसून सत्र के आखिरी दिन संसद में विपक्ष और सरकार के बीच जारी गतिरोध खत्म हो पाएगा?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और नीट विवाद को लेकर बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने विपक्ष से बात करने और NEET पेपर लीक के विरोध प्रदर्शनों पर विस्तृत चर्चा कराने की पेशकश की है। शाह ने कहा है कि समय तय होने पर वह गुरुवार को सदन में विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
लेक्चर सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं- राहुल गांधी
वहीं शाह की पेशकश पर विपक्ष का कहना है कि उन्हें अमित शाह के ‘लेक्चर’ सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, ‘विपक्ष ने साफ कहा है कि हमें अमित शाह का बयान सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। जब मैं ‘हम’ कहता हूं, तो मेरा मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया था? कील लगी लाठियों से छात्रों को पीटने का आदेश किसने दिया? क्या हमारे बच्चों पर गोली चलाने का आदेश अमित शाह ने दिया था? अगर उन्होंने ऐसा किया है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। पिछले 20 दिनों से अमित शाह गायब हैं।’
मैं पूरी तरह निराश- किरेन रिजिजू
उधर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, ‘मैं पूरी तरह निराश हूं। जिंदगी में पहली बार मैं ऐसा दृश्य देख रहा हूं जहां सरकार सदन में चर्चा चाहती है, लेकिन विपक्ष भाग रहा है। इसकी कल्पना करना मुश्किल है क्योंकि लोकतंत्र में विपक्ष ही चर्चा की मांग करता है और सरकार जवाब देती है। यहां तो सरकार खुद ही चर्चा के लिए कह रही है लेकिन विपक्ष जवाब सुनना नहीं चाहता है और वे भाग रहे हैं। आप इसकी कल्पना कर सकते हैं? ये परिस्थिति लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। विपक्ष की कोई जिम्मेदारी होती है। सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन साथ ही विपक्ष की भी जिम्मेदारी है।’
हम चर्चा को तैयार, विपक्ष भाग रहा- रिजिजू
उन्होंने आगे कहा, ‘NEET परीक्षा के पेपर लीक के बाद छात्रों ने आंदोलन किया, विपक्ष ने मांग की कि इस पर चर्चा होनी चाहिए, केंद्रीय गृह मंत्री का जवाब चाहिए। हम बार-बार कहते हैं कि हम चर्चा चाहते हैं लेकिन वे (विपक्ष) मान नहीं रहे हैं। मजबूरन केंद्रीय गृह मंत्री को एक पत्र लिखना पड़ा। गृह मंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र लिखा कि हम चर्चा के लिए बहुत खुले मन से, विस्तार से, चर्चा के लिए तैयार हैं। विपक्षी पार्टी के नेता को मनाइए। सरकार खुद स्पीकक से निवेदन कर रही है कि विपक्षी पार्टी के नेता को मनवाएं। मैं खुद बहुत व्याकुल हो चुका हूं चर्चा के लिए। हम चर्चा चाहते हैं। ये देश के लिए ठीक नहीं है।’
विपक्ष चाहे तो सत्र बढ़ा सकते हैं- रिजिजू
रिजिजू यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा, ‘मैं केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर बहुत दुखी हूं लेकिन एक सांसद के तौर पर भी मैं दुखी हूं। दुखी होना स्वाभाविक है क्योंकि संसद की कार्यवाही नहीं चलेगी तो सभी को दुख होगा। मॉनसून सत्र के दौरान जो कांग्रेस और कुछ विपक्षी दल हंगामा कर रहे हैं, अब जनता भी जानना चाहती है कि आखिर वे चर्चा से क्यों भाग रहे हैं? चर्चा और बहस के माध्यम से पूरी जानकारी देश तक पहुंचती है। मैं बहुत बूढ़ा नहीं हुआ हूं, लेकिन 30 साल का मेरा अनुभव है। तीन दशक के इस अनुभव के साथ मैं कह रहा हूं कि ऐसा विपक्ष मैंने अपने जीवन में नहीं देखा और न मैं कल्पना कर सकता हूं कि चर्चा से भागने वाला विपक्ष। संसद में सरकार अपनी बात नहीं रख सकती, वे (विपक्ष) सुनना नहीं चाहते हैं तो संसद कैसे चलेगा? अब तो कांग्रेस सोचती है कि उसका काम ही नारा लगाना, तख्तियां पकड़ना और गाली देना है। यही काम रह गया है? इसे सामान्य बना दिया गया है। ये लोग संसद में चर्चा और बहस तो भूल गए हैं। मैं कल्पना नहीं कर सकता हूं कि कांग्रेस एक जमाने में बड़ी पार्टी थी, लगभग 50 दशक से ज्यादा उन्होंने इस देश पर शासन किया और कांग्रेस पार्टी का यह हाल हो जाएगा इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता। क्या हो गया है कांग्रेस पार्टी को, चर्चा से भागने वाला पार्टी बन गया है। कौन विश्वास करेगा कि कांग्रेस इतना डूब जाएगी, उसकी यह हालत हो जाएगी। सोचा भी नहीं जा सकता है। अब मॉनसून सत्र का एक आखिरी दिन बचा है।’ उन्होंने यह भी कहा कि अगर विपक्ष चाहे तो सत्र बढ़ाया भी जा सकता है।
अब हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि सत्र के अंतिम दिन सदन में कितना कामकाज हो पाता है और किन महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।
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