रायपुर, 13 अक्टूबर 2026
मजबूत इच्छाशक्ति, निरंतर मेहनत और आधुनिक तकनीकों को अपनाने का संकल्प हो, तो सीमित संसाधनों से शुरू किया गया छोटा व्यवसाय भी आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है। इसकी प्रेरक मिसाल हैं सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कपाट बहरी निवासी श्री संतोष चौहान, जिन्होंने कभी एक-दो बकरियों के साथ पारंपरिक तरीके से बकरी पालन की शुरुआत की थी। आज पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन, वैज्ञानिक प्रबंधन और उन्नत नस्ल सुधार तकनीकों को अपनाकर वे बकरी पालन से सालाना लगभग पांच लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी यह सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन के माध्यम से स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की संभावनाओं को सामने लाती है।
सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत संतोष चौहान की कहानी दर्शाती है कि शासन की विभागीय सेवाओं और तकनीकी मार्गदर्शन का लाभ लेकर ग्रामीण परिवार अपने पारंपरिक आजीविका साधनों को बेहतर व्यवसाय के रूप में विकसित कर सकते हैं। संतोष ने पशुपालन विभाग से प्राप्त जानकारी के आधार पर बकरियों के रखरखाव, संतुलित आहार, टीकाकरण और नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान दिया। इससे उनके पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ तथा धीरे-धीरे उनका व्यवसाय आगे बढ़ता गया।
एक-दो बकरियों से की शुरुआत, कठिन परिस्थितियों में भी नहीं छोड़ा प्रयास
संतोष चौहान बताते हैं कि कुछ वर्ष पहले उन्होंने सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच एक-दो बकरियों के साथ बकरी पालन शुरू किया था। शुरुआत में यह उनके लिए अतिरिक्त आमदनी का एक छोटा साधन था। पारंपरिक तरीके से पशुपालन करने के कारण आमदनी भी सीमित थी, लेकिन उन्होंने इस कार्य को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। वे चाहते थे कि बकरी पालन केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित न रहे, बल्कि परिवार की नियमित आजीविका का मजबूत आधार बने।
इसी उद्देश्य से संतोष ने पशुपालन विभाग के अधिकारियों और मैदानी अमले से संपर्क किया। विभागीय मार्गदर्शन के माध्यम से उन्हें बकरियों के वैज्ञानिक रखरखाव, संतुलित पोषण, उचित आवास व्यवस्था, रोगों से बचाव, नियमित टीकाकरण और नस्ल सुधार के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने इन सुझावों को अपने पशुपालन कार्य में अपनाना शुरू किया। सीमित संसाधनों के बावजूद नियमित देखभाल और बेहतर प्रबंधन को प्राथमिकता देकर उन्होंने धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को व्यवस्थित रूप दिया।
वर्ष 2022-23 में अपनाई उन्नत तकनीक, नस्ल सुधार से बढ़ी उत्पादन क्षमता
संतोष चौहान के बकरी पालन व्यवसाय में महत्वपूर्ण बदलाव तब आया, जब उन्होंने वर्ष 2022-23 में पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन से कृत्रिम गर्भाधान सहित उन्नत पशुपालन तकनीकों को अपनाया। उन्होंने बकरियों की नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान दिया, ताकि पशुओं की गुणवत्ता, स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाया जा सके। इसके साथ ही संतुलित आहार, स्वच्छ आवास और समय पर टीकाकरण को पशुपालन की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बनाया।
वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने से बकरियों के स्वास्थ्य और वजन वृद्धि में सुधार लाने में मदद मिली। बेहतर देखभाल और नस्ल सुधार के प्रयासों से उनका व्यवसाय धीरे-धीरे विस्तार की ओर बढ़ा। एक-दो बकरियों से शुरू हुआ उनका सफर अब 10 से 15 उन्नत नस्ल की बकरियों तक पहुंच गया है। संतोष का अनुभव बताता है कि पशुपालन में केवल पशुओं की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता, पोषण, स्वास्थ्य और वैज्ञानिक देखभाल भी आर्थिक सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
बकरी पालन से सालाना लगभग पांच लाख रुपये की आय, परिवार को मिला आर्थिक संबल
निरंतर मेहनत और पशुपालन विभाग के तकनीकी सहयोग से संतोष चौहान ने बकरी पालन को आय के महत्वपूर्ण साधन के रूप में विकसित किया है। वर्तमान में वे इस व्यवसाय से सालाना लगभग पांच लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और घरेलू आवश्यकताओं तथा अन्य जिम्मेदारियों को पूरा करने में सहायता मिल रही है।
संतोष बताते हैं कि बकरी पालन में नियमित देखभाल, संतुलित आहार और पशुओं को बीमारियों से सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने विभागीय मार्गदर्शन को अपनाते हुए इन्हीं बातों पर विशेष ध्यान दिया, जिससे व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली। अब वे अपने पशुपालन कार्य को और अधिक विस्तारित करने तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बेहतर ढंग से संचालित करने की योजना बना रहे हैं।
वैज्ञानिक पशुपालन से ग्रामीण स्वरोजगार को मिल सकती है नई दिशा
ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन कम संसाधनों से शुरू की जा सकने वाली महत्वपूर्ण आजीविका गतिविधियों में शामिल है। पशुपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से पशुओं के स्वास्थ्य, पोषण, नस्ल सुधार और रोग नियंत्रण पर ध्यान देकर इस व्यवसाय को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है। संतोष चौहान ने इसी दृष्टिकोण को अपनाकर अपने पारंपरिक पशुपालन कार्य को आगे बढ़ाया है।
उनकी सफलता आसपास के किसानों और पशुपालकों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन रही है। संतोष का अनुभव दर्शाता है कि वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाने, समय पर टीकाकरण कराने और पशुओं के उचित प्रबंधन से बकरी पालन में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इससे ग्रामीण परिवार कृषि कार्यों के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने और स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
मेहनत और तकनीकी मार्गदर्शन से आत्मनिर्भरता की मिसाल बने संतोष चौहान
सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत संतोष चौहान की कहानी ग्रामीण आजीविका में वैज्ञानिक तकनीकों के महत्व को रेखांकित करती है। एक-दो बकरियों से शुरू किए गए व्यवसाय को उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन से आगे बढ़ाया। आज उनके पास 10 से 15 उन्नत नस्ल की बकरियां हैं और वे इस व्यवसाय से सालाना लगभग पांच लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं।
सरगुजा के संतोष चौहान की सफलता बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध आजीविका के पारंपरिक साधनों को आधुनिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। उनका यह सफर उन ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए प्रेरक उदाहरण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद पशुपालन के माध्यम से अपनी आजीविका मजबूत बनाने और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।








